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अंबाला में सिया वाटिका की बैंक गारंटी जमा के बावजूद तोड़फोड़, हाई कोर्ट के स्टे से बढ़ सकती है अफसरों की मुश्किलें

Published: Wed, 16 Sep 2026 02:57 PM (IST)

अंबाला छावनी के सिया वाटिका की बैंक गारंटी जमा होने के बावजूद तोड़फोड़ का मामला अब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट पहुंच गया है।

अंबाला में सिया वाटिका की बैंक गारंटी जमा के बावजूद तोड़फोड़ (फाइल फोटो)

अंबाला में सिया वाटिका की बैंक गारंटी जमा के बावजूद तोड़फोड़ (फाइल फोटो)


HighLights

  1. बैंक गारंटी जमा होने के बावजूद सिया वाटिका में तोड़फोड़।

  2. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने तोड़फोड़ पर लगाई रोक।

  3. अधिकारियों को अब हाई कोर्ट में देना होगा जवाब।

दीपक बहल, अंबाला। अंबाला छावनी के सिया वाटिका की सीलिंग फिर डीसीलिंग और अब तोड़फोड़ की कार्रवाई की कड़ियां अब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में पहुंच गई हैं।

जिस निर्माण को लेकर नगर परिषद के ईओ ने सीलिंग की, अपील की सुनवाई में जिला नगर आयुक्त (डीएमसी) ने सील खोली और फिर संपदा अधिकारी यानी एसडीएम के आदेशों पर ढांचे को गिरा दिया गया। डीएमसी के आदेशों को आधार बनाकर शोभित अग्रवाल ने तोड़फोड़ की कार्रवाई को गलत ठहराया।

हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई तक तोड़फोड़ की कार्रवाई पर रोक लगा दी और नोटिस जारी कर राज्य सरकार से जवाब मांगा। सरकारी वकील ने पक्ष रखने के लिए समय मांगा है। अब 18 नवंबर को सुनवाई होगी। मामला पूरी तरह से पेचीदा हो चुका है क्योंकि याचिकाकर्ता ने डीएमसी के बैंक गारंटी जमा होने के बावजूद की गई तोड़फोड़ की कार्रवाई को आधार बनाया है।

शोभित अग्रवाल की ओर से अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि मामले में अपीलीय प्राधिकारी यानी डीएमसी ने बैंक गारंटी जमा करने की शर्त पर तोड़फोड़ की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।

याचिकाकर्ता ने निर्धारित शर्त के अनुसार बैंक गारंटी जमा कर दी थी। इसके बावजूद निर्माण को गिराने की कार्रवाई को गलत ठहराते याचिकाकर्ता हाई कोर्ट पहुंचे। यही सवाल प्रमुखता से रखा गया कि जब अपीलीय प्राधिकारी की शर्त पूरी कर दी गई थी तो उसके बाद भी तोड़फोड़ क्यों जारी रही।

ईओ ने लगाई सील, डीएमसी ने सुनवाई कर खोली

सिया वाटिका, भवन नंबर 126-बी, स्टाफ रोड के निर्माण को लेकर नप अंबाला सदर के ईओ ने पांच जून 2026 को हरियाणा म्यूनिसिपल एक्ट, 1973 की धारा 208-ए के तहत सीलिंग आदेश जारी किया था। कार्रवाई के खिलाफ अपील डीएमसी के समक्ष पहुंची। सुनवाई के दौरान डीएमसी की ओर से मामले में सशर्त राहत दी गई और बैंक गारंटी जमा कराने की शर्त रखी गई। याचिकाकर्ता का कहना है कि बैंक गारंटी जमा करने के बाद भी कार्रवाई आगे बढ़ी। मामले में संपदा अधिकारी की भूमिका सामने आई और उनके आदेश पर सिया वाटिका में लोहे के स्ट्रक्चर को गिराया गया।

अब हाई कोर्ट में करना होगा स्पष्ट

हाई कोर्ट में अब अफसरों को स्पष्ट करना होगा कि बैंक गारंटी जमा होने के बाद तोड़फोड़ की कार्रवाई को क्यों किया गया। इसमें सबसे बड़ा सवाल है कि डीएमसी ने सुनवाई के दौरान किए गए राहत वाले अपने आदेशों में अभी बदलाव नहीं किया। आज भी म्यूनिसिपल एक्ट के तहत की गई सुनवाई का आदेश लागू है, जिसे हाई कोर्ट में आधार बनाया गया।

डीएमसी ने ईओ को लिखित आदेश जारी कर पूछा था कि यह बात सामने आई है कि जिस क्षेत्र में संबंधित संपत्ति स्थित है, वह नप सदर के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

यदि यह स्थिति सही पाई जाती है तो निर्माण गतिविधि को नियंत्रित करने का मूल अधिकार ही नप के पास नहीं होगा। पांच जून का मूल सीलिंग आदेश ही अधिकार क्षेत्र के अभाव में सवालों के घेरे में आ जाएगा और उसी आदेश से पैदा हुई अपील की कार्यवाही भी प्रभावित होगी।

यदि क्षेत्र नगर परिषद की सीमा से बाहर पाया जाता है तो डीएमसी ने उचित अपील/रेफरेंस दाखिल करने की सलाह दी थी ताकि इस मामले में सुधारात्मक आदेश पारित किया जा सके। अभी ईओ की ओर से डीएमसी को जवाब नहीं गया, जिसके चलते डीएमसी के आदेश भी खड़े हैं।

एक्साइज एरिया का अपना कोई एक्ट नहीं

सिया वाटिका की कार्रवाई ने अंबाला कैंट के करीब 1066 एकड़ एक्साइज एरिया के पुराने अधिकार क्षेत्र के विवाद को भी फिर चर्चा में ला दिया है। 1977 के बाद इस क्षेत्र की जमीन कैंटोनमेंट बोर्ड से नगर पालिका और बाद में मौजूदा नगर परिषद के अधीन आई। दशकों से यहां भवन निर्माण, नक्शे और निर्माण संबंधी कार्रवाई नगर परिषद के स्तर पर होती रही है।

अब करीब 49 साल बाद यह सवाल उठ रहा है कि एक्साइज एरिया में नगर परिषद के पास निर्माण को लेकर कार्रवाई का अधिकार किस आधार पर है और संपदा अधिकारी की भूमिका कहां से शुरू होती है।

सिया वाटिका प्रकरण में हाई कोर्ट की अगली सुनवाई के साथ अब यह मामला केवल एक निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा। अदालत में सरकार का जवाब यह भी तय कर सकता है कि इस विवाद में प्रशासनिक कार्रवाई की वैधानिक कड़ी किस आधार पर आगे बढ़ती है।

हाई कोर्ट से मिला स्टे, एफआइआर रद की भी दायर की अर्जी: शोभित

याचिकाकर्ता शोभित अग्रवाल ने दैनिक जागरण से बातचीत में बताया कि पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने तोड़फोड़ की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है।

अंबाला छावनी सदर थाना पुलिस द्वारा दर्ज एफआइआर को लेकर भी हाई कोर्ट में अलग से याचिका दायर की है कि यह एफआइआर गलत है, जबकि इसे रद किया जाए। उनका कहना है कि पुलिस ने शामिल तफ्तीश के लिए उनको बुलाया था, जिस नोटिस में लिखा था कि उनको गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। बाद में इसे जमानत दे दी गई।

जानकारी में नहीं है: डीएमसी

हाई कोर्ट के स्टे को लेकर डीएमसी विरेंद्र सहरावत से दैनिक जागरण ने बात की। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट के स्टे की जानकारी उनके पास नहीं है।

स्टे की जानकारी मिली है: ईओ

नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी देवेंद्र नरवाल ने पुष्टि की है कि हाईकोर्ट का स्टे हो गया है।