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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 11, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

वास्‍तव में बड़ी धाकड़ हैं ये बेटियां, 20 में से 16 पर इनका कब्‍जा

By Sunil Kumar JhaEdited By:
Published: Mon, 11 Dec 2017 08:22 PM (IST)Updated: Tue, 12 Dec 2017 05:28 PM (IST)

हरियाणा में अखाड़े सामाजिक बदलाव के वाहक बन गए हैं। यहां से नारी सशक्‍तीकरण की बयार चली है। राष्‍ट्रमंडल कुश्‍ती ...और पढ़ें

वास्‍तव में बड़ी धाकड़ हैं ये बेटियां, 20 में से 16 पर इनका कब्‍जा
वास्‍तव में बड़ी धाकड़ हैं ये बेटियां, 20 में से 16 पर इनका कब्‍जा

बहादुरगढ़, [प्रदीप भारद्वाज]। भारत ही नहीं दुनिया में कहीं सामाजिक बदलाव की कहानी देखनी है तो हरियाणा के अखाड़ों में चले आइए। ये अखाड़े केवल खेलों में नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता के वाहक बन गए हैं। यहां से निकलीं हरियाणा की धाकड़ बेटियां छा रही हैं। यही कारण है कि राष्‍ट्रमंडल कुश्‍ती चैंपियनशिप के लिए 20 सदस्‍यीय भारतीय म‍हिला कुश्‍ती टीम में ह‍रियाणा की 16 बेटियां हैं। इनमें चार फाैगाट बहनें और साक्षी मलिक भी शामिल हैं। यह हरियाणा में महिलाओं के सशक्‍तीकरण का शानदार उदाहरण है। राष्‍ट्रमंडल कुश्‍ती चैंपियनशिप14 से 17 दिसंबर तक दक्षिण अफ्रीका में होगी।

बालपन से ही अखाड़े की मिट्टी को माथे में लगाया, दुनिया की सिरमौर बनीं हरियाणा की छोरियां

गांव-गांव में ऐसे अखाड़े व अकादमियों में बेटियां दिग्‍गजों को धूल चटाती दिखती हैं। बदलाव की कहानी इतनी आसान नहीं थी। गांव और समाज की बंदिशों की बाधाएं तोड़कर ये बेटियां गर्दिशों की माटी में खेली हैं और फिर विश्व पटल पर चमकी हैं। इसका ही परिणाम है कि एक के बाद एक हरियाणा की लड़कियां दुनिया में अपनी पहचान बनाने को तत्‍पर हैं।

हाल ही  में राष्‍ट्रमंडल कुश्‍ती के लिए चयनित महिलाओं की 20 सदस्‍यीय टीम में 16 केवल हरियाणा की हैं। परिवार अब अपनी बेटियों को चूल्हे-चौके तक सीमित न रखने की बजाय इस खेल में सफलता के शिखर पर ले जाने को आतुर हैं। सामाजिक बंधनों के खिलाफ मास्टर चंदगी राम व महाबीर फौगाट के संघर्ष ने देश को खेल प्रतिभाओं का ऐसा खजाना सौंप दिया जिससे निकले सितारे सदियों तक दुनिया में भारत मां को गौरवान्वित करती रहेंगी। आज हर कोई यह कहने को विवश हो जाता है कि बेटी अब कमजोर नहीं। बालीवुड ने भी महिला कुश्ती पर बनी दंगल फिल्म के जरिये हरियाणा को नजराना दिया।

कभी मना था घर से भी बाहर निकलना

बेशक ही आज साक्षी मलिक, फौगाट बहनों के अलावा कई और नाम कुश्ती के क्षितिज का सितारा बनी हों, मगर उन महिला पहलवानों की भूमिका और भी ज्यादा अहम मानी जाएगी, जो सामाजिक बंदिशों को तोड़कर इस शुरूआत की अगुवा बनीं। करीब दो दशक पहले तक तो प्रदेश में महिला कुश्ती की सोच रखने वाले गिने-चुने शख्स ही थे, लेकिन आज स्पेशल महिला अखाड़ों और कुश्ती अकादमी बढ़ती संख्या बहुत कुछ कह रही है।

गीता और बबीता फौगाट के अलावा सोनिका कालीरमण, किरण सिहाग, नेहा राठी ने भी हरियाणा में कुश्ती से पूरे नारी समाज को कामयाबी की राह दिखाई। यह वह दौर था जब गांवों में बटियों के लिए घर से निकलने की ही इजाजत नहीं थी। लेकिन, यह हर चुनौती को साहस से धराशायी करती आगे बढ़ती गईं।

कुश्ती के सरताज ने करवाया आगाज

कहते हैं कि कोई भी अच्छी शुरुआत करनी हो तो वह खुद से करें। निसंदेह ऐसी सोच किसी गुरु की ही हो सकती है। ऐसे ही गुरु रहे पद्मश्री मा. चंदगीराम। उनका अखाड़ा तो दिल्ली में है, लेकिन उन्‍होंने हरियाणा के पहलवानाें को राह दिखाई। मा. चंदगीराम मूलत रूप से हिसार जिले के गांव सिसाय के निवासी थे। प्रदेश में महिला कुश्ती को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका सबसे अहम मानी जाती है।

 गीतिका जाखड़, रीतू मलिक और संगीता कालीरमण।

उन्होंने अपनी बेटी सोनिका कालीरमण को 2000 के दशक में अखाड़े में उतारा था। वह चैंपियन महिला पहलवान बनीं। सोनिका की सबसे बड़ी बहादुरी यह रही कि सामाजिक रुकावटों के बावजूद वह उन महिला पहलवानों में से एक बनीं, जिन्होंने कुश्ती को अपनाने की हिम्मत दिखाई। सोनिका कई बार राष्ट्रीय चैंपियन रहीं। वह प्रथम महिला भारत केसरी रहीं और रुस्तम-ए-हिंद जैसे खिताब भी उन्होंने अपने नाम किए। साेनिका ने एशियन कुश्‍ती में पदक जीता और कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व किया।

महाबीर ने गीता को उतारा पेश की नजीर

चरखी दादरी जिले के गांव बलाली के महाबीर फौगाट ने अपनी बेटियों को अखाड़े में उतारा तो गांव ही नहीं खापों में हड़कंप मच गया। वह दंगल में बेटियों को लड़कों से लड़ाते थे और बेटियां उन्‍हें धूल चटाते हुए आगे बढ़ती चली गईं। गांव में पंचायतें हुईं, धमकियां मिलीं, लेकिन न महावीर का विश्‍वास डगमगाया और न बेटियां का हौसला। आज महाबीर फौगाट की बेटियां दंगल क्‍वीन के नाम से जानी जाती हैं।

गीता फौगाट ने राष्‍ट्रमंडल खेलों में सोना झटका तो बदलाव की इबारत लिखी जाने लगी। 10 वर्ष की उम्र में कुश्ती शुरू करने वाली गीता आैर उनकी बहन बबीता अखाड़े में लड़कों को भी छका देती थीं। आज उनके साथ बहनें भी कुश्‍ती में धुरंधर बन चुकी हैं।

गीता और बबीता के साथ बहनें भी दिखा रहीं दम

 

संगीता, गीता, विनेश, रीतू और बबीता फौगाट।

राष्‍ट्रमंडल कुश्‍ती प्रतियोगिता के लिए प्रतियोगिता में चरखी दादरी के बलाली गांव से एक ही परिवार की चार बेटियां भी शामिल हैं। फौगाट बहनों का दबदबा कुश्‍ती में सालों से है। महाबीर फोगाट की यह बेटियां सालों से नाम कमा रही हैं। इस बार गीता फौगाट के अलावा उनकी बहनें रितु फौगाट, संगीता फौगाट और उनके चचेरी बहन विनेश फौगाट चैंपियनशिप में पहली बार एक साथ मैट पर उतरेंगी।

अभी तक विदेशों में गीता, बबीता और विनेश तीन बहनें ही एक साथ प्रतियोगिताओं में मैट पर उतरती रही हैं।  महाबीर फोगाट की दूसरी बेटी बबीता 11 वर्ष की उम्र में ही कुश्ती की शुरूआत की। 2009 में राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप में स्वर्ण जीता। 2010 में दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में भी पदक जीता।

रीतू फौगाट तेजी से उभरी हैं। वह कई बार राष्ट्रीय चैंपियन बनी हैं। वह राष्‍ट्रमंडल कुश्‍ती में स्‍वर्ण पदक जीत चुकी हैं। महाबीर सिंह की बेटी संगीता ने 10 वर्ष की उम्र से कुश्ती सीखी। 2014 सब जूनियर राष्ट्रीय कुश्ती में स्वर्ण और एशियन कैडेट चैंपियनशिप में रजत पदक जीता। महाबीर फौगाट के भाई राजपाल की बेटी प्रियंका ने 10 वर्ष की उम्र से कुश्ती सीखी। आठ स्वर्ण व एक कांस्य अपने नाम किया।

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साक्षी के ओलंपिक पदक ने दे दी नई फर्जा

साक्षी ने ओलंपिक में हारी बाजी को क्‍या पलटा, हरियाणा की बेटियों की किस्‍मत बदल पलट गई। कांस्य पदक जीतने के बाद से ही साक्षी को प्रदेश ने ही नहीं पूरे देश ने सिर आंखों पर बैठाया था। उसके बाद से ही घर-घर में साक्षी का नाम है। और हर बेटी इस सपने को फिर से सच करने के लिए अखाड़े में दम लगा रही है।

इन बेटियों ने भी लंबी लड़ी लड़ाई

कुछ बेटियां और भी इस दौर में राष्‍ट्रीय व अंतरराष्‍ट्रीय फलक पर चमकीं। उनके योगदान को बिसारा नहीं जा सकता। हिसार की किरण सिहाग ने देश की चोटी की पहलवानों को हराया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बार देश का प्रतिनिधित्व किया। हालांकि किरण ने समय से पहले कुश्ती को अलविदा कह दिया था।

झज्‍जर निवासी ओलंपियन और अर्जुन पुरस्कार विजेता जगरूप राठी की पुत्री अंतरराष्ट्रीय पहलवान नेहा राठी ने 2002 में कॉमन वेल्थ में रजत पदक जीता। उन्‍होंने लंबे समय तक पहलवानी की। वर्ष 2013 में नेहा को अर्जुन अवार्ड मिला।

हिसार के अग्रोहा से ताल्लुक रखने वाली गीतिका जाखड़ पहले तो एथलीट बनी, लेकिन बाद में कुश्ती को अपनाया। वह 15 साल की उम्र में ही राष्ट्रीय चैंपियन बनी, 2003 में भीम अवार्ड जीता। एशियन और वर्ल्‍ड चैंपियनशिप में 2002 से लेकर 2014 तक अनेकों पदक जीते हैं।

हिसार के घिराय में 1984 में जन्मी निर्मला कई बार राष्ट्रीय चैंपियन रहीं। पहले वह कबड्डी खेलती थी। 2010 में दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीता। 2013 में पुन: राष्ट्रीय चैंपियन बनीं। जींद जिले के पिल्लूखेड़ा की सुमन बेहद गरीब परिवार से है और विकट परिस्थितियों से जूझते हुए सफलता पाई। वहीं रोहतक के सांपला से पहलवान रेखा तथा आहुलाना से रीतू मलिक भी आगे निकलीं।

भिवानी के गांव ढाणी में किसान के घर जन्मी अनीता ने पहले तो जूडो खेलना शुरू किया, लेकिन बाद में कुश्ती को अपनाया। 2010 में ट्रायल के दौरान अनीता ने गीतिका जाखड़ तक को हरा दिया था। बाद में कनाडा में स्वर्ण जीता। 2013 में फिर से राष्ट्रीय चैंपियन बनी।

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इन महिला पहलवानों से भी है उम्‍मीदें

हिसार की पूजा ढांडा यह होनहार पहलवान कई बार राष्ट्रीय चैंपियन रही। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पदक जीते। 2014 में जूनियर एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता। जींद के निडानी की यह पहलवान अब जूनियर में कई पदक जीत चुकी है। यह तेजी से उभरती पहलवान हैं।

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नई पीढ़ी को कुश्ती विरासत में मिली है। कुश्ती के इतिहास को सहज रहे मांडौठी गांव के मा. तेजपाल दलाल कहते हैं कि देश को प्रसिद्धि दिलाने में हरियाणा के पहलवानों का बड़ा नाम रहा है। अब प्रदेश को पुरुषों के साथ-साथ महिला पहलवानों के लिए भी जाना जाता है। भविष्य की तस्वीर और भी ज्यादा उजली नजर आती है।

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राष्‍ट्रमंडल कुश्‍ती में इन बेटियों का हुआ है चयन

कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप के लिए महिला पहलवानों की दो टीमें ए और बी जाएंगी। इनमें शामिल कुल 20 महिला पहलवानों में से  हरियाणा की 16 लड़कियां हैं। ये हैं-

1. विनेश फौगाट।

2. रितू फौगाट।

3. सीमा।

4. पूजा ढांडा।

5. गीता फौगाट।

6. साक्षी मलिक।

7. रीतू मलिक।

8. किरण।

9. पूजा।

10. निर्मला।

11. पिंकी।

12. संगीता फौगाट।

13. मनीषा।

14. रविता।

15. मोनिका।

16. कविता।

इसके अलावा उत्‍तर प्रदेश की चार पहलवानों को टीम में चुना गया है। ये हैं-

1. दिव्‍या काकरान।

2. गार्गी यादव।

3. मन्नू तोमर।

4. पूजा तोमर।


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देश के लिए कई मेडल जीतने की उम्मीद : मलिक

भारतीय महिला कुश्ती के चीफ कोच कुलदीप मलिक ने बताया कि कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप के लिए भारत की दो टीमें जाएंगी। इसमें से ए टीम को सरकार अपने खर्च पर भेजती है तो बी टीम की पहलवानों को खुद के खर्च पर जाना होगा। जिन 20 पहलवानों को टीम में रखा गया है, उनमें से 16 पहलवान अकेले हरियाणा से हैं तो उत्तर प्रदेश की चार पहलवानों ने जगह बनाई है।