रेलवे का बड़ा फैसला, एक लाइसेंस से पूरे देश में दौड़ेंगी कंटेनर ट्रेनें; 25 करोड़ में मिलेगा ऑल इंडिया परमिट
भारतीय रेलवे ने माल ढुलाई को सरल बनाने के लिए कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों के लिए लाइसेंस व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है।

HighLights
एक लाइसेंस से देशभर में कंटेनर ट्रेन चलाने की सुविधा।
₹25 करोड़ के शुल्क पर मिलेगा ऑल इंडिया परमिट।
ऑपरेटरों को 20 साल का अतिरिक्त विस्तार मिलेगा।
दीपक बहल, अंबाला। भारतीय रेलवे ने माल ढुलाई व्यवस्था को अधिक सरल, प्रतिस्पर्धी और निवेश के अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। रेल मंत्रालय ने कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों के लिए लाइसेंस व्यवस्था को आसान करते हुए अब एक ही लाइसेंस से देशभर में कंटेनर ट्रेन चलाने की सुविधा देने का निर्णय लिया है।
नई व्यवस्था के तहत ऑपरेटरों को अलग-अलग रेल मार्गों या क्षेत्रों के लिए अलग-अलग लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होगी। इसके लिए 25 करोड़ रुपये के एकसमान शुल्क पर ऑल इंडिया लाइसेंस दिया जाएगा। रेल मंत्रालय के इस फैसले को देश के माल परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इससे कंटेनर ट्रेन संचालकों को नए मार्गों पर कारोबार विस्तार के लिए बार-बार अलग अनुमति और लाइसेंस लेने की प्रक्रिया से राहत मिलेगी। रेलवे का लक्ष्य माल ढुलाई में रेल की हिस्सेदारी बढ़ाने के साथ-साथ परिवहन व्यवस्था को अधिक कुशल और प्रतिस्पर्धी बनाना है।
रूट के हिसाब से अलग-अलग लाइसेंस की व्यवस्था खत्म
नई नीति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों के लिए पहले लागू रूट आधारित लाइसेंस श्रेणियों को समाप्त कर दिया गया है। अब ऑपरेटर एक ऑल इंडिया लाइसेंस लेकर देश के विभिन्न रेल नेटवर्क पर अपनी कंटेनर सेवाओं का संचालन कर सकेंगे। इससे कारोबार के विस्तार में लगने वाला समय और प्रशासनिक प्रक्रिया दोनों कम होने की उम्मीद है। पहले अलग-अलग श्रेणियों और मार्गों के आधार पर लाइसेंस व्यवस्था होने के कारण ऑपरेटरों को कई स्तरों पर अनुमति और शुल्क संबंधी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था। नई व्यवस्था में इसे एकीकृत करते हुए प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सरल बनाया गया है।
20 साल का अतिरिक्त विस्तार भी बिना शुल्क
नई लाइसेंस व्यवस्था में ऑपरेटरों को लंबी अवधि की कारोबारी स्थिरता भी मिलेगी। दिशा-निर्देशों के अनुसार, शुरुआती कंसेशन अवधि पूरी होने के बाद संतोषजनक प्रदर्शन करने वाले ऑपरेटर को 20 वर्ष का अतिरिक्त विस्तार बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के दिया जाएगा।
भविष्य में निर्धारित शर्तों के अनुसार विस्तार की स्थिति में भी अतिरिक्त लाइसेंस शुल्क नहीं लिया जाएगा। इस प्रावधान से कंटेनर ट्रेन संचालन में लंबे समय के निवेश को बढ़ावा मिलने की संभावना है। कंपनियां रेलवे के माल ढुलाई क्षेत्र में आधुनिक कंटेनर, टर्मिनल, हैंडलिंग सुविधाओं और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में निवेश करने के लिए अधिक उत्साहित हो सकती हैं।
पुराने ऑपरेटरों को भी नई व्यवस्था का विकल्प
रेलवे बोर्ड ने मौजूदा कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों के हितों को भी ध्यान में रखा है। वर्तमान लाइसेंसधारी अपनी मौजूदा लाइसेंस अवधि पूरी होने तक पहले की व्यवस्था के तहत काम जारी रख सकेंगे।
वहीं, कैटेगरी-2, 3 और 4 के मौजूदा ऑपरेटरों को नई व्यवस्था में शामिल होने का विकल्प दिया गया है। इसके लिए उन्हें केवल 15 करोड़ रुपये का अंतर शुल्क जमा करना होगा। इसके बाद वे ऑल इंडिया लाइसेंस व्यवस्था का लाभ उठा सकेंगे। इससे पुराने ऑपरेटरों को भी बिना पूरी प्रक्रिया दोहराए नई नीति में आने का रास्ता मिलेगा।
उद्योगों और कारोबारियों को मिल सकता है फायदा
रेलवे के इस फैसले का सीधा असर देश के लॉजिस्टिक्स और माल परिवहन क्षेत्र पर पड़ने की उम्मीद है। एकल लाइसेंस व्यवस्था से कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों की कागजी कार्रवाई और प्रशासनिक लागत कम होगी।
इससे वे अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी सेवाओं का विस्तार तेजी से कर सकेंगे। विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए बेहतर माल परिवहन विकल्प उपलब्ध होने की संभावना है। यदि कंटेनर सेवाओं की संख्या बढ़ती है और प्रतिस्पर्धा बढ़ती है तो कारोबारियों को माल भेजने के लिए अधिक विकल्प मिल सकते हैं।
सड़क से रेल की ओर बढ़ सकता है माल परिवहन
रेल मंत्रालय के इस कदम का एक बड़ा उद्देश्य माल परिवहन को सड़क से रेल की ओर आकर्षित करना भी है। वर्तमान में बड़ी मात्रा में माल ट्रकों के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जाता है। कंटेनर ट्रेन नेटवर्क मजबूत होने से लंबी दूरी के माल परिवहन का कुछ हिस्सा रेल की ओर स्थानांतरित हो सकता है।
इससे राष्ट्रीय राजमार्गों पर भारी वाहनों का दबाव कम होने, ईंधन की बचत और परिवहन से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में कमी आने की उम्मीद है। साथ ही बंदरगाहों, औद्योगिक क्षेत्रों, माल टर्मिनलों और बड़े बाजारों के बीच तेज कंटेनर कनेक्टिविटी विकसित करने में भी मदद मिल सकती है।
निजी निवेश को मिलेगा बढ़ावा
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, नई लाइसेंस व्यवस्था का उद्देश्य केवल प्रक्रिया को आसान बनाना नहीं, बल्कि देश में फ्रेट लॉजिस्टिक्स के लिए मजबूत और प्रतिस्पर्धी इकोसिस्टम तैयार करना है। एक समान लाइसेंस और लंबी अवधि की कारोबारी निश्चितता निजी कंपनियों को निवेश के लिए बेहतर माहौल दे सकती है।
ऑल इंडिया लाइसेंस व्यवस्था लागू होने के बाद आने वाले वर्षों में कंटेनर ट्रेन संचालन के क्षेत्र में नई कंपनियों के प्रवेश और मौजूदा कंपनियों के विस्तार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। इससे रेलवे के माल ढुलाई कारोबार को गति मिलने के साथ देश की आपूर्ति श्रृंखला भी अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।
