रेलवे कर्मचारियों की पेंशन व्यवस्था में बड़ा बदलाव, 25 साल की सेवा पर मिलेगा मूल वेतन की 50 प्रतिशत राशि
रेलवे कर्मचारियों की पेंशन व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिसमें एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) 2026 लागू की गई ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
एकीकृत पेंशन योजना 2026 रेलवे कर्मचारियों के लिए लागू।
25 साल की सेवा पर 50% मूल वेतन पेंशन।
एनपीएस निवेश विकल्पों में भी महत्वपूर्ण सुधार किए गए।
जागरण संवाददाता, अंबाला। रेलवे कर्मचारियों की पेंशन व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए हैं। सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली पेंशन, पारिवारिक पेंशन और एकमुश्त भुगतान के साथ पेंशन निधि में निवेश के विकल्प में बदलाव किया गया है। रेलवे में एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) नियम, 2026 लागू कर दिए गए हैं।
इसके तहत 25 साल की नियमित सेवा पूरी करने वाले कर्मी को सेवानिवृत्ति से पहले के 12 माह के औसत मूल वेतन का 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में मिलेगा। इसके साथ ही राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के तहत निवेश के विकल्प बढ़ाने के लिए पेंशन निधि विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) के निर्देश भी लागू किए गए हैं।
रेल मंत्रालय द्वारा 29 सितंबर को जारी पत्र संख्या आरबीई नंबर 76/2026 के अनुसार, एकीकृत पेंशन योजना मुख्य रूप से एक जनवरी 2004 के बाद नियुक्त कर्मचारियों के लिए है। इसके अनुसार, 10 से 25 साल की सेवा वाले कर्मचारियों को सेवा अवधि के अनुपात में पेंशन मिलेगी।
न्यूनतम 10 साल की अर्हकारी सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों के लिए 10 हजार रुपये मासिक पेंशन का प्रविधान किया गया है। कर्मचारी अपने मूल वेतन और महंगाई भत्ते का 10 प्रतिशत योगदान करेगा, जबकि रेलवे भी 10 प्रतिशत का समान योगदान करेगा। एकीकृत पेंशन योजना के तहत पेंशनभोगी की मृत्यु के बाद परिवार को उसकी सुनिश्चित पेंशन का 60 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन के रूप में मिलेगा।
सेवानिवृत्ति के समय एकमुश्त भुगतान का भी प्रविधान है। प्रत्येक छह माह की सेवा के लिए अंतिम मूल वेतन और महंगाई भत्ते के योग का दसवां हिस्सा एकमुश्त राशि के रूप में दिया जाएगा। योजना का विकल्प चुनने वाले कर्मचारी को पूरी सेवा अवधि में एक बार एनपीएस में वापस जाने का अवसर भी मिलेगा।
नई व्यवस्था में एनपीएस के अंशदाताओं को अपने निवेश का विकल्प चुनने की सुविधा मिलेगी। स्वचालित विकल्प में अलग-अलग परिसंपत्तियों में निवेश का अनुपात निर्धारित होगा, जबकि सक्रिय विकल्प में अंशदाता अपने योगदान का आवंटन कर सकेगा।
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