जागरण संवाददाता, बहादुरगढ़:

11 वर्षाें से चार समस्याओं से त्रस्त ओमेक्स के लोगों के सब्र का बांध रविवार को टूट गया। ओमेक्स के लोगों ने अपनी मुख्य समस्याओं को लेकर द फेडरेशन आफ ओमेक्स सिटी रेजिडेंट्स के बैनर तले दो घंटे तक सांकेतिक धरना दिया और प्रशासन व ओमेक्स प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि प्रशासन की मिलीभगत के कारण ओमेक्स में रह रहे लोगों को आज तक मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं। सिटी में करीब 500 से ज्यादा परिवार रहते हैं। यहां पर विषैला जल सप्लाई किया जा रहा है, जिसका टीडीएस चार हजार से ज्यादा है। 66 फुटा सड़क की हालत भी काफी जर्जर है। यह रोड प्रशासन की ओर से तो बना दिया जाता है लेकिन ओमेक्स के अंदर का 30 फीसद हिस्सा कोई न कोई बहाना बनाकर छोड़ दिया जाता है। बारिश के दौरान यह रोड तालाब का रूप ले लेता है और सभी लोगों का आवागमन बंद हो जाता है। ओमेक्स में बिजली की दरें सामान्य दर से दोगुनी हैं। महंगी बिजली खरीदने के बाद भी ओमेक्स निवासियों को बिजली संकट का सामना करना पड़ता है। फेडरेशन की ओर से प्रशासन से कई बार लगाई जा चुकी है कि ओमेक्स सिटी को नगर परिषद के अंतर्गत कर दिया जाए लेकिन अधिकारी इस दिशा में कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। फेडरेशन ने बताया कि वर्ष 2017 से लेकर अब तक 100 से ज्यादा पत्र व 30 बार अधिकारियों के साथ आमने-सामने बैठकर वार्ता हो चुकी है लेकिन अब तक इन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। ऐसे में फेडरेशन ने पांच सवाल प्रशासन से पूछे हैं कि विकास का पैसा कहां खर्च हुआ, क्यों नहीं यहां के काम करवाए जा रहे, शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही, मूलभूत सुविधाएं ओमेक्स वासियों को कहां से मिले। इन सवालों के जवाब लेने के लिए रविवार को ओमेक्स के लोगों ने धरना दिया। अब 30 जनवरी को थाली जाएंगे तथा जल्द ही मानव श्रृंखला बनाकर रोष प्रकट करेंगे। इस मौके पर फेडरेशन के प्रधान एएस कौशिक, सतीश विश्वकर्मा, फूलकंवर, महिपाल मलिक, राकेश सक्सेना, राजेंद्र अग्रवाल, राजेश कुमार खत्री, मनीष गहलोत, हेमंत कुमार, एचएस दहिया, मनीष रोहिल्ला, आरएस मान, विकास वर्मा, विरेंद्र राणा, अमरदीप, राजेश बधवार, अरुण कुमार, नरेंद्र सैनी, संजय ढाका, रविद्र कुमार आदि मौजूद थे।

Edited By: Jagran