जागरण संवाददाता, अंबाला शहर : ऑनलाइन प्रकिया को लेकर भले ही सरकार लाख दावे कर रही हो, लेकिन अभी भी बुजुर्ग सरकारी कार्यालयों में धक्के खा रहे हैं। कभी दस्तावेज अधूरे रह जाते हैं तो कभी अफसर नहीं मिलते। यदि कागजी कार्रवाई पूरी हो जाती है तो आदेशों की पालना नहीं हो पाती। यहां तक कि मामले में डीसी भी मकान खाली करवाने को लेकर आदेश कर चुके हैं बावजूद पीड़ित को अपने आशियाना का हक नहीं मिल पा रहा।

डीडब्ल्यूएस कालोनी के सुरेंद्र सिंह ने बताया कि कालोनी में उसका मकान है, लेकिन दलजीत सिंह उसका मकान खाली नहीं कर रहा। इसको लेकर लंबे समय से शिकायत कर रहा हूं। उन्होंने बताया कि 7 नवंबर 2017 को डीसी ने आदेश दिए थे कि 30 दिनों के अंदर मकान का कब्जा दिलवाया जाए, लेकिन मामले में डीसी के आदेशों की भी पालना नहीं हो पाई। मामले में कानून और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए 2 सितंबर 2020 को बतौर ड्यूटी मजिस्ट्रेट किया गया था। सुरेंद्र सिंह को कब्जा दिलवाकर रिपोर्ट भेजी जानी थी, लेकिन अभी तक शिकायतकर्ता को कब्जा नहीं मिल पाया है।

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-कई बार लगा चुका कार्यालय के चक्कर

सुरेंद्र सिंह ने बताया कि वह और पत्नी बूढ़े हो चुके हैं। उन्हें अपने घर से सरकारी कार्यालय तक पहुंचना भी आसान नहीं है। परंतु मकान के कारण धक्के खाने पड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि कोई ही ऐसा दिन है जब घर पर आराम करने का मौका मिलता है। इसके बाद सरकारी कार्यालयों में घंटों तक बैठकर इंतजार करना पड़ता है।

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