जागरण संवाददाता, अंबाला : छावनी के बाजारों से अस्थायी अतिक्रमण को लेकर नगर निगम द्वारा जब्त किया गया सामान जमीन खा गई या आसमान। नगर निगम ने अभियान छेड़कर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर काफी सामान जब्त किया था, लेकिन निगम के पास इसका कोई लेखा-जोखा नहीं है। यहां तक कि जिन दुकानदारों का सामान जब्त किया गया, उन्हें कोई रसीद भी नहीं दी गई। ऐसे में वह किस के पास दुखड़ा रोये कि उनका सामान निगम कर्मी कार्यालय ले गए या फिर घर। इस बात का पर्दाफाश सूचना अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में हुआ।

नगर निगम आरटीआइ के तहत मांगी गई 8 बिदुओं की सूचना देने में आनाकानी कर रहा था। ओंकार सिंह ने अपील की, जिसके बाद निगम ने सूचना दी। नगर निगम ने अपनी सूचना में बताया कि जो सामान जब्त किया जाता है, उसका कोई लेखा-जोखा उनके कार्यालय में नहीं है। ऐसे हालात में निगम द्वारा पूर्व में की गई कार्रवाई का सामान कहां गया, यह भी जांच का विषय है। इतना ही नहीं, जो सामान जब्त किया, उसे नीलाम करने की बात से भी निगम इनकार कर रहा है।

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यह दिए जवाब

सवाल : सामान किस प्रावधान के तहत जब्त किया जाता है

जवाब : नगर निगम अंबाला द्वारा दुकानों के बाहर अवैध रूप से रखा सामान हरियाणा सरकार के नगर निगम अधिनियम धारा 238(1) व 23 (2) के तहत अतिक्रमण उठाने की कार्रवाई की जाती है सवाल : सामान कहां रखा जाता है

जवाब : अवैध रूप से रखे हुए सामान को नगर निगम द्वारा उठाने के उपरांत कार्यालय द्वारा उपलब्ध करवाई गई खाली जगह में रखा जाता है। सवाल : सामान उठाने या जब्त करने के दौरान क्या मालिक को कोई रसीद दी जाती है या नहीं।

जवाब : मौके पर से कार्यवाही के दौरान अतिक्रमण कर रखे हुए सामान को उठाने के लिए नगर निगम अंबाला द्वारा कोई रसीद नहीं दी जाती है सवाल : जो सामान जब्त किया जाता है, उसका क्या नगर निगम कोई रिकार्ड रखता है या नहीं।

जवाब : कोई रिकार्ड नहीं रखा जाता है, क्योंकि अतिक्रमण किए हुए सामान को अतिक्रमणकारी एक से दो दिन में आकर जुर्माना राशि अदा कर वापस ले जाते हैं। सवाल : जो सामान मालिक नहीं छुड़वाते, इसका निगम क्या करता है। यदि उक्त सामान की नीलामी की जाती है तो इसका पूरा ब्योरा दें।

जवाब : नगर निगम द्वारा कार्रवाई के दौरान उठाए गए सामान की अभी तक कोई बोली नहीं लगाई गई है।

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फोटो नंबर :: 21

यह घोटाला है जांच होनी चाहिए

आरटीआइ के तहत जानकारी मांगने वाले ओंकार सिंह ने बताया कि यह एक बड़ा घोटाला है, जिसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि 4 फरवरी 2019 को नगर निगम से जानकारी मांगी थी, जिसके बाद निगम कार्रवाई करने के मामले में बैकफुट पर आ गई थी। निगम अफसरों को पता है कि यह सब गोलमाल हो रहा था। कर्मचारी सामान को जब्त कर खुर्द-बुर्द कर देते थे। यही कारण है कि उनके पास कोई रिकार्ड नहीं है।

Posted By: Jagran