जागरण संवाददाता, अंबाला शहर : नागरिक अस्पताल अंबाला शहर में दिव्यांग बच्चों के लिए लगाए शारीरिक मूल्यांकन कैंप में पहुंचने को लेकर अभिभावकों की परेशानी कम नहीं हो रही। शुक्रवार को शहजादपुर खंड के दिव्यांग बच्चों के लिए कैंप लगाया गया था। इस कैंप में दिव्यांगों को लाने ले जाने का जिम्मा डीपीसी कार्यालय का है। जो वाहन इस कार्य में लगे हैं उनमें दिव्यांग एवं अभिभावकों की संख्या कहीं ज्यादा रहती है। वहीं, शुक्रवार को कैंप में पहुंची मुकंदपुर की नीलम को इस वाहन को पकड़ने से पहले अपने दिव्यांग बेटे के साथ करीब ढाई किलोमीटर पैदल चलना पड़ा, जबकि डीपीसी कार्यालय इस कार्य में 10 वाहन लगाए होने का दावा कर रहा है।

शुक्रवार को शहजादपुर ब्लॉक के दिव्यांग बच्चों का शारीरिक मूल्यांकन किया गया। इस कैंप में पहुंचे कुल 79 बच्चों में श्रवण व वाणी दोष के 11, दृष्टि संबधी 8, मानसिक रोग के 30 तथा शारीरिक रूप से ग्रस्त 20 बच्चों का परीक्षण हुआ। जिनका आवश्यकता अनुरूप कैलिपर, ट्राई साईकल, व्हील चेयर तथा अन्य उपकरणों हेतु माप लिया गया।

जूते नहीं, आर्थिक मदद चाहिए

मुकंदपुर की रहने वाली नीलम अपने 13 वर्षीय बेटे निखिल को लेकर कैंप आई थी। नीलम ने बताया कि वह अपने बच्चे लेकर गांव से धनाना बस अड्डा करीब ढाई किलोमीटर पैदल चल कर आई। जहां से उसे गाड़ी में बिठाया गया, जबकि उन्हें गांव से वाहन मिलता तो यह परेशानी न झेलनी पड़ती। वहीं, बेटे पर प्रति माह लगभग 1500 रुपये खर्च होता है जबकि कैंप से उन्हें बच्चे के जूते ही मिले हैं। जो इतने जरूरी नहीं जितनी कि आर्थिक मदद की जरूरत है।

रानी को बेटी के लिए चेयर व वॉकर की जरूरत

वजीरपुर गांव से रानी अपनी तेरह वर्षीय बेटी यीशु के साथ आई थी। रानी ने बताया कि वह ऐसे कैंपों में कई बार आ चुकी है। छह माह पहले उसे बच्चे के लिए व्हील चेयर मिली थी और नए व्हील चेयर व वॉकर की जरूरत है। पिछले साल जो सर्टिफिकेट बन गया था।

बेटे के लिए ट्राइसाइकिल की उम्मीद में आई ममता

जटवाड़ गांव से ममता देवी अपने 15 वर्षीय बेटे सतविद्र सिंह को साथ लेकर आई थी। ममता ने बताया कि कैंप में उसे पहले व्हील चेयर मिली थी अब वह ट्राई साइकिल की उम्मीद में आए हैं। कैंप में एक बार फिर से उसके बेटे की जांच की गई है।

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Posted By: Jagran

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