कन्फर्म टिकट के लिए नहीं होगी मारामारी! रेलवे बढ़ाएगा ट्रेनों की लंबाई; 160 यात्रियों को मिलेगी अतिरिक्त जगह
रेलवे बोर्ड ने मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में स्थायी रूप से कोचों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिससे ...और पढ़ें

20 से 24 कोच तक दौड़ेंगी मेल-एक्सप्रेस ट्रेनें, बढ़ेंगी सीटें और घटेगी वेटिंग।
HighLights
रेलवे बोर्ड ने मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों में स्थायी कोच बढ़ाने का निर्णय लिया
20-कोच ट्रेनों में चार, 22-कोच ट्रेनों में दो अतिरिक्त कोच जुड़ेंगे
यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिलेंगे, वेटिंग लिस्ट में कमी आएगी
दीपक बहल, अंबाला। रेलवे बोर्ड ने मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में कोचों की संख्या स्थायी रूप से बढ़ाने का फैसला किया है। इसके तहत पात्र 20 कोच वाली ट्रेनों में चार और 22 कोच वाली ट्रेनों में दो अतिरिक्त कोच जोड़े जाएंगे। जरूरत और तकनीकी क्षमता के अनुसार ट्रेनों की संरचना अधिकतम 24 कोच तक की जा सकेगी। त्योहारों और छुट्टियों में ट्रेनों की लंबी वेटिंग लिस्ट और कन्फर्म टिकट के लिए मारामारी झेलने वाले यात्रियों को इससे राहत मिलने की उम्मीद है।
कोच बढ़ने से नियमित ट्रेनों में सीटों की उपलब्धता बढ़ेगी और यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना भी बढ़ेगी। रेलवे को उम्मीद है कि नियमित ट्रेनों में सीटें बढ़ने से वेटिंग लिस्ट घटेगी और टिकटों की कालाबाजारी व दलाली पर भी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
रेलवे बोर्ड के निर्देश के बाद जोनल रेलवे ने इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। रेलवे का फोकस नई ट्रेन चलाने के साथ-साथ मौजूदा ट्रेनों की यात्री क्षमता बढ़ाने पर है, ताकि अधिक से अधिक यात्रियों को नियमित ट्रेनों में ही यात्रा की सुविधा मिल सके।
त्योहारों में लंबी दूरी की ट्रेनों में सीटों की मांग कई गुना बढ़ जाती
अतिरिक्त कोच लगने से प्रत्येक फेरे में यात्रियों की क्षमता में बढ़ोतरी होगी। रेलवे के अनुसार, किसी ट्रेन में दो अतिरिक्त वातानुकूलित तृतीय श्रेणी (एसी-3) कोच लगाए जाने पर करीब 144 अतिरिक्त यात्रियों को जगह मिल सकती है। वहीं, दो अतिरिक्त स्लीपर कोच जुड़ने पर करीब 160 यात्रियों की क्षमता बढ़ सकती है।
दीपावली, छठ, होली, गर्मी की छुट्टियों और अन्य व्यस्त अवसरों पर लंबी दूरी की ट्रेनों में सीटों की मांग कई गुना बढ़ जाती है। स्थायी रूप से कोच बढ़ाने का फैसला इसी दबाव को कम करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
रेलवे पहले से ही मांग के अनुसार विशेष ट्रेनें संचालित करता रहा है। वर्ष 2024-25 में करीब 85,400 विशेष ट्रेन फेरे संचालित किए गए थे। नियमित ट्रेनों में भी जरूरत के अनुसार अस्थायी और स्थायी तौर पर अतिरिक्त कोच लगाए जाते रहे हैं।
जिन स्टेशनों पर प्लेटफार्म छोटे, वहां विस्तार की जरूरत पड़ेगी
ट्रेनों की लंबाई बढ़ने के साथ स्टेशनों के बुनियादी ढांचे को भी उसके अनुरूप तैयार करना होगा। 24 कोच की ट्रेन के लिए पर्याप्त लंबाई वाले प्लेटफार्म, लूप लाइन और अन्य परिचालन सुविधाएं जरूरी होंगी। जिन स्टेशनों पर प्लेटफार्म छोटे हैं, वहां विस्तार की जरूरत पड़ेगी। रेलवे के तकनीकी दस्तावेजों में भी मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों की रेक लंबाई 22-24 कोच तक पहुंचने का उल्लेख है।
रेलवे की मौजूदा नीति में सामान्य और गैर-वातानुकूलित स्लीपर श्रेणी के यात्रियों के लिए अधिक क्षमता उपलब्ध कराने पर जोर है। 22 कोच वाली मेल-एक्सप्रेस ट्रेन की मानक संरचना में 12 सामान्य व स्लीपर श्रेणी के गैर-वातानुकूलित कोच और आठ वातानुकूलित कोच का प्रविधान है।
