रेलवे यात्रियों के लिए बड़ा अपडेट, PNR से बार-बार एक ही कैटेगरी में नहीं दर्ज होगी शिकायत; CRIM करेगा बदलाव
रेलवे ने रेलमदद ऐप पर दर्ज शिकायतों को सही विभाग तक पहुंचाने के लिए तकनीकी बदलावों का निर्देश दिया है।

रेलवे यात्रियों के लिए बड़ा अपडेट (फाइल फोटो)
HighLights
रेलवे रेलमदद शिकायतों को सही विभाग तक पहुंचाएगा
गलत श्रेणी में शिकायतें भेजने पर अब रोक लगेगी
सीआरआईएस तकनीकी बदलाव कर शिकायत प्रणाली सुधारेगा
दीपक बहल, अंबाला। ट्रेन में पानी नहीं मिला, चादर-कंबल नहीं पहुंचा या सफाई व्यवस्था खराब मिली और यात्री ने रेलमदद एप पर शिकायत दर्ज कर दी।
इसके बाद यदि शिकायत गलत विभाग या मंडल के खाते में चली गई तो उसका खामियाजा भी यात्री को ही भुगतना पड़ता है।
अब रेलवे ऐसी व्यवस्था को बदलने जा रहा है। रेलमदद पर दर्ज शिकायत जिसकी गलती, उसी के खाते में पहुंचेगी और उसके निस्तारण की जिम्मेदारी भी संबंधित विभाग और मंडल की तय होगी।
सीआरआइएम को होगा तकनीकी बदलाव
रेलमदद की शिकायत व्यवस्था की समीक्षा के बाद रेलवे बोर्ड ने सेंटर फार रेलवे इंफार्मेशन सिस्टम (सीआरआइएस) को कई अहम तकनीकी बदलाव करने के निर्देश दिए हैं।
इसका मकसद शिकायत को सही श्रेणी में दर्ज कराने से लेकर उसे वास्तविक जिम्मेदार विभाग तक पहुंचाना और समय पर निस्तारण सुनिश्चित करना है।
पानी, सफाई, लिनेन और वंदे भारत में बचे खाने जैसी शिकायतों के मामले में भी अब जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।
जोनल रेलवे की मदद से होगा समस्या का समाधान
रेलमदद पर यात्री ने अगर ‘वाटर अवेलेबिलिटी’ की शिकायत की है तो डिविजनल कंट्रोल कार्यालय उसे बिना उचित कारण ‘कोच मेंटेनेंस’ की श्रेणी में नहीं बदल सकेगा।
रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि शिकायत की मूल श्रेणी से छेड़छाड़ न हो।
इससे शिकायत सही विभाग तक पहुंचने में होने वाली देरी कम होगी। बिना आन-बोर्ड हाउसकीपिंग स्टाफ (ओबीएचएस) वाली ट्रेनों में भी शिकायतों के निस्तारण को लेकर नई व्यवस्था बनेगी।
अभी कई बार जिस मंडल में यात्री की समस्या का समाधान होता है, शिकायत उसी मंडल को ट्रांसफर कर दी जाती है, भले ही गलती किसी दूसरे मंडल की हो।
सीआरआइएम तैयार कर रहा स्ट्रक्चर
सीआरआइएस ऐसा ढांचा तैयार करेगा जिससे शिकायत वास्तविक रूप से जिम्मेदार मंडल को ही मिले। एक ही पीएनआर या मोबाइल डिवाइस से थोड़े समय में एक जैसी कई शिकायतें दर्ज कराने की समस्या पर भी रेलवे ने संज्ञान लिया है।
वहीं वंदे भारत ट्रेनों के सीटिंग एरिया में यात्रियों के खाने के बाद बचा भोजन पड़े रहने की शिकायतें भी रेलवे के लिए चुनौती बनी हुई हैं। कई बार ऐसी शिकायतें आइआरसीटीसी के बजाय जोनल रेलवे के खिलाफ दर्ज हो जाती हैं, जबकि कार्रवाई आइआरसीटीसी स्तर पर होनी चाहिए।
