जागरण संवाददाता, अंबाला शहर

रोडवेज की पांच यूनियनों का प्रस्तावित चक्का जाम धराशायी हो गया। चक्का जाम को लेकर यूनियनों द्वारा मंगलवार दोपहर से ही डिपो की घेराबंदी शुरू कर दी थी और शाम को करीब छह बजे कर्मचारी डिपो के गेट पर आ डटे थे। बुधवार तड़के तक कर्मचारी गेट पर डटे हुए थे। वहीं, एक दिन पूर्व ही 87 बसों को डिपो से निकाल कर पहले ही हड़ताल की कमर तोड़ चुके प्रशासन के लिए हड़ताल में यूनियनों के दो-फाड़ होने से राह और आसान हो गई थी। जीएम रोडवेज गगनदीप ¨सह व डीएसपी अजीत पाल ने

सुबह करीब साढ़े छह बजे कर्मचारियों को सरकार द्वारा लगाए एस्मा व सिविल कोर्ट द्वारा 300 मीटर परिधि में धरने-प्रदर्शन पर पाबंदी का हवाला देकर गेट से हटने को ताकीद किया। हालांकि, कर्मचारियों ने तेवर दिखाते हुए कहा कि वह बिल्कुल नहीं हटेंगे और नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद प्रदर्शनकारियों से लगभग दोगुनी संख्या में मौजूद पुलिस बल ने अगले ही पल कर्मचारियों को जबरन हटाना शुरू कर दिया। मामूली धक्का-मुक्की के बीच चंद मिनटों में ही रास्ता साफ था। कर्मचारियों को गेट से हटाते ही अंदर पहले से तैयार बैठे चालकों ने बसें बाहर निकालना शुरू कर दी। इस बीच पुलिस कर्मचारियों को पुलिस बस में भरकर बलदेव नगर थाना ले गई। गेट पर धरना दे रहे 43 कर्मचारियों पर पुलिस ने केस दर्ज किया है। जिन्हें बाद दोपहर कोर्ट में पेश किया गया। जहां से एक दिन के लिए जेल भेज दिया गया।

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विरोधी धड़ों ने ही निकाली हड़ताल की हवा

- सर्व कर्मचारी संघ व हरियाणा रोडवेज महासंघ से संबंधित कर्मचारी इस हड़ताल में सीधे तौर पर शामिल नहीं हुए थे। इन रोडवेज यूनियनों के मुताबिक जिन मुद्दों पर अब चक्का जाम किया जा रहा है वह 7 अगस्त को ही कर चुके हैं। जिसके बाद ही ट्रांसपोर्ट सेफ्टी बिल को टाला गया है। इसके अलावा सभी मांगें मानी जा चुकी हैं और 720 बसों को किलोमीटर आधार पर नहीं चलाए जाने पर ही गतिरोध बचा है। प्रशासन ने इस मौके को भूनाया व इन यूनियनों से तालमेल कर आल हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन, इंटक यूनियन, हरियाणा परिवहन कर्मचारी संघ संबंधित भारतीय मजदूर संघ, हरियाणा रोडवेज संयुक्त कर्मचारी संघ व रोडवेज मिनिस्ट्रियल स्टाफ यूनियन की हड़ताल की हवा निकाल दी।

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डिपो से 40 बसें निकलवाई

- रोडवेज जीएम गगनदीप ¨सह ने सुबह डिपो से करीब 40 बसों को रवाना कराया जो लगभग लोकल रूट पर रवाना होनी थीं। जीएम के मुताबिक वह हड़ताल के मद्देनजर ज्यादातर बसें पहले ही डिपो से निकलवा चुके थे। डिपो में जो करीब 45 बसें थी उन सभी के लिए चालक व परिचालक की वैकल्पिक व्यवस्था थी। जिसके चलते सुबह रूट पर भेजा जा सका।

Posted By: Jagran