मनीष श्रीवास्तव, अंबाला शहर

शहर के नागरिक अस्पताल में मरीज दर्द से कराह रहे हैं, लेकिन पिछले तीन सालों से पांच डाक्टर लापता हैं। भले ही यह डाक्टर प्राइवेट क्लीनिक या अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे हों, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में इनका कोई अता पता नहीं है। अब इन डॉक्टरों को बर्खास्त करने की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। बर्खास्तगी की औपचारिकता लंबी होने के कारण इसमें देरी हो रही है। उच्चाधिकारियों ने एक अन्य लापता डॉक्टर से जब पत्राचार किया, तो उसने इस्तीफा दे दिया। शेष मेडिकल आफिसर्स ने न तो कार्यभार ग्रहण किया और न ही विभाग को संतोषजनक जवाब दिया।

आम नागरिकों को सुगम और बेहतर स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने के लिए सरकार संजीदा है। इसे देखते हुए सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में मेडिकल आफिसर से लेकर अन्य स्टाफ की तैनाती कर रही है। बावजूद इसके अकेले अंबाला शहर के नागरिक अस्पताल में मेडिकल आफिसर के एक दर्जन पद वर्षों से खाली चल रहे हैं। शहर के ट्रॉमा सेंटर की स्वास्थ्य व्यवस्था महज दो चिकित्सकों के भरोसे है, जबकि यहां 14 डॉक्टर की तैनाती होनी चाहिए। ऐसे में 12 मेडिकल आफिसर की कमी का दंश अकेले ट्रॉमा सेंटर झेल रहा है।

मेडिकल आफिसर की कमी से चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए पीएमओ डा. पूनम जैन ने स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत कराते हुए सृजित पदों के सापेक्ष तैनाती करने संबंधी डिमांड पत्र भेजा है। पीएमओ के डिमांड पत्र पर हायर अथॉरिटी संजीदा बताया जा रहा है।

वहीं अगर विभागीय आंकड़ों पर गौर किया जाए तो मेडिकल आफिसर के अलावा अकेले स्टाफ नर्स के 54 पद रिक्त हैं। विभागीय कार्य का लेखाजोखा रखने के लिए सृजित छह में से महज दो के भरोसे व्यवस्था चल रही है। इसी तरह नागरिक अस्पताल में बीमारी का इलाज कराने के लिए आने वाले मरीजों को बेहतर चिकित्सा सेवा और देखभाल के लिए 54 स्टाफ नर्स की कमी बनी है। ऐसे में सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों के बेहतर स्वास्थ्य सेवा का दावा खोखला साबित हो रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों को बिना बताए गैर हाजिर चल रहे छह मेडिकल आफिसर के बारे में महकमे के हायर अथॉरिटी को अवगत कराया गया। उच्चाधिकारी अब इन मेडिकल आफिसर्स के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं।

- डा. पूनम जैन, पीएमओ अंबाला शहर

Posted By: Jagran

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