जागरण संवाददाता, चरखी दादरी : नेशनल हाईवे 152 डी के लिए अधिग्रहण होने वाली जमीन के मुआवजा राशि में वृद्धि की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों के बृहस्पतिवार को रेल रोकने की चेतावनी के चलते पुलिस व प्रशासनिक अमला पूरी तरह से अलर्ट दिखाई दिया। दादरी जिला पुलिस के अलावा अन्य जिलों से बुलाए गए सुरक्षाकर्मी धरनास्थल के अलावा शहर के विभिन्न हिस्सों में तैनात रहे। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने धरनास्थल के समीप सभी साधनों को तैयार रखा। लेकिन किसानों ने शुक्रवार को अवार्ड रिवाइज करने को लेकर सुनवाई के चलते रेल रोको आंदोलन को स्थगित कर दिया लेकिन किसानों ने एक्शन मोड में रहते हुए मामले में किसी भी प्रकार की कोताही बरते जाने पर उसी समय रेल रोकने की चेतावनी दी है।

उल्लेखनीय है कि नेशनल हाईवे 152 डी के लिए अधिग्रहण होने वाली भूमि की मुआवजा राशि में वृद्धि की मांग को लेकर धरना दे रहे 17 गांवों के किसानों ने केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के साथ 12 जून को बैठक हुई थी जिसमें जमीन अधिग्रहण के लिए घोषित अवार्ड को रिवाइज कर नए रेट निर्धारित करने पर सहमति बनी थी। लेकिन नए रेट का निर्धारण न किए जाने से खफा किसानों ने 27 जून को रेल रोकने की घोषणा की थी।

किसानों द्वारा रेल रोकने के निर्णय के चलते पुलिस ने अल सुबह से ही मोर्चा संभाल लिया था। गांव रामनगर के समीप दादरी-कनीना सड़क मार्ग पर बड़ी संख्या में महिला व पुरुष पुलिस कर्मचारी तैनात रहे। धरनास्थल से करीब दो सौ मीटर दूरी पर प्रशासनिक अमले ने अपना डेरा डालकर किसानों की गतिविधियों पर नजर बनाए रखी। जिले में धारा 144 लगाए जाने के बावजूद किसानों ने सुबह आठ बजे से ही धरना स्थल पर पहुंचना शुरू कर दिया था। करीब 11 बजे तक सैकड़ों की संख्या में महिला व पुरुष एकत्रित हो गए थे। किसानों ने धरनास्थल पर पहुंच कर सरकार व प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रोष जताया।

धरने पर पहुंचे किसान नेता व मामले में किसानों के कानूनी सलाहकार रमेश दलाल ने कहा कि बुधवार देर रात प्रशासन की ओर से मामले में 28 जून को सुनवाई की सूचना दी गई है। जिसके चलते उन्होंने रेल रोको आंदोलन को कुछ घंटों के लिए टाल दिया गया है। उन्होंने कहा कि रेल रोको आंदोलन को स्थगित नहीं किया गया है। किसान एक्शन मोड में है और जब भी प्रशासन ने मामले में ढिलाई बरती वे उसी समय रेलवे ट्रेक पर जाकर रेल को रोक देंगे। किसानों ने मांगे पूरी न होने तक धरने को रात-दिन जारी रखने का एलान किया है।

प्रशासन ने किया आग्रह

रमेश दलाल ने कहा कि जिला प्रशासन ने उनसे किसानों के हक में कार्य करने का वायदा किया है। प्रशासन की ओर से आंदोलन की बजाए शांति पूर्वक रहने का आग्रह करते हुए मामले में शुक्रवार को सुनवाई का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि वे फिलहाल प्रशासन के आग्रह को मान लिया है। मामले में प्रशासन की ओर से की जा रही प्रक्रिया की हर घंटे रिपोर्ट लेंगे और यदि प्रशासन ने किसानों के मामले में ढि़लई बरती तो वे उसी समय रेल रोकने का काम करेंगे।

सैकड़ों पुलिसकर्मी रहे तैनात

किसानों द्वारा 27 जून को रेल रोकने की पूर्व घोषणा के चलते पुलिस प्रशासन बुधवार शाम से ही अलर्ट हो गया था। जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए दादरी जिले के अलावा पड़ोसी जिलों से पुलिस फोर्स बुलाई गई थी। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए दादरी, झज्जर, भिवानी, सोनीपत व रोहतक के करीब 13 सौ पुलिसकर्मी रामनगर के समीप धरनास्थल, रेलवे स्टेशन, ढाणी फाटक, रोहतक फाटक व शहर के दूसरे हिस्सों में तैनात रहे। धरने स्थल के आसपास प्रशासन ने एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, वाटर कैनेन, क्रेन व हरियाणा रोडवेज की बसें तैनात की गई थी । धारा 144 लागू रहेगी : डीसी

दादरी जिला उपायुक्त मुकेश कुमार आहूजा ने कहा कि मुआवजा वृद्धि मामले को लेकर कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी की सिफारिशों व किसानों की राय लेकर आगामी प्रक्रिया पूरी करेंगे। फिलहाल किसानों के धरने व अल्टीमेटम को देखते हुए जिले में धारा 144 यथावत लागू रहेगी व सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहेंगे। पांच ड्यूटी मजिस्ट्रेट किए गए नियुक्त

किसानों के रेल रोको आंदोलन के लिए पांच ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए। जिनमें जिला राजस्व अधिकारी सुखबीर सिंह को लघु सचिवालय, सिटी थाना, डीडीपीओ विशाल कुमार को रेलवे स्टेशन, तहसीलदार कंवल सिंह पातुवास महराण, ढाणी फाटक, बाढड़ा तहसीलदार साहबराम रोहतक फाटक, फतेगढ व बाढड़ा नायब तहसीलदार मुकेश कुमार रामनगर के समीप धरनास्थल पर के लिए ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए। सुनवाई से पहले कानून रेट निर्धारण जरूरी

किसानों की अगुवाई कर रहे रमेश दलाल ने कहा कि प्रशासन द्वारा अवार्ड रिवाइज मामले में शुक्रवार को सुनवाई तय की गई है। उन्होंने कहा कि रेट निर्धारित किए बिना सुनवाई करना कानून का उल्लंघन है। यदि प्रशासन की ओर से रेट निर्धारित किए बिना सुनवाई की जाती है तो ये कानून गलत होगा और संविधान के अनुसार ऐसा करने पर छह माह से तीन साल तक का प्रावधान है।

Posted By: Jagran

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