कुलदीप चहल, अंबाला शहर: अंबाला में मिलावटखोरी का धंधा जड़ें जमा रहा है। दूध और दूध से बने उत्पादों में मिलावट पाई जा रही है। उस पर मात्र एक से पांच हजार रुपये जुर्माना भरकर मिलावटखोर छूट रहे हैं। बीते सत्रह माह के आंकड़ों पर नजर डालें तो 22 ऐसे कारोबारी सामने आए हैं, जिनके खाद्य पदार्थ मिलावटी पाए गए हैं। जुर्माना भरने के बाद एक बार फिर से यह अपने कामकाज में जुट गए हैं, जबकि लोगों की सेहत पर फिर से खतरा मंडरा रहा है।

खास बात है कि दाल से लेकर दूध के बने प्रोडक्ट सहित खाद्य तेल तक में मिलावट पाई जा रही है । जिस तरह से अब त्योहारी सीजन सिर पर है, उसे देखते हुए लोगों की सेहत पर जबरदस्त खतरा मंडरा रहा है। इन 22 मामलों में 57 हजार रुपये की जुर्माना राशि ही वसूली गई है। सबसे ज्यादा दूध में मिलावट

मिलावटखोरी का खेल दूध व इससे बने उत्पादों में चल रहा है। दूध से बनी मिठाइयों, पनीर, खोया में मिलावट पाई गई है। त्योहारी दिनों में सबसे ज्यादा डिमांड दूध व दूध से बने उत्पादों की होती है। इसी डिमांड को पूरा करने के लिए यह मिलावट की जाती है। मिलावटी खोया के कई मामले सामने आ चुके हैं, जबकि काफी खेप पूर्व में पकड़ी भी जा चुकी है। इसके बावजूद मिलावटखोरी से लोग बाज नहीं जा रहे हैं। यह है मिलावट का आंकड़ा

खाद्य पदार्थों में मिलावट भी लोगों की सेहत बिगाड़ रही है। इस गोरखधंधे को तोड़ने में भी प्रशासन व सरकार नाकाम साबित हो रही हैं। बीते सत्रह महीनों में खाद्य सुरक्षा विभाग ने 254 खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए हैं। इन की जांच में 25 सैंपल घटिया पाए गए हैं, जबकि बीस सैंपल ऐसे हैं, जिनकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है । यह है नियम

मिलावटखोरी रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा सैंपलिग की जाती है। पहली बार सैंपल फेल आने या फिर किसी ब्रांड के लेबल की पूरी जानकारी न देने आदि पर एडीसी कोर्ट द्वारा जुर्माना किया जाता है। यदि उसी दुकान का वही सैंपल दोबारा लेने पर यह फेल आता है तो तीन लाख रुपये तक का जुर्माना होता है। इसी तरह ब्रांड का लेबल न लगाने की सूरत में यह जुर्माना राशि पांच लाख रुपये तक लगाई जाती है।

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