टैंकर पलटने से ज्वालामुखी बना भिवानी का बहल, खंडहर में बदल जाता पूरा इलाका; कितना घातक और किस काम आता है जाइलीन केमिकल?
भिवानी के बहल कस्बे में पलटे टैंकर से रिसे जाइलीन केमिकल ने पूरे क्षेत्र को तबाह होने से बचा लिया, लेकिन यह अत्यधिक ज्वलनशील और घातक रसायन है।

टैंकर पलटने से ज्वालामुखी बना भिवानी का बहल। फोटो जागरण
HighLights
जाइलीन अत्यधिक ज्वलनशील, छोटी चिंगारी से भी भीषण आग का खतरा।
मानव स्वास्थ्य पर घातक असर: सिरदर्द, लिवर-किडनी क्षति, मृत्यु।
पर्यावरण के लिए जहरीला: हवा, पानी, मिट्टी को बंजर करने में सक्षम।
जागरण संवाददाता, भिवानी। भगवान का शुक्र है कि दक्षिण हरियाणा के जिले भिवानी का कस्बा बहल तबाह होने से बच गया। पलटे टैंकर से रिसे जिस जाइलीन नामक केमिकल में आग लगने से टैंकर और कस्बे का नाला ज्वालामुखी बन गए थे, वह इतना खतरनाक है कि पूरे कस्बे को वीरान खंडहर में बदल सकता था। हर किसी के लिए यह जानना जरूरी है कि यह केमिकल आखिर किस काम आता है और कितना घातक है। आइए बताते हैं।
मिक्स जाइलीन के उपयोग
- औद्योगिक क्षेत्र में प्रयोग: यह पेंट, थिनर, लाह और वार्निश में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। प्रिंटिंग उद्योग में स्याही को तेजी से सुखाने और घोलने के लिए इसे प्रयोग किया जाता है। रबर और चमड़े के प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) और निर्माण प्रक्रियाओं में यह काम आता है। इसका उपयोग पालिएस्टर फाइबर और विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक बनाने वाले रसायनों के कच्चे माल के रूप में किया जाता है। औद्योगिक मशीनों और सतहों से ग्रीस, तेल या कड़े दागों को साफ करने के लिए एक क्लीनर के रूप में भी इसका इस्तेमाल होता है।
- कीटनाशक बनाना: कृषि क्षेत्र में उपयोग होने वाले कीटनाशकों और कीट नियंत्रण रसायनों को तैयार करने में इसका उपयोग होता है।
- ईंधन योजक आक्टेन बूस्टर: गैसोलीन (पेट्रोल) के प्रदर्शन को बेहतर बनाने और उसके आक्टेन स्तर को बढ़ाने के लिए इसे ईंधन योजक के रूप में मिलाया जाता है।
- प्रयोगशालाओं में उपयोग: चिकित्सा और व्यावसायिक प्रयोगशालाओं में कुछ सामग्रियों को कीटाणु रहित करने और टिशू प्रोसेसिंग के लिए इसका उपयोग होता है।
कितना खतरनाक है मिक्स जाइलीन
आग और विस्फोट का भारी खतरा: यह अत्यधिक ज्वलनशील है। मिक्स जाइलीन का फ्लैश प्वाइंट बहुत कम (लगभग 27 से 32 डिग्री सेल्सियस) होता है। इसमें एक छोटी सी चिंगारी या अत्यधिक गर्मी से भी भीषण आग लगा सकती है। इसके वाष्प हवा के साथ मिलकर एक अदृश्य, विस्फोटक मिश्रण बनाते हैं।
मानव स्वास्थ्य पर घातक असर: यदि इतनी बड़ी मात्रा में केमिकल का रिसाव होता है, तो आस-पास की आबादी को अनेक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसके धुएं या वाष्प में सांस लेने से तुरंत सिरदर्द, चक्कर आना, उल्टी, मानसिक भ्रम और बेहोशी हो सकती है।
खराब हो सकती हैं लिवर और किडनी
बहुत अधिक मात्रा में सांस लेने पर व्यक्ति कोमा में जा सकता है या उसकी मौत तक भी हो सकती है। इसके सीधे संपर्क में आने से आंखें गंभीर रूप से जल सकती हैं और त्वचा पर छाले पड़ सकते हैं। लंबे समय तक इसके धुएं या इसके संपर्क में रहने से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (सीएनएस), लीवर और किडनी खराब हो सकती हैं।
पर्यावरण के लिए घातक
हवा में घुलकर यह आस-पास के काफी क्षेत्र में जहरीली धुंध पैदा कर सकता है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो सकता है। यह पानी में नहीं घुलता और पानी की सतह पर तैरता रहता है। इससे पानी जहरीला हो जाता है। मिट्टी में रिसने पर यह जमीन को बंजर बना सकता है और वहां के पेड़-पौधों को नष्ट कर देता है।
