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रेलवे में नौकरी पाने वालों के लिए अलर्ट! EWS प्रमाणपत्रों की होगी सख्ती से जांच; फर्जी मिले तो होगा एक्शन

By Deepak BehalEdited By: Prince Sharma
Published: Sat, 26 Sep 2026 08:28 AM (IST)

रेलवे बोर्ड ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के आरक्षण का लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों और कर्मचारियों के प्रमाणपत्रों की जांच सख्त करने के निर्देश दिए हैं।

फोटो एआई द्वारा जनरेट की गई है।

फोटो एआई द्वारा जनरेट की गई है।

HighLights

  1. रेलवे में EWS प्रमाणपत्रों की जांच अब और सख्त होगी।

  2. फर्जी प्रमाणपत्र पाए जाने पर कानूनी और विभागीय कार्रवाई होगी।

  3. पात्र व्यक्तियों को ही आरक्षण का लाभ सुनिश्चित किया जाएगा।

दीपक बहल, अंबाला। रेलवे में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के आरक्षण का लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों और कर्मचारियों के प्रमाणपत्रों की जांच अब और सख्ती से होगी।

रेलवे बोर्ड ने सभी क्षेत्रीय रेलवे, उत्पादन इकाइयों, सार्वजनिक उपक्रमों और स्वायत्त निकायों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के आरक्षण से जुड़े नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि नियुक्ति के समय ही संबंधित प्रमाणपत्रों की समय पर और सही तरीके से जांच की जाए, ताकि अपात्र व्यक्ति आरक्षण का लाभ न ले सके।

इन दिशा-निर्देशों के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षण का लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की प्रामाणिकता की जांच महत्वपूर्ण है।

बोर्ड ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रमाणपत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया में किसी तरह की लापरवाही न बरती जाए। रेलवे बोर्ड के निर्देश के मुताबिक अभ्यर्थी द्वारा प्रस्तुत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के प्रमाणपत्र की जांच नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान ही की जानी चाहिए।

प्रमाणपत्र किस सक्षम अधिकारी द्वारा जारी किया गया है, उसकी वैधता और उसमें दर्ज दावे नियमों के अनुरूप हैं या नहीं, इसकी पुष्टि समय पर करने को कहा है। रेलवे में बड़ी संख्या में पदों पर नियुक्तियां होती हैं। आरक्षण का लाभ वास्तविक पात्र लोगों तक पहुंचे, इसके लिए प्रमाणपत्रों की जांच को महत्वपूर्ण माना गया है।

फर्जी दावा मिला तो होगी कानूनी कार्रवाई

रेलवे बोर्ड ने साफ किया है कि यदि जांच के दौरान किसी कर्मचारी या अभ्यर्थी का आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का दावा झूठा या फर्जी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

विभागीय कार्रवाई के साथ कानूनी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है। बोर्ड ने संबंधित अधिकारियों को प्रमाणपत्रों की जांच के दौरान विशेष सावधानी बरतने को कहा है। बोर्ड ने सात फरवरी 2019 को जारी आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के आरक्षण से संबंधित नियम पहले ही जारी किए जा चुके हैं।

22 सितंबर को जारी हुआ पत्र रेलवे

बोर्ड के उप निदेशक (स्थापना/अनुसूचित जाति एवं जनजाति) बृजेश कुमार ने गत 22 सितंबर को यह पत्र जारी किया था। पत्र सभी संबंधित प्रमुख अधिकारियों और संस्थानों को भेजा है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के आरक्षण से संबंधित पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों की पुनरावृत्ति करते हुए उनकी सख्ती से पालना सुनिश्चित करने को कहा गया है।

रेलवे बोर्ड के इस कदम से नियुक्ति प्रक्रिया में प्रमाणपत्रों की जांच को लेकर जिम्मेदारी और स्पष्ट होगी। साथ ही फर्जी दावे सामने आने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता भी साफ रहेगा।