संवाद सहयोगी, बाढड़ा : बाढड़ा उपमंडल के किसानों पर प्राकृतिक और प्रशासनिक दोनों मार पड़ती नजर आ रही हैं। मौजूदा सीजन की फसलों की बिक्री न होने से किसान की जेब खाली है। वह डीएपी व कृषि क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की किल्लत से जूझ रहा है वहीं बाजरा बिक्री न होने तथा स्पेशल गिरदावरी का पिछले साल का मुआवजा भी ना आने से किसानों को रबी सीजन की बुवाई संबंधी चिता सता रही है। क्षेत्र के किसानों में सरकार व प्राकृतिक मार को लेकर उपजे रोष से जनप्रतिनिधि भी किसान आंदोलन के बहाने गांवों में घुसने से मना कर रहे हैं। मौजूदा समय में कपास, बाजरा का ज्यादा उत्पादन किया गया है। लेकिन अबकी बार सरकार ने किसानों को चार हजार रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि देने का वायदा कर मूंग का भी उत्पादन करवाया। लेकिन क्षेत्र के किसानों की तीनों ही फसलें प्राकृतिक व सरकारी तंत्र की भेंट चढ़ गई है। एक तो सरकार द्वारा किसानों को मूंग की प्रोत्साहन राशि का न भेजना व दूसरे कपास, बाजरा तथा मूंग की फसलों का लगातार बरसात के कारण खराब होना यह सब उत्पादन में भारी गिरावट का कारण बना। सरकार ने किसानों की मांग पर स्पेशल गिरदावरी तो शुरू करवा दी। लेकिन पिछले कपास के सीजन की स्पेशल गिरदावरी का मुआवजा आज तक राज्य मुख्यालय में अटका हुआ है। मौजूदा समय में भी लगभग तीस हजार एकड़ अकेले बाजरे की फसल की बुवाई की गई है। लेकिन सरकार द्वारा भावांतर योजना लागू होने से मंडी में अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में खरीद न होने से किसानों की उम्मीद टूट रही है। 50 फीसद से अधिक फसलें हुई बर्बाद

किसान राधेश्याम उमरवास, सतपाल श्योराण, हवासिंह, गिरधारी मोद, रणधीर सिंह हुई इत्यादि ने बताया कि सरकार के आधुनिकीकरण से सबसे अधिक ग्रामीण क्षेत्र का किसान प्रभावित हो रहा है। प्राकृतिक मार ने पहले ही 50 फीसद से अधिक फसलें बर्बाद कर दी वहीं अब कपास का मुआवजा मिलने की उम्मीद भी टूट रही हैं। किसानों के सामने रबी सीजन की अगेती सरसों की बुवाई करने में बाधा आ रही है। लेकिन सरकार किसानों के हित के लिए कोई कदम नहीं उठा रही। कृषि क्षेत्र में पांच समस्याओं से किसान तंगहाल

इनेलो जिलाध्यक्ष विजय पंचगावां व हलका अध्यक्ष मा. सत्यवान शास्त्री ने कहा कि उपमंडल समेत जिले का किसान पांच गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। लेकिन सरकार सारे मामले पर चुप है। रबी व खरीफ सीजन का बकाया मुआवजा जारी न होना, फसल बीमा योजना में भारी गोलमाल, किसानों का स्पेशल गिरदावरी में नुकसान न दर्शाना, मूंग की प्रोत्साहन राशि ना मिलना, बाजरे की खरीद में भावांतर योजना लागू करना, खरीद बंद होना व रबी सीजन के लिए डीएपी, ट्यूबवेल के लिए बिजली आपूर्ति में कमी को लेकर सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है। लोगों को रामभरोसे छोड़ दिया गया है। खरीद एजेंसियों का अता-पता नहीं : शर्मा

बाढड़ा आढ़ती एसोसिएशन अध्यक्ष हनुमान शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार भावांतर योजना के नाम पर किसानों को प्रति क्विटल छह सौ रुपये की राशि जारी करने तथा एक चौथाई अनाज की खरीद करने का दावा कर रही है। लेकिन अक्टूबर माह का दूसरा सप्ताह गुजरने वाला है। खरीद एजेंसियां अता-पता नहीं है।

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