3 बेटियों के बाद मिली थी बेटे की खुशी, 10 मिनट में मातम में बदली; भिवानी अस्पताल पर लापरवाही के गंभीर आरोप
भिवानी के जिला नागरिक अस्पताल में प्रसव के दौरान नवजात की मौत पर पिता ने चिकित्सकों और स्टाफ पर गंभीर ...और पढ़ें

भिवानी नागरिक अस्पताल (फाइल फोटो)
HighLights
भिवानी अस्पताल में प्रसव के दौरान नवजात की मौत, पिता ने लगाए आरोप
पिता कुलदीप ने चिकित्सकों और स्टाफ पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया
समय पर डिलीवरी रूम न ले जाने, रेफर न करने का दावा
नवनीत शर्मा, भिवानी। तीन बेटियों के बाद घर में बेटे के जन्म से परिवार को नई उम्मीद मिली थी, लेकिन कुछ ही देर बाद खुशियां मातम में बदल गईं।
जिला नागरिक अस्पताल में प्रसव के दौरान नवजात की मौत के बाद पिता कुलदीप ने चिकित्सकों और स्टाफ पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। बैंक कालोनी निवासी कुलदीप के अनुसार वह पत्नी संतोष को शुक्रवार को प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल लेकर पहुंचा था।
उसका आरोप है कि बार-बार आग्रह करने के बावजूद पत्नी को समय पर डिलीवरी रूम में नहीं ले जाया गया और इसी दौरान उसने वार्ड के बेड पर बच्चे को जन्म दे दिया।
कुलदीप का दावा है कि करीब 10 मिनट बाद नवजात की मौत होने की सूचना दी गई। उसने मामले की निष्पक्ष जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की है। अस्पताल प्रबंधन ने शिकायत मिलने पर जांच बोर्ड गठित करने की बात कही है।
प्रसव का समय बताया, फिर भी अल्ट्रासाउंड के लिए बाहर भेजने का आरोप
कुलदीप ने बताया कि शुक्रवार को पत्नी संतोष की हालत बिगड़ने पर वह उसे जिला नागरिक अस्पताल लेकर पहुंचा। उसने चिकित्सक को बताया कि पत्नी का प्रसव कभी भी हो सकता है।
आरोप है कि चिकित्सक ने तत्काल डिलीवरी की संभावना से इनकार करते हुए बाहर से रंगीन अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए कहा। कुलदीप के मुताबिक पत्नी को वार्ड के दूसरे कमरे में बाहर ले जाने के दौरान ही चक्कर आ गया।
इसके बाद उसने डिलीवरी रूम में ले जाने की गुहार लगाई। उसका आरोप है कि अस्पताल में मरीजों की अधिक संख्या होने की बात कहकर इंतजार करने को कहा गया। इसी दौरान संतोष ने वार्ड के बेड पर ही बच्चे को जन्म दे दिया।
रेफर करने को कहा, लेकिन इंतजार करने की बात कहने का आरोप
कुलदीप का कहना है कि उसने चिकित्सक से पत्नी को रोहतक पीजीआइ रेफर करने के लिए भी कहा था। उसने बताया कि वह एंबुलेंस से पत्नी को रोहतक ले जाने के लिए तैयार था, लेकिन उसके अनुसार समय पर रेफर नहीं किया गया।
कुलदीप ने आरोप लगाया कि प्रसव के दौरान मौके पर महिला चिकित्सक मौजूद नहीं थी। बच्चे के जन्म के बाद स्टाफ उसे अपने साथ ले गया और करीब 10 मिनट बाद उसकी मौत की सूचना दी।
हालांकि, प्रसव के दौरान चिकित्सकीय स्तर पर क्या स्थिति थी और नवजात की मौत किन कारणों से हुई, इसका निष्कर्ष जांच और मेडिकल रिकार्ड सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
आठवें महीने के अल्ट्रासाउंड को लेकर भी उठाए सवाल
कुलदीप ने बताया कि करीब 20-25 दिन पहले वह पत्नी को भारत नगर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर गया था। उसके अनुसार, वहां आठवें महीने में रंगीन अल्ट्रासाउंड करवाने की सलाह दी गई थी।
उसने आरोप लगाया कि कागजात में जन्मतिथि गलत दर्ज होने के कारण अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाया और आगे की प्रक्रिया प्रभावित हुई। कुलदीप ने अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि गर्भवती महिलाओं की आपात स्थिति में समय पर जांच, उपचार और जरूरत पड़ने पर दूसरे अस्पताल में रेफर करने की व्यवस्था होनी चाहिए। उसने संबंधित सीसीटीवी फुटेज की जांच करवाने की मांग भी की है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हुआ तो पीजीआइ में दोबारा जांच की मांग
कुलदीप ने बताया कि वह बुधवार सुबह 10 बजे अस्पताल अधिकारियों और दिनोद गेट पुलिस चौकी प्रभारी से मिलकर मामले में कार्रवाई की मांग करेगा। उसने कहा कि यदि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हुआ तो पीजीआइ रोहतक में दोबारा पोस्टमार्टम करवाने की मांग करेगा।
उसने चेतावनी दी कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर परिवार और समर्थकों के साथ अस्पताल परिसर में धरना दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर अनशन भी शुरू किया जाएगा।
