जागरण संवाददाता, बहादुरगढ़:

स्टोर्म वाटर ड्रेनेज को लेकर शहर के बीचोंबीच से गुजर रही वेस्ट जुआं ड्रेन एक बार फिर से सुर्खियों में है। करीब 67 करोड़ की लागत से नगर परिषद की ओर से इस ड्रेन को पक्का तो किया जा रहा है लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में एनजीटी के आदेशों की जमकर अवहेलना की जा रही है। एनजीटी की ओर से मनोज मिश्रा बनाम यूनियन आफ इंडिया एंड अदर्स ओए क्रमांक 300 में 13 जनवरी 2015 को फैसला सुनाया गया था कि स्टोर्म वाटर ड्रेनों को पक्का नहीं किया जाएगा। अगर ड्रेन पक्की होती है प्राकृतिक वाटर रिचार्ज, पेड़-पौधे व जीव-जंतु भी खत्म हो जाते हैं। पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के लिए ड्रेनों को कच्चा रखना जरूरी है। एनजीटी के इन आदेशों की अवहेलना किए जाने पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नगर परिषद बहादुरगढ़ व उसके कार्यकारी अधिकारी, कार्यकारी अभियंता, सचिव और एमई को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। गत 10 अक्टूबर को जारी किए गए इस नोटिस में बोर्ड ने 15 दिन में जवाब देने के निर्देश दिए थे लेकिन अधिकारियों की ओर से इस नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया जा सका। अब बोर्ड की ओर से नप के अधिकारियों के खिलाफ पर्यावरण कोर्ट में केस दायर करने की तैयारी शुरू कर दी है। 67 करोड़ का है वेस्ट जुआं ड्रेन प्रोजेक्ट:

वेस्ट जुआं ड्रेन का प्रोजेक्ट करीब 67 करोड़ का है। पूर्व विधायक नरेश कौशिक की मांग पर करीब 80 फीट के ड्रेन प्रोजेक्ट में आरसीसी नाला यानी ड्रेन सिर्फ 10 फीट की ही बनाई जा रही है। दोनों तरफ 20-20 फीट के रोड बनाए जा रहे हैं। पांच-पांच फीट के साइकिल ट्रैक और एक तरफ 10 फीट में पार्किग होगी तो दूसरी तरफ शेष जमीन में फुटपाथ बनाया जाएगा। वर्जन..

चुनाव में व्यस्त होने की वजह से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नोटिस का जवाब नहीं दे सके। एक-दो दिन में जवाब दे दिया जाएगा। वेस्ट जुआं ड्रेन का निर्माण नियमानुसार किया जा रहा है। विभाग के मुख्य अभियंता की ओर से तकनीकी स्वीकृति के बाद ही ड्रेन का निर्माण शुरू किया गया था। हमारे स्तर पर किसी तरह के आदेशों की अवहेलना नहीं की गई।

- अरुण कुमार, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद, बहादुरगढ़। वर्जन..

मनोज मिश्रा केस में एनजीटी ने आदेश दिया था कि स्टोर्म वाटर ड्रेनों को पक्का नहीं किया जा सकता। यह पर्यावरण के लिए खतरनाक है। मगर बहादुरगढ़ में वेस्ट जुआं ड्रेन को पक्का किया जा रहा है। एनजीटी के आदेशों का हवाला देकर मैंने नप के अधिकारियों को नोटिस दिया था। नोटिस का जवाब निर्धारित अवधि में नहीं आया। अब नप अधिकारियों के खिलाफ पर्यावरण कोर्ट में केस दायर किया जाएगा।

-कृष्ण कुमार, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बहादुरगढ़।

Posted By: Jagran

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