जेएनएन, बहल (भिवानी)। श्रीनगर के कुलगाम जिले के तुरीगाय में सर्च ऑपरेशन के दौरान आतंकियों से लोहा लेते हुए सोमवीर सिंह शहीद हो गए। शहादत से पहले सोमवीर ने जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकियों को ढेर कर दिया। शहीद का पार्थिव शरीर मंगलवार को उनके पैतृक गांव मिट्ठी पहुंचा, जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया गया।

इससे पूर्व शहीद का पार्थिव शरीर गांव में पहुंचा लोगों की आंखें नम हो गई। लोगों ने शहादत पर गर्व के साथ-साथ पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा भी था। परिजन शोकजदा थे। लोगों ने जहहिंद, भारत माता की जय के नारों के साथ शहीद सोमवीर को अंतिम विदाई दी। सोमवीर करीब 25 दिन पूर्व छुट्टी बिताकर गए थे। सोमवीर सिंह की 13 और 11 साल की दो बेटियां और 9 साल का बेटा है। शहीद के पिता शेर सिंह कादयान का आठ साल पहले दिल का दौरा पडऩे से देहांत हो गया था।

सोमवीर की शहादत की खबर सुनते ही पैतृक गांव मिठ्ठी व ससुराल शेरला में मातम पसर गया। शहादत के गम में बहल कस्बे के बाजार बंद हो गए। विभिन्न संगठनों ने धरने-प्रदर्शन और नेताओं ने अपने दौरे रद कर दिए। युवाओं ने पाकिस्तान के खिलाफ जुलूस निकाले और शहीद सोमबीर सिंह अमर रहे के नारे दिनभर कस्बे के बाजार में गूंजते रहे।

विलाप करते शहीद के परिजन।

शहीद का पार्थिव शरीर श्रीनगर से गत दोपहर करीब 3 बजे सेना के विमान से दिल्ली के लिए रवाना किया गया। वहां से पार्थिव शरीर रात को बहल पहुंचा और मंगलवार सुबह गांव पहुंचा। शहीद के बड़े भाई संजीव कादयान ने कहा कि भाई ने देश पर जान न्योछावर की है। इस पर उन्हें गर्व है। सरपंच रोहताश सांगवान ने कहा कि शहीद सोमबीर से गांव के युवा बेहद लगाव रखते थे। जब वह गांव में छुट्टी पर आता था हर किसी से मिलता था। सोमबीर का गांव के प्रति बेहद लगाव था।  

18 साल की उम्र में ही सेना में भर्ती हो गया था सोमबीर

गांव मिट्ठी में शेर सिंह कादयान और राजेन्द्री देवी के घर 4 फरवरी 1982 को जन्मे सोमबीर ने गांव के सरकारी स्कूल से 10वीं तक की पढ़ाई की। 18 साल की उम्र में 20 जनवरी को 8 जाट यूनिट में सिपाही के पद पर भर्ती हुए।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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