जागरण संवाददाता, भिवानी :

134ए के तहत दाखिलों के लिए अंतिम दिन तक जिले भर में प्राइवेट स्कूलों में 1256 बच्चों के दाखिले हुए। जिले में यह परीक्षा 2909 बच्चों ने दी थी जिनमें से 2184 का चयन हुआ था। 17 दिसंबर को परिणाम आने के बाद दाखिला प्रक्रिया शुरू हुई थी। इस बीच प्राइवेट स्कूलों ने इन बच्चों को दाखिला देने से इसलिए इनकार कर दिया था कि शिक्षा विभाग उनकी बकाया राशि नहीं दे रहा है। बाद में शिक्षा विभाग और सरकार की सख्ती के बाद स्कूलों ने दाखिला प्रक्रिया आगे बढ़ाई। शनिवार शाम पांच बजे तक जिला भर में 1256 बच्चों का दाखिला हो सका था और 170 बच्चों को अभी भी दाखिला नहीं मिला है। इन बच्चों का दाखिला करवाने के लिए विभाग किस प्रकार के कदम उठाता है यह अभी आने वाला वक्त ही बताएगा। जिले में 759 बच्चों ने दाखिला लेने में नहीं दिखाई दिलचस्पी :

जिले में 759 बच्चे ऐसे रहे जिन्होंने प्राइवेट स्कूलों में दाखिला लेने में रूचि नहीं दिखाई। इसके पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि अनेक बच्चे रहे जिनको पसंदीदा स्कूल नहीं मिला। इसके अलावा एक कारण यह भी बताया गया कि दाखिला लेने के बच्चे इच्छुक तो थे पर स्कूल दूर होने के चलते वहां तक पहुंचने के लिए सुविधा नहीं मिली। बहुत से बच्चे ऐसे भी रहे कि जिस प्राइवेट स्कूल में बच्चे पढ़ रहे थे उसी में दाखिले के लिए उन्होंने आवेदन किया था लेकिन उस स्कूल में उनका नंबर नहीं आया। ऐसे में जिला में भी शनिवार शाम तक 759 बच्चे रहे जिन्होंने दाखिला लेने में दिलचस्पी नहीं ली।

शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री के साथ बैठक के बाद अगला निर्णय : रामअवतार

सोमवार या मंगलवार को हमारी शिक्षा मंत्री या मुख्यमंत्री के साथ चंडीगढ़ में बैठक होनी है। इसके बाद हम अगला निर्णय लेंगे। फिलहाल हम 134ए के तहत दाखिले नहीं कर रहे हैं। कुछ अधिकारी नोटिस के माध्यम से भय दिखा कर कुछ स्कूलों में दाखिले करवा रहे हैं यह असहनीय है। रामअवतार शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष,

प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन बहुत से बच्चों के दाखिले हुए हैं, बाकी गाइड लाइन के अनुसार होगा : डीईईओ

134ए के तहत प्राइवेट स्कूलों में दाखिला लेने के लिए शनिवार अंतिम रहा। अभी तक प्राइवेट स्कूलों में 1256 दाखिले हो चुके हैं। दाखिलों से अभी तक जो बच्चे वंचित रह गए हैं उनके लिए सरकार और शिक्षा विभाग की जो भी गाइड लाइन आएंगी उसके अनुसार कदम उठाए जाएंगे।

रामअवतार शर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।

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