मदन श्योराण, ढिगावा मंडी:

हिसार, भिवानी और पलवल के किसानों की कपास में 60 रुपये की कटौती की गई। काटन कार्पोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआइ) ने सोमवार को कपास में रेशा कम होने के कारण यह कटौती की। किसानों ने कहा हमारी कपास सर्वश्रेष्ठ है, ऐसी कौन सी लैब में चेक हुई है। इस बारे में सीसीआइ जानकारी सार्वजनिक करें।

एक अक्टूबर से लेकर 25 अक्टूबर तक जो उत्तम क्वालिटी की कपास खरीदी जा रही थी, वह अचानक 26 अक्टूबर को निम्न स्तर की बताकर 60 रुपये किसी आधार पर कटौती की गई, बताया जाए।

सोमवार को किसान रात 2:00 बजे से ही अपने वाहनों के लिए ढिगावा मंडी पहुंचे। सुबह 9:00 बजे कपास खरीद शुरू किसान अपना टोकन लेने के लिए मार्केट कमेटी अधिकारी के पास टोकन प्राप्त कर कॉटन मिल में पहुंचे तो किसानों के पैरों नीचे जमीन खिसक गई। कपास में एकदम से सोमवार सुबह 60 रुपये की कटौती सुनकर किसानों में हड़कंप मच गया। किसानों में करीब 2 घंटे तक अफरा-तफरी रही। इस दौरान दिल्ली पिलानी नेशनल हाईवे 709 पर वाहनों का करीब दो किलोमीटर लंबा जाम लग गया पुलिस ने बड़ी मस्कत के बाद जाम को खुलाया गया।

सीसीआइ के अधिकारी बनवारी लाल ने कहा कि कपास की खरीद को लेकर अलग-अलग नियम बनाए है। हिसार, भिवानी और पलवल जिले की कपास का रेशा कम होने के कारण कपास के रेट में कटौती की गई है। कॉटन कार्पोरेशन ऑफ इंडिया की नई रेट लिस्ट जारी

आठ से 12 फीसद तक कपास में नमी होनी चाहिए। इसके लिए अलग-अलग भाव किसान को दिए जाएंगे। आठ फीसद तक की नमी वाले फसल के 5665 रुपये प्रति क्विटल, 9 प्रतिशत तक नमी वाली कपास के 5608 रुपये प्रति क्विंटल, 10 फीसद तक नमी वाली के 5551 रुपये प्रति क्विंटल, 11 फीसद तक नमी वाली फसल के 5495 रुपये प्रति क्विंटल, 12 फीसद तक नमी वाली फसल के 5439 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से किसानों को दिए जाएंगे। किसानों ने बताया धोखा

मनोज, विकास, धर्मेंद्र, राकेश, प्रदीप, जितेंद्र सिंह, अशोक, राजवीर आदि किसानों ने कहा कि सरकार ने खुलेआम लूट मचा रखी है, जो कपास हमारे खेत में पैदा हुई थी वही कपास लेकर आ रहे हैं, क्या पिछले 25 दिन खरीदी गई कपास का रेशा ज्यादा था. अब सरकार कपास में रेशा कम होने का कारण बताकर प्रति कुंटल किसानों को रुपय 60 की चपत लगाई जा रही है।

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