अंबाला [दीपक बहल]। सर्विस टैक्स चोरी के मामले में रेल अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। लाखों रुपयों के सर्विस टैक्स चोरी का मामला उजागर होने के बाद सेंट्रल गुड्स एंड सर्विस टैक्स डिपार्टमेंट ने रेलवे अधिकारियों से पत्राचार कर पिछले पांच साल के टेंडरों का रिकॉर्ड मांगा है। रेलवे ने माना है कि कांट्रैक्टरों से सर्विस टैक्स वसूला ही नहीं गया। जांच के बाद दोषी अधिकारियों से इसकी रिकवरी हो सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, रेलवे ने अंबाला, अंबाला छावनी, राजपुरा और पटियाला स्टेशन परिसर में साइकिल स्टैंड के टैंडर अलॉट किए थे। इनमें कांट्रैक्टर से लाखों रुपया आज भी सर्विस टैक्स बकाया है। सर्विस टैक्स डिपार्टमेंट ने जब रिकॉर्ड खंगाला तो पता चला कि सन 2013 में अलॉट किए गए टेंडरों में ठेकेदार से सर्विस टैक्स नहीं वसूला जा रहा, जबकि कांट्रैक्टर से 14 फीसद सर्विस टैक्स वसूलकर रेलवे को जमा कराना होता है। जांच के बाद पता चलेगा कि यह लापरवाही है या अधिकारियों की मिलीभगत।

आठ टेंडरों में 22 लाख से अधिक की सरकार को चपत

सेंट्रल गुड्स एंड सर्विस टैक्स डिपार्टमेंट की जांच में अब तक 8 टेंडरों में 22 लाख से अधिक की चपत केंद्र सरकार को लग चुकी है। रेलवे इसे वसूलने में नाकाम रहा है। धुरी का रेलवे स्टेशन पर साइकिल स्टैंड का टेंडर 1 जून, 2012 से 31 अगस्त, 2015 तक 12 लाख 31 हजार 400 में हुआ था जिसका सर्विस टैक्स एक लाख 694 रुपये आज भी बकाया है। इसी प्रकार मलेरकोटला का टेंडर एक जून, 2015 को एक लाख 82 हजार 333 में हुआ था जिसका सर्विस टैक्स 16 लाख 276, अंबाला शहर का टेंडर एक अगस्त, 2013 से 31 जुलाई, 2016 तक 25 लाख 60 हजार में हुआ जिसका सर्विस टैक्स 3 लाख 36 हजार 489 रुपये बनता था।

खन्ना में 13 अक्टूबर, 2010 को 12 लाख के टेंडर का 1 लाख 59 हजार 830 रुपये, अंबाला छावनी प्रीमियम पार्किंग का टेंडर 12 नवंबर, 13 से 11 नवंबर, 2016 तक 8 लाख 40 हजार में जिसका सर्विस टैक्स 9 लाख 17 हजार 486 रुपये, राजपुरा में एक मार्च, 2014 को 46 लाख के टेंडर में 6 लाख 28 हजार 242 रुपये टैक्स, पटियाला कार पार्किंग 5 फरवरी, 2015 से 3 लाख 90 हजार 153 रुपये में, टैक्स बकाया 51 हजार 474 रुपये, अंबाला छावनी का एक अन्य टेंडर एक जून, 2016 को 8 लाख 8 हजार 890 रुपये जिसका टैक्स 72 हजार 333 रुपये टैक्स बकाया है। पटियाला व अंबाला छावनी स्टेशन का टेंडर रेलवे की ओर से सन 2017 में ही टर्मिनेट कर दिया गया। सीनियर डीसीएम ने गत 11 दिसंबर को अपना पक्ष संबंधित विभाग को रखा, लेकिन वह उससे संतुष्ट नहीं हैं।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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