'भाई साहब! मोबाइल दिखाना, भुगतान को...'; दीपावली-छठ पर घर जाने में होगी दिक्कत, टिकट बुकिंग की समस्या से यात्री परेशान
दीपावली और छठ पूजा के लिए रेलवे टिकट बुकिंग सिस्टम में तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं, जिससे यात्रियों को लंबी कतारों और धीमी प्रक्रिया का सामना करना पड़ रहा है।
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दीपावली-छठ पर घर जाने में होगी दिक्कत। फाइल फोटो
HighLights
त्योहारों के कारण रेलवे टिकट बुकिंग सिस्टम धीमा पड़ रहा है।
भुगतान पुष्टि के लिए कर्मचारी यात्री के मोबाइल पर निर्भर।
CRIS ने तकनीकी निगरानी बढ़ाई, रिफंड प्रक्रिया में सुधार।
दीपक बहल, अंबाला। दीपावली और छठ पूजा पर घर जाने की तैयारी कर रहे रेल यात्रियों के लिए एडवांस टिकट बुकिंग शुरू होते ही सिस्टम की परीक्षा शुरू हो गई है। सुबह ठीक आठ बजे आरक्षण खिड़की खुलते ही करोड़ों रुपये के साफ्टवेयर और नई पीढ़ी के कंप्यूटरों पर पीआरएस पर बढ़ने वाले लोड का असर टिकट बुकिंग पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
कहीं आवेदन आगे नहीं बढ़ पा रहा तो कहीं टिकट बनने की प्रक्रिया बीच में ही रुक रही है। धीमी रफ्तार के कारण आरक्षण केंद्रों पर यात्रियों की लाइनें बढ़ती जा रही हैं। करोड़ों का साफ्टवेयर और नई जनरेशन के कंप्यूटर होने के बावजूद टिकट क्लर्क को पेमेंट की पुष्टि के लिए आवेदक से कहना पड़ता है- भाई साहबअपना मोबाइल दिखाना और उसमें पेमेंट खाते से कटने की पुष्टि होती है।
कर्मचारी के पास भुगतान की तत्काल स्वतंत्र पुष्टि करने का स्पष्ट तकनीकी माध्यम नहीं है। ऐसे में उसे यात्री के मोबाइल पर आया बैंक या भुगतान संबंधी मैसेज देखकर ही स्थिति समझनी पड़ रही है। भुगतान की स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर टिकट प्रक्रिया आगे बढ़ाने में भी असमंजस पैदा हो रहा है।
आठ बजते ही सिस्टम की परीक्षा
त्योहारी सीजन में आरक्षण के लिए सुबह से ही केंद्रों पर लाइनें लग रही हैं। आठ बजे जैसे ही बुकिंग शुरू होती है, बढ़े लोड से सिस्टम की रफ्तार धीमी पड़ जाती है। कई बार आवेदन आगे नहीं बढ़ता तो कहीं टिकट बनने के अंतिम चरण में प्रक्रिया रुक जाती है।
सीमित सीटों के कारण कुछ मिनट की देरी भी यात्रियों की पूरी यात्रा योजना बिगाड़ सकती है। घंटों लाइन में खड़े यात्रियों का गुस्सा अंततः काउंटर कर्मचारियों पर उतर रहा है।
उत्तर भारत के कई रिजर्वेशन सेंटरों में दबाव
उत्तर रेलवे, उत्तर पूर्व रेलवे और उत्तर पश्चिम रेलवे के विभिन्न रिजर्वेशन सेंटरों में सुबह की पीक बुकिंग अवधि में सिस्टम पर दबाव की शिकायतें सामने आई हैं। दीपावली और छठ के कारण सामान्य दिनों की तुलना में टिकटों की मांग कई गुना बढ़ने वाली है। ऐसे में मौजूदा तकनीकी दिक्कतें आने वाले दिनों में और गंभीर चुनौती बन सकती हैं।
सुबह आठ बजे क्रिस की विशेष निगरानी शुरू
लगातार आ रही शिकायतों के बीच सेंटर फार रेलवे इंफार्मेशन सिस्टम्स (क्रिस) की ओर से सुबह आठ बजे की पीक बुकिंग पर विशेष तकनीकी निगरानी शुरू हो गई है।
सिस्टम पर लोड की रियल टाइम निगरानी, एरर आने पर तत्काल रिकवरी और आरक्षण टिकट केंद्रों को स्पष्ट तकनीकी अपडेट उपलब्ध कराने से समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा रहा है।
रिफंड में आया सुधार
नए टिकटिंग सिस्टम में कुछ मामलों में सुधार भी हुआ है। टिकट रद होने के बाद रिफंड मिलने में पहले आठ-दस दिन तक लग जाते थे, जबकि अब कई मामलों में करीब तीन-चार दिन में राशि लौट रही है। रेलवे इसे और कम करने की दिशा में काम कर रहा है।
छह से अधिक यात्रियों के ग्रुप टिकट बनने अथवा चार्ट हैंग होने के दौरान प्रिंट में यात्रियों के नाम या अन्य विवरण गायब होने जैसी शिकायतें पहले सामने आती थीं। रेलवे कर्मचारियों के अनुसार नई व्यवस्था में इस समस्या में काफी सुधार हुआ है।
नई व्यवस्था में आने-जाने की टिकट बुक करने वाले यात्रियों को सुविधा दी है। आगे की यात्रा के लिए नाम फीड करने के बाद वही यात्री वापसी की यात्रा कर रहे हैं तो टिकट बनाते समय नाम दोबारा फीड करने की जरूरत नहीं पड़ती।
यात्री बोले- बहुत समय लग रहा
अंबाला में टिकट खिड़की पर आरक्षित टिकट लेने वाले कई यात्रियों ने बताया कि टिकट बनवाने में बहुत समय लग रहा है। टिकट बनाने वाला कर्मचारी सभी के मोबाइल पर पेमेंट का मैसेज देखते हैं। उनके पास पेमेंट रिसीव होने का कोई ब्योरा उपलब्ध नहीं है।
