उमेश भार्गव, अंबाला शहर

जब तुम किसी को कुर्सी देते हो तो वह आसानी से नहीं छोड़ता। तुम तो फिर भी देश की आजादी मांग रहे हो। ये आजादी यूं ही नहीं मिलती यह खून मांगती है। कुछ इसी अंदाज में हजारों लोगों को नेताजी ने तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा का नारा लगाते हुए आजादी के मायने और आजादी के लिए कुर्बानी के बारे में समझाया था। मेरा दादा स्वतंत्रता सैनानी और आजाद हिद फौज के सिपाही रहे स्वर्गीय केहर सिंह ने कुछ ऐसे ही हमें नेताजी सुभाषचंद्र बोस के किस्से सुनाए थे। नारायणगढ़ के लखनौरा गांव में रहने वाले अभिषेक ने अपने दादा केहर सिंह द्वारा सुनाए गए किस्सों के बारे में कुछ इसी तरह से बताया। स्वतंत्रता सैनानी 100 वर्षीय केहर सिंह का गत वर्ष 28 नवंबर को निधन हो गया था।

सैनिकों और आम लोगों में जल उठी थी स्वतंत्रता की लो

नेताजी ने जब तुम मुझे खून तो और मैं तुम्हें आजादी दिलवाउंगा का भाषण देते हुए आजादी खून मांगती है कि बात कही तो हजारों लोगों ने सिगापुर में उनकी हाथ खड़े कर साथ देने की बात कही और उनके इस भाषण और खुले विचारों के चलते हजारों नौजवान आजाद हिद फौज का हिस्सा बनने के लिए आतुर हो गए थे।

मौत की सूचना से कुछ समय पहले दिया था दो घंटे भाषण

अभिषेक बताते हैं कि उनके दादा केहर सिंह ने बताया था कि 23 मार्च 1945 नेताजी सिगापुर के विद्याधारी कैंप अस्पताल में नेताजी आजाद हिद फौज के सिपाहियों और आम नागरिकों को संबोधित कर रहे थे। उनके दादा के अनुसार यही नेताजी का आखिरी भाषण भी था। क्योंकि कुछ माह बाद ही उनकी मृत्यु की सूचना मिल गई थी। 23 मार्च को अस्पताल में करीब दो घंटे दिए भाषण में नेताजी ने कहा था कि मैं अब भारत वापस नहीं लौट सकता। क्योंकि भारत की ओर से यह लिखकर दे दिया गया है कि मेरे भारत पहुंचते ही मुझे फिरंगियों के हवाले कर दिया जाएगा। नेताजी ने कहा था कि सब लोग भारत के लिए मिलकर काम करें। आजादी तो मिलकर ही रहेगी। इसके बाद नेताजी वहां से चले गए थे।

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