हरीश कोचर, अंबाला

आज जिस घर में बेटे के जन्मदिन के उपलक्ष्य में खुशी का माहौल होना चाहिए था, वहां आज परिजनों को रो-रोकर बुरा हाल हो रहा है। छावनी के महेशनगर निवासी आदित (19 वर्षीय) की रविवार को एक ऐसे हादसे ने जान ले ली जिसे उसके परिजन ही नहीं दो दोस्त भी तां उम्र भूला नहीं पाएंगे। सोमवार यानि आज आदित का 20वां जन्मदिन है और अभी तक उसकी चिता की आग भी ठंडी नहीं हुई है। जश्न की जगह उसके फूल चुगे जाएंगे। रविवार को जन्मदिन से महज एक दिन पहले अपने दो दोस्तों के साथ अंबाला छावनी रेलवे स्टेशन यार्ड में पहुंचा आदित वहां खड़ी मालगाड़ी की छत पर चढ़ गया और वहीं 25 हजार हाईवोल्टेज की तार से लगे करंट ने उसकी जान ले ली। हालांकि उसके दोस्त शिवराज और आशीर्वाद ट्रेन से नीचे कूद गए तो बाल-बाल उनकी जान भी बच गई। मौके पर आदित के पिता विकास पाठक पहुंचे तो बेटे का जला शव देख हिम्मत टूट गई जिसके बाद उन्हें घर ले जाया गया।

----------------------

बेटे के सिर पर आखिरी बार फेरा हाथ

आदित के घर में उसकी मां सुमन पाठक, पिता विकास पाठक, दादी व बड़ा भाई दिव्यांशु है। उसके पिता एक मेडिकल कंपनी में मार्के¨टग की नौकरी करते हैं। परिवार में सभी पढ़े-लिखे हुए हैं। बड़ा भाई लॉ की पढ़ाई के साथ-साथ अंबाला शहर कोर्ट में एक वकील के पास प्रेक्टिस कर रहा है। जब पिता ने घटनास्थल पर स्ट्रेचर पर पड़ा बेटा का शव देखा को बेसुध हो गए। क्योंकि बेटे का आगे से पूरा शरीर जला हुआ था। यहां तक की आदित का चेहरा तक पहचान में नहीं आ रहा था।

---------------------

छह-सात सालों में घर में चौथी मौत

दरअसल आदित पाठक का परिवार कई सालों से मतीदास नगर में रहता था। आस पड़ोस के लोगों ने बातचीत के दौरान बताया कि इस घर में कुछ सालों में कई मौतें हो गई। इसी कारण वह लोग अपना यह मकान छोड़कर महेशनगर थाने के पीछे वाली गली में स्थित दूसरे घर में शिफ्ट कर गए। उनके पुराने घर में आदित के चाचा की करीब कुछ साल पहले हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। चाचा की मौत से महज 24 घंटे बाद यानि अगले ही दिन आदित की बुआ की भी मौत हो गई थी। वह अपने कुंवारे भाई की मौत का गम सहन नहीं कर पाई थी। वहीं 3-4 साल पहले आदित के दादा का भी देहांत हो गया था। इसके बाद ही इन्होंने अपना पुराना घर छोड़ दिया था।

----------------------

एक साथ आर्मी स्कूल में पढ़े तीनों दोस्त

जानकारी के मुताबिक मृतक आदित ने वर्ष 2004 में छावनी के आर्मी पब्लिक स्कूल में पहली बार दाखिला लिया। यहीं कुछ साल पहले उसकी दोस्ती महेशनगर निवासी शिवराज व देहरादून निवासी आशीर्वाद के साथ हुई। आशीर्वाद के पिता सेना में कर्नल है और उनकी पो¨स्टग पहले अंबाला छावनी में ही थी। लेकिन कुछ समय पूर्व उसके पिता का तबादला अंबाला से सहारनपुर हो गया और वह वहीं चले गए। हालांकि इसके बावजूद इन तीनों का पक्का याराना था। इसी साल बारहवीं पास करके आदित व शिवराज ने एक साथ पंजाब की चितकारा यूनिवर्सिटी में बेचलर आफ बिजलेस एडमिनिस्ट्रेशन (बीबीए) में दाखिल लिया था।

----------------------

दो साल पहले बलदेवनगर में हुआ था हादसा

करीब डेढ़ से दो साल पहले अंबाला शहर के बलदेवर नगर में भी एक ऐसा ही हादसा हुआ था। वहां भी एक युवक ट्रेन की छत पर चढ़ गया था जो कि हाईवोल्टेज तार से करंट ही नीचे गिर गया था। हालांकि बाद में जांच-पड़ताल के दौरान सामने आया कि वह युवक मानसिक रूप से ठीक नहीं था। इसी कारण वह ट्रेन की छत पर चढ़ गया था और उसी दौरान उसे करंट लगा था।

----------------------

आरपीएफ जवान ने रोका था

करीब 12:15 बजे इन तीनों युवकों को पटरियों पर ही आरपीएफ के एक हेडकांस्टेबल ने देख लिया था। इन युवकों को जवान ने पटरियों की तरफ आने से भी रोका था। वहीं करीब 12:35 पर मालगाड़ी के बड़े वाले डिब्बे की छत पर आदित और पीछे छोटे डिब्बे की छत पर शिवराज व आशीर्वाद चढ़े थे। इसी दौरान आदित को करंट लगा। घटना स्थल पर सबसे पहले यही आरपीएफ का जवान पहुंचा था। यह दोनों दोस्त ट्रेन की छत पर उठ रहा धुआं देखने दोबारा ट्रेन पर चढ़ने लगे तो आरपीएफ ने उसे रोका था। थाने में जब पुलिस उनसे पूछताछ करने लगी तो वह कुछ भी जवाब नहीं दे पाए। परिजनों ने भी उन्हें कुछ बोलने नहीं दिया।

Posted By: Jagran