उमेश भार्गव, अंबाला शहर

लोकसभा चुनाव की तपिश में तप रहे प्रत्याशी चुनाव जीतने के लिए अब एड़ी चोटी को जोर लगा रहे हैं। कोई मन्नतों के धागे बांध रहा है तो कोई मतदाताओं को मनाने में जुटा है। ज्यादातर रूठे हुए और उन मतदाताओं को मनाने में जुटे हैं जो किसी भी समय पासा पलट सकते हैं। ज्यों-ज्यों 12 मई नजदीक आ रही है त्यों-त्यों प्रत्याशियों की मेहनत का ग्राफ और तरीके भी बदलते जा रहे हैं। आखिरी चरण में प्रत्याशियों ने अपनी पूरी ताकत झौंकते हुए शराब पर पूरा जोर लगा दिया है। शराब के साथ कबाब न हो ऐसा हो ही नहीं सकता। ऐसे में अब शराब और कबाब पर जीत की इबारत लिखने की भरपूर कोशिशें शुरू हो चुकी हैं। नेताओं के इसी प्रयास के चलते ट्विन सिटी में इन दिनों शराब के साथ कबाब के रेटों में भी इजाफा हो चुका है। जो मीट 10 दिन पहले 110 रुपये प्रति किलो मिलता था वह अब 140-150 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुका है। जबकि जिस मीट के रेट 140 रुपये प्रति किलो थे वह अब 180 से 190 रुपये पहुंच चुके हैं। इसी तरह टिवन सिटी में भी शराब के रेट में अंतर आ गया है। छावनी में शहर की बजाए शराब के रेट तेज हो चुके हैं। बेशक रेट में इजाफा हो गया लेकिन शौकीनों की बल्ले-बल्ले है। क्योंकि पक्ष हो या विपक्ष दोनों की ओर से खूब सेवा पानी हो रही है। हां दिक्कत है तो सिर्फ साइलेंट वोटर्स को।

जिदा मुर्गे के भी बढ़े रेट

चुनावी तपिश में अब जिदा मुर्गे के रेट में भी 30 से 40 रुपये प्रति किलो इजाफा हो गया है। हालांकि जानकारों का कहना यह भी है कि गर्मी में इन जीवों की डेथ रेट में इजाफा होने से व्यापारियों को नुकसान अधिक झेलना पड़ता है। इसकी भरपाई के लिए रेटों में इजाफा कर दिया जाता है लेकिन कुछ ने यह भी माना की चुनावी गर्मी ने भी कुछ रेट बढ़ा दिए हैं। जिदा मुर्गा पहले 80 से 85 रुपये बिक रहा था जोकि अब 110 से 115 तक बिक रहा है। हालांकि गर्मी के चलते इन दिनों मछली के रेटों के गिरावट है। सर्दियों में मछली का रेट 140 रुपये था जोकि इस समय 120 से 130 हो चुका है। बेशक चुनाव आयोग ने आचार संहिता की लक्ष्मण रेखा भी खींची है लेकिन आखिरी चरण में इसका भी असर बेअसर का नजर आ रहा है।

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Posted By: Jagran

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