अंबाला, [दीपक बहल]। अमृतसर रेल हादसे में जांच से इन्कार कर रेलवे ने अपनी चूक पर परदा डाल दिया। एशिया के सबसे बड़े और दुनिया के दूसरे सबसे बड़े रेल नेटवर्क के ट्रैक पर लोगों को ट्रेन ने रौंद दिया। इसमें 62 लोगों की मौत हो गई और 143 से अधिक लोग घायल हो गए। अधिकारी चाहे कोई भी तर्क दें, यह भीषण दुर्घटना भारतीय रेल की छवि और कार्यप्रणाली पर संदेह खड़ा कर रही है।

आइबी ही नहीं बल्कि रेलवे की स्पेशल इंटेलिजेंस ब्रांच की रहती है हर गतिविधि पर पैनी नजर

रेलवे इंटेलिजेंस सवालों के घेरे में है क्योंकि इंटेलिजेंस ब्यूरो (आइबी) ही नहीं बल्कि रेलवे की स्पेशल इंटेलिजेंस ब्रांच (एसआइबी) चप्पे-चप्पे पर नजर रखती है, लेकिन इस घटना को रोक पाने में रेलवे का निगरानी व सुरक्षा तंत्र पूरी तरह नाकाम साबित हुआ। रेलवे इंटेलिजेंस के जिम्मे सुरक्षा की अति महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। यहां तक कि यदि पटरी पर कहीं भीड़ जमा होने की आशंका हो या किसी कारण ट्रैक के बाधित होने की स्थिति उत्पन्न हो रही तो ऐसी हर सूचना जुटाने का काम इंटेलिजेंस का ही है।

रेलवे एक्ट का पालन नहीं करवा सका आरपीएफ

रेल ट्रैक की सुरक्षा में तैनात गैंगमैन भी सतत पेट्रोलिंग करते हैं, ताकि किसी दुर्घटना को रोका जा सके। इसके बावजूद अमृतसर के जोड़ा फाटक के पास धोबीघाट मैदान में जुटी बड़ी भीड़ की सूचना नहीं जुटाई जा सकी।

पहली और बड़ी चूक

जागरण की पड़ताल में रेलवे सूत्रों ने इस गंभीर चूक की ओर ध्यान दिलाया। सूत्रों के अनुसार, आइबी और एसआइबी में आपसी तालमेल के बाद ही डेली क्राइम रिपोर्ट (डीसीआर) दिल्ली स्थित रेलवे मुख्यालय को भेजी जाती है। इस रिपोर्ट का इनपुट महाप्रबंधक के संज्ञान में भी होता है और तुरंत रेलवे की संबंधित ब्रांच को दिशा निर्देश जारी किए जाते हैं। तत्काल ही रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) को सूचना दे दी जाती है। सूत्रों के मुताबिक, अमृतसर हादसे में सबसे बड़ा पहलू यह है कि एसआइबी ने इनपुट दिया या नहीं? यदि इनपुट नहीं दिया गया तो रेलवे ने इस लापरवारी पर अब तक क्या कार्रवाई की?

दूसरी चूक

इंटेलिजेंस को छोड़ भी दें तो अमृतसर हादसा कहीं दूर जंगल में नहीं बल्कि शहर के भीतर रेलवे फाटक के पास ही हुआ। गेटमैन मौके पर था, जो यह देख रहा था कि ट्रैक के निकट भीड़ जमा हो रही है। बावजूद इसके, उसने यह सूचना आगे नहीं बढ़ाई। जबकि उसके द्वारा तुरंत ही ऑपरेटिंग विभाग को यह सूचना दी जा सकती थी।

तीसरी चूक

पटरी पर खड़े लोगों को हटाने की जिम्मेदारी रेलवे की है। न हटने पर रेलवे एक्ट की धारा 147 में मुकदमा दर्ज करने का प्रावधान है। यह कार्रवाई आरपीएफ ही नहीं बल्कि कामर्शियल विभाग भी कर सकता है। इस तरह रेलवे की कार्यप्रणाली में उक्त चूक हादसे का सबब बनती दिखाई दे रही हैं। लेकिन रेलवे ने जांच से साफ इन्कार कर इन पर परदा डाल दिया है।

आइबी-एसआइबी ने नहीं दी सूचना : आरपीएफ

डीजी रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के महानिदेशक अरुण कुमार ने जागरण के सवाल पर कहा कि एसआइबी और आइबी की ओर से इस संबंध में (अमृतसर में रेलवे ट्रैक के निकट बड़ी भीड़ जुटने) कोई भी इनपुट आरपीएफ को नहीं मिला था। इनपुट न आने पर कोई जवाबदेही तय नहीं की गई।

रेलवे के पास कोई जानकारी नहीं थी : सीपीआरओ

उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क व सूचना अधिकारी (सीपीआरओ) दीपक कुमार ने दैनिक जागरण के सवाल पर कहा कि अमृतसर में रेलवे ट्रैक के निकट बड़ी भीड़ जुटने को लेकर रेलवे के पास कोई जानकारी नहीं थी। एसआइबी से कोई इनपुट नहीं आया। पटरी के आपसपास इतनी बड़ी संख्या में लोगों के होने की एसआइबी के पास जानकारी क्यों नहीं? इस सवाल पर सीपीआरओ ने चुप्पी साध ली।

रेलवे ने क्यों नहीं बरती सावधानी

देश के सबसे बड़े रावण दहन समारोह का आयोजन सन 2017 तक अंबाला जिले के बराड़ा में होता रहा है। इसमें हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं। इसके अलावा अंबाला-सहारनपुर रेलवे सेक्शन में मारकंडा पुल के पास भी बड़ा आयोजन होता है, यहां भी लोगों की संख्या हजारों में होती है। इन दोनों बड़े आयोजनों को देखते हुए रेलवे यहां पूरी सावधानी बरतता आया है। ट्रेनों की गति धीमी कर ही निकालता जाता है। सूत्रों का कहना है कि अंबाला से भेजे गए इनपुट के बाद ही ट्रेनों की गति धीमी की जाती थी। यदि अंबाला में ट्रेनों की गति कम हो सकती है तो अमृतसर में क्यों नहीं?

 

Posted By: Sunil Kumar Jha

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