राजेश कादियान, बवानीखेड़ा: बवानीखेड़ा खंड के बीडीपीओ के कंधे पर इन दिनों जिले के 198 ग्राम पंचायत के विकास का जिम्मा है। यहां के बीडीपीओ जिले के सात खंडों में से पांच खंडों का कार्यभार संभालते हुए हैं। बवानीखेड़ा के अलावा उनके पास सिवानी और लोहारू तक का एरिया मिला है। इससे यहां के क्षेत्र के साथ दूसरे खंड के विकास कार्यों की फाइलों को निपटाने में समय भी लगता है। जिले में तैनात दो बीडीपीओ को पूरे जिले का कार्यभार दिया हुआ है।

बीडीपीओ रविद्र दलाल के पास बवानीखेड़ा सहित तोशाम, सिवानी, कैरू और लोहारू खंड का अतिरिक्त कार्यभार भी है। इसके चलते बीडीपीओ को इन खंडों के तहत आने वाले गांवों के विकास कार्यों की फाइल निपटाने के लिए दौड़ लगा रहे हैं। हालात यह है कि एक जगह नहीं बैठ पाने के कारण आम आदमी और पंचायत के सदस्यों को उनसे मिलने में दिक्कत होती है। बवानी खेड़ा के बीडीपीओ को दिए गए पांच खंड में 198 ग्राम पंचायत आती हैं। इन सभी ग्राम पंचायत में हो रहे विकास कार्य पर नजर रखने के लिए एक अधिकारी नाकाफी है। इतना ही नहीं तोशाम, सिवानी और लोहारू खंड में एसईपीओ के पद भी रिक्त हैं। इसके अलावा कई खंडों में ग्राम सचिव के पद भी खाली पड़े हुए हैं। बवानीखेड़ा खंड में चार ग्राम सचिव के पद खाली हैं। इसी प्रकार अन्य खंडों में भी 7 से लेकर आधा दर्जन तक ग्राम सचिवों के पद खाली पड़े हैं। खाली पड़े पदों के चलते जहां अधिकारियों पर काम का बोझ बढ़ रहा है वहीं कई जगह रिक्त पद होने के कारण समय पर कार्य भी निपटाने के समय लग रहा है।

अब ग्राम पंचायत भी विकास कार्यों को तेजी से करवाने और अधिकारियों को तैनात करवाने के लिए सरकार से मांग कर रही है। बीडीपीओ रविद्र दलाल ने बताया कि उनके पास फिलहाल 5 खंडों का कार्यभार है। पद रिक्त होने के चलते काम निपटाने में दिक्कत तो महसूस होती है। उनका प्रयास रहता है कि कोई भी काम पेंडिग न रहे। जिस खंड में भी जरूरी कार्य निपटाना होता है तो वे तुरंत वहां पर पहुंचते हैं और कर्मचारियों की बैठक लेकर भी उन्हें निर्देश दिए जाते हैं। कोई भी जरूरी काम में किसी प्रकार की अड़चन न आए।

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