प्यारे अभिभावक सावधान! कहीं आपके लाडले को भी लोग न कहने लग जाएं 'ओए टिंगू'
बच्चों की लंबाई और वजन में कमी को नजरअंदाज न करें, यह शारीरिक वृद्धि का महत्वपूर्ण संकेत है। समय पर ...और पढ़ें

बच्चे की लंबाई और वजन में बढ़ोतरी उसकी शारीरिक वृद्धि का महत्वपूर्ण संकेत है। फाइल फोटो
HighLights
बच्चों की धीमी वृद्धि को नजरअंदाज न करें
समय पर जांच से बौनेपन का कारण जानें
भिवानी अस्पताल में प्रारंभिक जांच और परामर्श उपलब्ध
नवनीत शर्मा, भिवानी। बच्चे की लंबाई और वजन में बढ़ोतरी उसकी शारीरिक वृद्धि का महत्वपूर्ण संकेत है। यदि बच्चा अपनी उम्र के अन्य बच्चों की तुलना में कम लंबा है या उसकी लंबाई अपेक्षित गति से नहीं बढ़ रही है तो माता-पिता को इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
समय पर जांच से वृद्धि प्रभावित होने के कारण का पता लगाया जा सकता है और जरूरत के अनुसार उपचार शुरू किया जा सकता है। हर साल 25 अक्टूबर को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय बौनापन जागरूकता दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों ने बच्चों की नियमित निगरानी और समाज में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया है।
जिला नागरिक अस्पताल भिवानी में ऐसे बच्चों की काउंसलिंग और प्रारंभिक जांच की सुविधा उपलब्ध है। आवश्यकता के अनुसार बच्चों को पीजीआई रोहतक रेफर किया जाता है, जहां कारण के आधार पर आगे का उपचार किया जा सकता है। चिकित्सकों के अनुसार, कुछ मामलों में समय पर पहचान और उचित उपचार से सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।
हर बच्चे की वृद्धि का पैटर्न होता है अलग
बच्चों की लंबाई और वजन पर आनुवंशिक बनावट, पोषण, हार्मोन और अन्य स्वास्थ्य संबंधी स्थितियों का प्रभाव पड़ सकता है। ग्रोथ हार्मोन की कमी, थायरायड संबंधी समस्या और कुछ आनुवंशिक स्थितियां लंबाई कम रहने के संभावित कारण हैं। हालांकि, केवल कम लंबाई देखकर बौनेपन या किसी बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। इसके लिए बच्चे की उम्र, पिछली वृद्धि, पारिवारिक लंबाई और चिकित्सकीय जांच को ध्यान में रखना जरूरी है।
कारण के अनुसार उपचार भी
ग्रोथ हार्मोन की कमी होने पर विशेषज्ञ की सलाह से हार्मोन उपचार दिया जा सकता है। थायरायड संबंधी परेशानी में दवा की जरूरत हो सकती है, जबकि पोषण की कमी होने पर खानपान में सुधार किया जाता है। कुछ आनुवंशिक स्थितियों में फिजियोथेरेपी, सहायक उपकरण या चुनिंदा मामलों में सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है। हर बच्चे के लिए उपचार का तरीका अलग हो सकता है।
सामाजिक भेदभाव दूर करना भी उद्देश्य
अंतरराष्ट्रीय बौनापन जागरूकता दिवस का उद्देश्य केवल स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देना ही नहीं, बल्कि बौनेपन से प्रभावित लोगों के प्रति भेदभाव और गलत धारणाओं को दूर करना भी है। शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक स्थानों पर समान अवसर तथा सम्मान सुनिश्चित करना इस दिवस का महत्वपूर्ण संदेश है।
समय पर जांच से मिल रही मदद
जिला नागरिक अस्पताल भिवानी के चिकित्सक डॉ. मृदुल के अनुसार बौनेपन के कारणों के आधार पर उपचार की सुविधाएं उपलब्ध हैं। अस्पताल में आने वाले बच्चों की काउंसलिंग और जांच के बाद जरूरत पड़ने पर उन्हें पीजीआई रोहतक रेफर किया जाता है। वहां उपचार ले रहे एक बच्चे में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
उन्होंने कहा कि बौनापन एक शारीरिक स्थिति है और इसका उपचार कारण के अनुसार तय किया जाता है। अभिभावकों को बच्चों की वृद्धि पर नजर रखनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
