दीपक बहल, अंबाला

महिला उत्पीड़न के मामलों में पीड़ितों को अब जल्द न्याय मिलने का रास्ता खुल गया है। वजह है कि प्रदेश की तीनों को फोरेंसिक लैब ने अपने यहां फोरेंसिक रिपोर्ट का आंकड़ा शून्य कर दिया है।

सुनारिया (रोहतक), भोंडसी (गुरुग्राम) और मधुबन (करनाल) की फोरेंसिक लैब में रिपोर्ट देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके बाद अब भोंडसी की फोरेंसिक लैब में महिला उत्पीड़न एक भी मामला अब पेंडिग नहीं है, जबकि पहले जाच अधिकारी (आइओ) को एसपी के माध्यम से फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी मधुबन के निदेशक को रिमाइंडर भेजने पड़ते थे। यही नहीं तीन लैब में सभी अपराधों की रिपोर्ट देने का आकड़ा पहले जहा हर माह 940 के आसपास रहता था, अब 2561 पर पहुंच गया है। इस उपलब्धि के पर फोरेंसिक साइंस लेबोरेट्री मधुबन (करनाल) एवं रेवाड़ी दक्षिण रेंज के एडीजीपी एडीजीपी श्रीकात जाधव ने वैज्ञानिकों को ट्राफी देकर सम्मानित भी किया है।

प्रदेश में मधुबन की पहली लैब का गठन 1978 में हुआ। सन 2008 में एक वर्ष में करीब 10 हजार मुकदमों की रिपोर्ट जिलों में भेजी थी, लेकिन इस बार आठ माह में यह आकड़ा पार हो गया है। वैज्ञानिकों ने केवल आठ महीन में 11632 केसों की रिपोर्ट तैयार कर रिकार्ड बना लिया।

रिपोर्ट में देरी से अटकती थी तफ्तीश

अपराध के बाद मौका-ए-वारदात से मिले सुबूतों को सीलबंद कर प्रदेश की तीनों लैबोरेटरी में भेजा जाता है। यहा से रिपोर्ट मिलने के बाद ही पुलिस की तफ्तीश आगे बढ़ती है। लैब से लंबे समय तक रिपोर्ट नहीं मिलती थी जिस कारण कोर्ट में फैसला सुनाने में देरी हो जाती थी। एडीजीपी श्रीकात जाधव को जिम्मेदारी मिली तो हर तरह की रिपोर्ट देने का लक्ष्य तय कर दिया। नतीजा अब सबके सामने है।

एडीजीपी श्रीकात जाधव ने बताया कि भोंडसी लैब में महिलाओं उत्पीड़न के मुकदमों का निपटारा कर आकड़ा 0 पर पहुंच दिया गया है, जो पहले कभी नहीं हुआ। सिरम विज्ञान शाखा एफएसएल मधुबन जीरो पेंडेंसी करने वाली एफएसएल की पहली शाखा बनी। सीएडब्ल्यू (क्राइम अगेंस्ट वूमन) केसों, आरएफएसएल भोंडसी, सुनारिया की एनडीपीएस शाखा, डीएनए शाखा, बॉयोलॉजी (एफएसएल. मधुबन, सुनारिया) की पेंडेंसी जीरो करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। शाखाओं में माह के अंत में जीरो पेंडेंसी कर दी जाएगी।

Posted By: Jagran