जल संरक्षण के लिए हम सबको चार सिद्धांत को अपनाना होगा। जागरण संवाददाता, बहादुरगढ़ :

सूर्या फाउंडेशन की ओर से संचालित आदर्श ग्राम योजना के अंतर्गत सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसमें प्रमुख रूप से पौधारोपण महाअभियान, 21 जून के अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए रजिस्ट्रेशन, वेबिनार के मध्यम से ग्राम विकास की बातें और साथ ही जल संरक्षण अभियान शामिल है। आज जल की महत्ता कितनी बढ़ गई है। जल है तो कल है, जल ही जीवन है, जीवन का आधार जल है। जल संरक्षण अभियान प्रमुख शत्रुहन लाल कश्यप ने बताया की जल संरक्षण के लिए हम सबको चार सिद्धांत को अपनाना होगा। जिसमें पहला है उपयोग कम करना। हमें जल के उपयोग करने की मात्रा को कम करना होहा, चाहे वह दैनिक जीवन में, खेतों में या कल कारखानों में। कम से कम जल का उपयोग कर कार्य करने होंगे। दूसरा है पुन: उपयोग करना। हमें जल का उपयोग बार बार करना होगा। जैसे नहाने, कपड़े धोने, बर्तन धोने के पानी का पौधों, पार्कों आदि में प्रयोग करना। आरओ से निकलने वाले पानी को बर्तन धोने, कपड़े धोने में प्रयोग किया जा सकता है। तीसरा है पुन: चक्रित करना यानी जो पानी खराब है और उपयोग योग्य नहीं है। उसे फिल्टर कर उपयोग करने लायक बनाना होगा। जैसे नाले का पानी या फिर शौचालय का पानी। इसको ट्रीट कर खेतों व पार्कों में प्रयोग किया जा सकता है। चौथा सिद्धांत है पुन: प्राप्ति करना। हम सभी को पता है हम पानी बना नही सकते, केवल बचा सकते हैं। इसलिए बारिश के जल को तालाब, कुएं, जलाशय, बांध और वाटर हार्वेस्टिग, सोखता गड्ढा, वाटर बैंक का निर्माण के मध्यम से हम भूजल स्तर को बढ़ा सकते हैं। इन चार सिद्धांत के माध्यम से हम अधिक से अधिक जल का संचय एवं संरक्षण कर सकते हैं। सूर्या फाउंडेशन ने इन्हीं सिद्धांतों के मध्यम से देश भर में जागरूकता अभियान शुरू किया है ताकि वर्षा जल संरक्षण के लिए पहले से तैयारी की जा सके और अधिक से अधिक जल संरक्षण में मदद मिल सके।

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