संवाद सूत्र, ढिगावा मंडी : इंसान दौलत से नहीं अपने कर्मों से बड़ा होता है। दौलत आज है कल नहीं पर कर्म शिक्षा ज्ञान सदैव साथ रहता है। राजयोग द्वारा मन में होने वाली हलचलों पर नियंत्रण पाया जा सकता है। हमारे कर्म हमेशा संसार के भले के लिए होने चाहिए। यह बात प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय ढिगावा मंडी की ब्रह्माकुमारी शकुंतला दीदी ने कही। वह रविवार को क्षीरसागर पर आयोजित योग तथा आत्म अनुभूति पर केंद्रित आध्यात्मिक योग समागम में आतंरिक शांति, शक्ति एवं खुशी का आधार राजयोग विषय विचार रख रही थी। ब्रह्माकुमारी पूनम ने कहा कि खुश रहने के लिए सात्विक भोजन करना चाहिए। जैसा अन्न हम ग्रहण करते हैं वैसा ही हमारा तन- मन होता है। सामाजिक ताना-बाना कमजोर न हो इसके लिए दुआएं कमाएं। किसी को दु:ख देकर कमाए गए धन से लक्ष्मी की कृपा हासिल नहीं होती है। पैसा आने के बावजूद मन की शांति खो जाती हैं। रिश्तों में टकराहट आने लगती है। इनसे बचने का एकमात्र उपाय सत्कर्म है। बीके पूनम ने कहा किसी से अपेक्षा मत रखो। अहंकार, अच्छे कर्मों के फल को भी निष्फल कर देता है। अहंकार, मोह, लालच, बेइमानी का परिणाम कभी अच्छा नहीं होता। बहुत कुछ करने के बावजूद सफलता-असफलता पिछले जन्मों के कर्म पर निर्भर करता है। हम सब कुछ अपने मनमाफिक चाहते हैं। यही दु:ख, अशांति और तनाव का सबसे बड़ा कारण है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अनुयायी पहुंचे।

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