₹60.16 करोड़ से ब्राह्मण माजरा में बनेगा आधुनिक डेयरी कॉम्प्लेक्स, आबादी से बाहर होंगी अंबाला की डेयरियां
अंबाला छावनी के ब्राह्मण माजरा में ₹60.16 करोड़ की लागत से आधुनिक इंटीग्रेटेड डेयरी कॉम्प्लेक्स बनेगा, जिससे शहर की डेयरियां आबादी से बाहर शिफ्ट हो सकेंगी।

₹60.16 करोड़ से ब्राह्मण माजरा में बनेगा आधुनिक डेयरी कॉम्प्लेक्स (फाइव फोचो)
HighLights
₹60.16 करोड़ से ब्राह्मण माजरा में आधुनिक डेयरी कॉम्प्लेक्स बनेगा।
पशुपालकों को 200 प्लॉट, मुफ्त उपचार, चारा भंडारण मिलेगा।
बायोगैस प्लांट और टांगरी नदी पर नया पुल भी बनेगा।
जागरण संवाददाता, अंबाला। अंबाला छावनी में जगह-जगह फैली डेयरियों को एक स्थान पर शिफ्ट करने की योजना अब आगे बढ़ेगी। गांव ब्राह्मण माजरा में आधुनिक इंटीग्रेटेड डेयरी कॉम्प्लेक्स बनाने के लिए राज्य सरकार ने 60.16 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है।
शहरी आधारभूत ढांचा विकास निधि (यूआइडीएफ) योजना के तहत ऋण के रूप में स्वीकृत इस राशि से डेयरी कॉम्प्लेक्स के निर्माण का रास्ता साफ हुआ है। ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने नगर परिषद अधिकारियों को निर्माण प्रक्रिया जल्द शुरू कराने के निर्देश दिए हैं।
इसके लिए नगर परिषद पहले ही ब्राह्मण माजरा में करीब 21 एकड़ जमीन खरीद चुकी है। इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि छावनी के अलग-अलग इलाकों में चल रही डेयरियों को एक व्यवस्थित स्थान पर लाने की योजना साकार हो सकेगी।
इससे रिहायशी इलाकों में डेयरियों के कारण होने वाली गंदगी, गोबर के निस्तारण और जल निकासी जैसी समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इन समस्याओं में वास्तविक कमी कॉम्प्लेक्स के संचालन और डेयरियों की प्रभावी शिफ्टिंग पर निर्भर करेगी।
पशुपालकों को एक ही जगह मिलेंगी कई सुविधाएं
कॉम्प्लेक्स में हजारों पशुओं को रखने की क्षमता होगी। यहां अलग-अलग आकार के करीब 200 प्लाट बनाए जाएंगे, ताकि पशुओं की संख्या के अनुसार पशुपालकों को जगह मिल सके। पशुओं के उपचार के लिए वेटरनरी अस्पताल बनाने की योजना है, जहां निशुल्क उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने और डॉक्टरों व कर्मचारियों की चौबीस घंटे तैनाती का प्रावधान रखा गया है।
पशुपालकों को चारे के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े, इसके लिए चारा भंडारण की अलग व्यवस्था होगी। पशुओं की फीड और अन्य जरूरी सामग्री रखने के लिए ड्राई फीड स्टोर भी बनाया जाएगा। इसके अलावा पशुपालकों के आराम के लिए रेस्ट हाउस, शौचालय और पेयजल जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।
गोबर से बनेगी गैस, स्वच्छता में भी मिलेगी मदद
डेयरी कॉम्प्लेक्स में बायोगैस प्लांट लगाने का भी प्रावधान है। इससे पशुओं के गोबर का उपयोग ऊर्जा उत्पादन में किया जा सकेगा। भविष्य में गैस को पाइपलाइन के जरिये आगे सप्लाई करने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। यदि गोबर का नियमित संग्रह और वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण किया गया तो खुले में गोबर जमा होने और उससे पैदा होने वाली दुर्गंध की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है।
पशुओं को नहलाने और उनकी साफ-सफाई के लिए अलग तालाब बनाया जाएगा। कॉम्प्लेक्स में पानी की निकासी की व्यवस्था, बिजली, सब स्टेशन और आधुनिक एलईडी लाइटें भी प्रस्तावित हैं। इसके साथ पार्क, हरित गलियारा, वाहन पार्किंग, व्यावसायिक दुकानें और दूध को ठंडा रखने के लिए चिलिंग प्लांट जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
टांगरी नदी पर पुल बनने से घटेगी दूरी
डेयरी कॉम्प्लेक्स तक पहुंच आसान बनाने के लिए टांगरी नदी पर नया पुल बनाया जाएगा। अनिल विज के अनुसार, पहले पुल का निर्माण शुरू हुआ था, लेकिन ठेकेदार के काम छोड़ने के कारण अब दोबारा टेंडर किए जा रहे हैं। नया पुल टांगरी बांध रोड से जुड़ने पर पशुपालक सीधे कॉम्प्लेक्स तक पहुंच सकेंगे। इससे उन्हें जगाधरी रोड की ओर से घूमकर आने की जरूरत नहीं पड़ेगी और आवागमन अधिक सुविधाजनक हो सकेगा।
शहर और पशुपालकों, दोनों को होगा फायदा
डेयरी कॉम्प्लेक्स का उद्देश्य केवल पशुओं को एक स्थान पर रखना नहीं, बल्कि डेयरी संचालन को व्यवस्थित करना भी है। एक जगह पशु चिकित्सा, चारा, फीड, बिजली, पानी और दूध को ठंडा करने की सुविधा मिलने से पशुपालकों का रोजमर्रा का काम आसान हो सकता है।
वहीं, शहर में डेयरियों की व्यवस्थित शिफ्टिंग और गोबर के बेहतर निस्तारण से स्वच्छता सुधारने, जल निकासी पर दबाव कम करने और रिहायशी क्षेत्रों में होने वाली परेशानी घटाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, परियोजना का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि निर्माण कितनी जल्दी पूरा होता है, सुविधाएं नियमित रूप से संचालित होती हैं और शहर में फैली डेयरियों को योजनाबद्ध तरीके से कॉम्प्लेक्स में स्थानांतरित किया जाता है।
