मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

सुनील बराड़, अंबाला : अंबाला की बेटी सुषमा स्वराज को हाउसिग बोर्ड की जनता कभी भूल नहीं सकती। जब वह प्रदेश सरकार में 25 साल की उम्र में कैबिनेट मंत्री बनी तो आम जनता ने आशियाने की मांग उन्होंने पूरी की थी। हाउसिग बोर्ड ने अपने बजट से एक हजार मकान तैयार किए थे जो बहुत ही सस्ते दामों पर कैबिनेट मंत्री होने की बदौलत आम जनता को अलॉट कर दिए गए। इसीलिए यहां की जनता उनके निधन से स्तब्ध है। उनके निधन के बाद से हाउसिग बोर्ड के हर घर में शोक है। कॉलोनी और चौक-चौराहों पर बस उनकी ही चर्चा चल रही है। आज जिन लोगों को भी हाउसिग बोर्ड किस्सा सुनाया जा रहा है जिन्हें नहीं पता था।

कॉलोनी के लोगों की मानें तो जहां पर वह बसें हुए हैं यहां और आसपास पानी की डिग्गियां हुआ करती थी। यहां की आम जनता के पास जब रहने के लिए छत नहीं थी तो उन्होंने कैबिनेट मंत्री होते सुषमा स्वराज के सामने अपना दुखड़ा रोया था। सुषमा ने लोगों से कुछ समय मांगा और उसके बाद हाउसिग बोर्ड के एक्सइएन को यहां पर ड्यूटी लगा दी। एक्सईएन ने आम जनता की मांग और उनके बजट को देखते हुए यहां पर सबसे छोटा 40 गज और सबसे बड़ा 200 गज में आशियाने तैयार किए थे। इन मकानों को बनाने में जो खर्च आया वह भी जनता से नहीं लिया गया था। जानकारों की मानें तो 40 गज का प्लाट 10 हजार और 80 गज का 20 हजार रुपये में अलॉट किया गया था।

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पार्क का किया था उद्घाटन

हाउसिग बोर्ड कॉलोनी बसाने के बाद जब सुषमा स्वराज हरियाणा सरकार में खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री बनी तो 9 मई 1987 को पार्क का उद्घाटन कर उसे भी जनता को समर्पित किया। अब उसकी देखरेख का जिम्मा नगर निगम सदर जोन की ओर से किया जा रहा है जिसमें हाउसिग बोर्ड, सुभाष नगर की जनता सैर करती है। इसके अलावा बच्चे भी खेलते कूदते हैं।

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दरियादिल से मिली थी जगह

सुभाष कॉलोनी निवासी अवतार सिंह ने बताया कि उनके छोटे-छोटे से क्वार्टर थे जिनमें रहना मुश्किल हो रहा था। इसीलिए लोगों ने अपना दुखड़ा सुषमा के सामने रोया था तो उन्होंने लोगों को 33 फीट की जगह देने के आदेश दिए थे। लेकिन दुख इस बात है कि जो दरियादिली उन्होंने आम जनता पर दिखाई थी उस पर अधिकारियों की लापरवाही भारी पड़ गई। आज यह जमीन उनसे छीनने के लिए अतिक्रमण बता कर तोड़ दिया गया।

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सिचाई विभाग से रिटायर्ड एक्सईएन केएल चोपड़ा ने कहा कि हाउसिग बोर्ड में उसका मकान है जो उनका बसाया हुआ है। सस्ते रेट पर मकान मिले थे। वह अच्छा बोलती थीं, इसीलिए हाउसिग बोर्ड में जब भी जलसा होता था तो उसे सुनने के लिए जनता काफी इकट्ठी होती थी। जनता ने उन्हें हमेशा मान-सम्मान दिया है।

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हाउसिग बोर्ड निवासी सुरेंद्र राणा ने बताया कि हाउसिग बोर्ड के साथ-साथ नागरिक अस्पताल की पुरानी बिल्डिग में ब्लड बैंक की बिल्डिग भी उन्होंने अपने ग्रांट से 1995 के आसपास बनवाई थी जिसके चलते यहां पर ब्लड मिलना शुरू हुआ। आज एक हजार मकानों का हाउसिग बोर्ड उनकी बदौलत रसा-बसा है। इसीलिए वह उनको हमेशा याद रखेंगे।

Posted By: Jagran

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