हरियाणा में VIP नंबर लाखों में बिक रहे, लेकिन सरकार को फूटी कौड़ी नहीं; खरीद-फरोख्त रोकने के लिए नई नीति की तैयारी
परिवहन मंत्रालय वीआईपी नंबरों की अवैध बिक्री पर शिकंजा कसने की तैयारी में है, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है।

वीआईपी नंबर लाखों में बिक रहे, सरकार को फूटी कौड़ी नहीं। फाइल फोटो
HighLights
डेढ़ लाख की गाड़ी का नंबर लाखों में बिक रहा
नंबरों की खरीद-फरोख्त से सरकार को राजस्व नहीं
हस्तांतरण केवल रक्त संबंधियों तक सीमित हो सकता है
दीपक बहल, अंबाला। वीआईपी और फैंसी नंबरों की आड़ में चल रहे खेल पर परिवहन मंत्रालय शिकंजा कसने की तैयारी में है। डेढ़ लाख रुपये की गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर दो से तीन लाख रुपये में बिक रहा है, लेकिन इस सौदे से सरकारी खजाने में एक कौड़ी तक नहीं पहुंचती।
नंबर किसके नाम आवंटित हुआ और बाद में किसके पास पहुंच गया, इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को भी नहीं होती। परिवहन मंत्री अनिल विज के संज्ञान में ऐसे कई मामले आने के बाद अब नीति में बदलाव की तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद बोली प्रक्रिया से नंबरों के हस्तांतरण तक के नियमों में बदलाव संभव है।
ब्लड रिलेशन तक सीमित हो सकता है हस्तांतरण
प्रस्तावित नीति में वीआईपी और पसंदीदा रजिस्ट्रेशन नंबरों को दूसरे लोगों को हस्तांतरित करने के नियम कड़े किए जा सकते हैं। इसके तहत नंबरों का हस्तांतरण केवल रक्त संबंधियों यानी ब्लड रिलेशन में ही सीमित करने का प्रविधान करने पर विचार किया जा रहा है।
इससे नीलामी में नंबर हासिल करके बाद में उसे ऊंचे दाम पर बेचने वाले बिचौलियों पर लगाम लग सकेगी। इस संबंध में अंतिम फैसला नई नीति के प्रारूप और सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा।
लाखों में बिकता नंबर
वीआईपी नंबरों की ई-नीलामी का लक्ष्य पारदर्शी तरीके से नंबर आवंटित करना और सरकार के लिए राजस्व जुटाना है, लेकिन आवंटन के बाद नंबरों की खरीद-फरोख्त का अलग ही खेल चलने की शिकायतें सामने आई हैं। किसी व्यक्ति ने नीलामी में नंबर हासिल किया और बाद में दूसरे व्यक्ति को अधिक कीमत पर दे दिया तो इस सौदे की जानकारी विभाग तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है।
नंबर की कीमत लाखों रुपये तक पहुंचने के बावजूद सरकार को इस निजी सौदे से कोई अतिरिक्त राजस्व नहीं मिलता। इस तरह की गड़बड़ियों को रोकने के लिए नियमों की समीक्षा की जा रही है।
बोली से ट्रांसफर तक बदल सकते नियम
नई नीति में केवल नंबरों के हस्तांतरण ही नहीं, बल्कि बोली लगाने की प्रक्रिया और वाहन पंजीकरण से जुड़े दूसरे पहलुओं में भी बदलाव संभव है। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नीलामी में नंबर हासिल करने वाला व्यक्ति उसका इस्तेमाल वास्तविक जरूरत के लिए करे, न कि उससे मुनाफा कमाए। नये नियम बनने से विभाग को नंबरों के आवंटन और उनके बाद होने वाले हस्तांतरण पर निगरानी रखने में भी मदद मिलेगी।
मंत्री से मुख्यमंत्री तक पहुंचेगी फाइल
परिवहन मंत्री अनिल विज के स्तर पर नीति में बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। प्रस्तावित बदलावों से जुड़ी फाइल मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी तक जाएगी। वहां से मंजूरी मिलने के बाद नई नीति को लागू होगी।
