जागरण संवाददाता, चरखी दादरी : दीपावली हो या फिर किसी भी तरह का कोई भी आयोजन हम अक्सर पटाखे फोड़ते है। इन पटाखों से काफी नुकसान होता है। आसपास के लोगों को भी काफी तकलीफ होती है।

यह बात एचडी विद्यालय बिरोहड़ के निदेशक बलराज फौगाट ने कहा। उन्होंने कहा कि पटाखों से सबसे ज्यादा तकलीफ गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और छोटे बच्चों को होती है। पटाखों की आवाज से पशु-पक्षियों को भी परेशानियां होती हैं। फुलझड़ी, अनार व चकरी तेज आवाज नहीं करते लेकिन धुआं ज्यादा छोड़ते हैं जो खतरनाक होता है।

पटाखों से दीपावाली पर वायु प्रदूषण बीस गुना और ध्वनि का स्तर 15 डेसीबल बढ़ जाता है। पटाखे जलाने से कार्बन मोनो आक्साइड, सल्फ्यूरिक नाइट्रिक व कार्बनिक एसिड जैसी जहरीली गैस वायुमंडल में फैलती है। इससे मनुष्य के शरीर में कैंसर, जल स्त्रोत के दूषित होने की आशंका रहती है। दिल से जुड़ी बीमारी हो सकती हैं। दमा रोगी के लिए जानलेवा पटाखों के धुएं के साथ जो कण सांस नली में जाते हैं वे नली को बंद कर देते हैं।

कोविड-19 के साथ-साथ बढ़ता प्रदूषण आज बेहद ज्वलंत मुद्दा है। हमें विश्व को प्रदूषण के खतरे से बचाने के लिए गंभीरता से चितन करना होगा। इस मुहिम में अध्यापक वर्ग सबसे अहम भूमिका निभा सकता है। बच्चों पर शिक्षक की बातों का सकारात्मक प्रभाव होता है। अभिभावकों की अपेक्षा बच्चे शिक्षक की बातों और संदेशों को जल्दी अपनाते हैं। इसलिए शिक्षक विभिन्न कार्यक्रमों या ऑनलाइन शिक्षा के माध्यम से छात्रों को इस दीपावली पर पटाखे न जलाने का संदेश दें। प्रधानाचार्य सुनील कुमार ने भी दीपावली पर पटाखे न जलाने का संदेश दिया।

Edited By: Jagran