जागरण संवाददाता, बहादुरगढ़ :

गांवों में शहरों जैसी सुविधाएं देने के दावे तो हर सरकार में होते हैं, लेकिन स्वच्छता के मामले में गांवों की किस्मत ज्यादा नहीं बदली है। खुले में शौच पर तो काफी हद तक रोक लगी नजर आती है, लेकिन दिल्ली के नजदीक भी हरियाणा के अनेक गांवों में आज भी गंदगी ही आगंतुकों का स्वागत करती है। यहां तक की जो गांव नेशनल हाइवे के साथ बसे हैं, वहां पर भी यही आलम है। बहादुरगढ़ में ही बहुत से गांव ऐसे हैं, जहां पर गंदे पानी की निकासी की कोई व्यवस्था ही नहीं है। इसके लिए कोई सफल प्लानिग बनी ही नहीं। गंभीरता तो आज भी नहीं दिखती। पहले आबादी एरिया कम था। आसपास तालाब थे। खुली जमीन थी तो इन गांवों का गंदा पानी इधर-उधर जमा रहता था, लेकिन जैसे-जैसे आबादी का विकास हुआ। तालाब सिमटते गए और खुली जमीन पर निर्माण खड़े हो गए तो अब मुख्य गलियां और सड़कें गंदगी का ठिकाना बनी हैं। बहादुरगढ़ का रोहद गांव जो नेशनल हाइवे-नौ पर बसा है। यह झज्जर जिले का आखिरी गांव है। यहां से आगे रोहतक जिला शुरू होता है। इस गांव में कोई भी आगंतुक प्रवेश करता है तो लगता ही नहीं कि गांव कुछ तरक्की कर पाए। उल्टा यह आभास होता है कि स्वच्छता के मामले में गांव पीछे की तरफ चल पड़़े हैं। नई पंचायतें चुनी जाती हैं। कार्यकाल पूरा होता रहता है, लेकिन इस तरह की समस्याएं खड़ी रहती हैं। इसी हाइवे के साथ बसा बहादुरगढ़ का गांव जाखौदा भी ऐसी ही तस्वीर लेकर बैठा है। यहां पर तो गांव का गंदा पानी हाइवे की सड़क पर ही आकर ठहरता है। दूर तक सड़क की एक लेन तो गंदगी से ही अटी है। ऐसे हालत और कई गांवों में हैं। या तो गांव के पास से गुजरती हाइवे की सड़क पर गंदगी मिलती है या फिर गांव के मुख्य रास्ते पर गंदगी की वजह से पैर रखने की जगह नहीं होती। कुछ गांवों में नाले तो बने मगर सफाई और गुणवत्ता के अभाव में जल्द ही दम तोड़ गए। तकनीकी खामियों के कारण नाले सफल हुए ही नहीं। थ्री पोंड सिस्टम भी फले गए गए। अब बहादुरगढ़ के कुछ गांवों में पंचायत विभाग गंदे पानी के प्रबंधन की योजना पर काम तो कर रहा है, लेकिन ग्रामीण अंचल में उस दिन का इंतजार है, जब गांव सच में गंदगी मुक्त होंगे। वर्जन..

कुछ गांवों में निकासी की समस्या है। वहां पर इंतजाम किए जा रहे हैं। जाखौदा व रोहद में ज्यादा है। यहां पर नालों की सफाई के अलावा गंदे पानी का प्रबंधन किया जा रहा है। कुछ गांवों के लिए प्रोजेक्ट बनाए जा रहे हैं।

-युद्धबीर सिंह, बीडीपीओ, बहादुरगढ़

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