दीपक बहल, अंबाला शहर : अंबाला छावनी और शहर में भाजपा प्रत्याशियों पर जनता ने एक बार फिर भरोसा जताकर उन्हें विजयी बनाया है। जिसके चलते पार्टी में उनका भी कद बढ़ गया। कांग्रेस से टिकट न मिलने पर पिता और पुत्री ने अलग-अलग विधानसभा से चुनाव मैदान उतरे और कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दीं। आलम यह रहा कि अंबाला छावनी से कांग्रेस प्रत्याशी की तो जमानत ही जब्त हो गई, जबकि अंबाला शहर से प्रत्याशी भी अपनी जमानत नहीं बचा पाए। इस चुनाव में कांग्रेस से अलग होकर मैदान में उतरे इन दोनों प्रत्याशियों ने पार्टी के फैसले पर ही सवाल खड़े कर दिए। अंबाला शहर विधानसभा से भाजपा ने दूसरी बार असीम गोयल को चुनाव मैदान में उतारा। यहां पर कांग्रेस से बागी हुए पूर्व मंत्री चौधरी निर्मल सिंह आजाद प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतरे, जिससे मुकाबला तिकोना माना जा रहा था। लेकिन बृहस्पतिवार को चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस प्रत्याशी जसबीर मलौर की जमानत तक जब्त करवा दी।

इसी प्रकार अंबाला छावनी विधानसभा क्षेत्र में भी कांग्रेस से टिकट न मिलने पर आजाद प्रत्याशी के तौर पर पूर्व मंत्री निर्मल सिंह की बेटी चित्रा सरवारा चुनाव मैदान में उतरीं। जबकि कांग्रेस ने वेणु अग्रवाल को चुनाव मैदान में उतारा। हालांकि वेणु अग्रवाल का यह पहला चुनाव था, जबकि चित्रा सरवारा पहले नगर निगम में पार्षद भी रह चुकी हैं। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के निकट तक तो चित्रा नहीं पहुंच सकीं, लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी वेणु अग्रवाल की मुश्किलें जरूर बढ़ा दीं। विज के लिए आज का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है, क्योंकि वे लगातार छावनी विधानसभा से तीन बार चुनाव जीते और जीत का मार्जन भी बढ़ा दिया।

Posted By: Jagran

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