जागरण संवाददाता, बहादुरगढ़ :

लाइनपार स्थित 18 एमएलडी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के सैंपल फेल पाए जाने पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अब बड़ी कार्रवाई की है। बोर्ड ने एसटीपी का संचालन करने वाले जलापूर्ति एवं स्वच्छता विभाग पर 30 लाख रुपये का पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क लगाया है। शुल्क की संस्तुति बोर्ड के चेयरमैन की ओर से मिलने पर जलापूर्ति एवं स्वच्छता विभाग को इसे जमा कराने के आदेश थमा दिए जाएंगे। एनजीटी की ओर से निर्धारित किए गए पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की यह दूसरी कार्रवाई है। इससे पहले बोर्ड ने बहादुरगढ़ की दो डाई यूनिटों पर 12 लाख रुपये अधिक का शुल्क लगाया था। दोनों फैक्टरियों ने तुरंत इस शुल्क को जमा भी करवा दिया था।

दरअसल, गत 24 मई प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की स्थानीय टीम और 31 जुलाई को यमुना एक्शन प्लान के तहत एनजीटी की मॉनीटरिग टीम इस एसटीपी के सैंपल लिए थे। दोनों सैंपल जांच के लिए भेजे गए तो रिपोर्ट में ये फेल पाए गए थे। सैंपल फेल पाए जाने की रिपोर्ट प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन को भेजी गई थी तो उन्होंने एसटीपी के संबंधित विभागीय अधिकारियों और कार्यकारी एजेंसी के खिलाफ वाटर एक्ट के तहत पर्यावरण कोर्ट में केस दायर करने की मंजूरी दी थी, जिसके लिए कागजी कार्यवाही भी चल रही है। एनजीटी की टीम ने अधिकारियों पर भी लगाई थी फटकार:

एनजीटी की मॉनीटरिग टीम के सदस्यों ने छोटूराम नगर स्थित जनस्वास्थ्य विभाग के 18 एमएलडी प्लांट के निरीक्षण के दौरान पाया था कि यहां पर कोई भी कार्य निर्धारित मापदंड के अनुसार नहीं हो रहा था। ऐसे में एनजीटी टीम के सदस्य भड़क गए थे और जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर कड़ी फटकार लगाई थी। वर्जन...

एनजीटी की मॉनीटरिग टीम और बोर्ड की टीम ने पिछले महीनों में सैंपल लिए थे। ये सैंपल फेल पाए गए थे। एनजीटी के निर्देश पर सैंपल फेल पाए जाने की सूरत में एसटीपी का संचालन कर रहे विभाग पर 30 लाख रुपये पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क लगाया गया है। इन आदेशों की फाइल संस्तुति के लिए बोर्ड के चेयरमैन को भेज दी गई है। चेयरमैन की संस्तुति मिलते ही इस मामले में आगामी कार्रवाई की जाएगी।

- कृष्ण कुमार, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बहादुरगढ़।

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