विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

अंबाला सिया वाटिका अवैध निर्माण पर घिरे अफसर, पार्षदों ने खोला मोर्चा तो हुई कार्रवाई; DC से विजिलेंस जांच मांगी

Published: Fri, 11 Sep 2026 05:32 PM (IST)

अंबाला छावनी के सिया वाटिका में अवैध लोहे के ढांचों को लेकर नगर परिषद पार्षदों ने डीसी से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

अंबाला सिया वाटिका अवैध निर्माण: पार्षदों ने डीसी से की उच्च स्तरीय जांच की मांग।

अंबाला सिया वाटिका अवैध निर्माण: पार्षदों ने डीसी से की उच्च स्तरीय जांच की मांग।

HighLights

  1. सिया वाटिका में अवैध लोहे के ढांचों पर पार्षदों की शिकायत

  2. अधिकारियों-बिल्डर गठजोड़ की आशंका, उच्च स्तरीय जांच की मांग

  3. अवैध निर्माण हटाने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

दीपक बहल, अंबाला। अंबाला छावनी के स्टाफ रोड स्थित सिया वाटिका में खड़े किए गए भारी-भरकम लोहे के ढांचों को लेकर नगर परिषद अंबाला सदर के निर्वाचित पार्षदों ने अब सीधे डीसी के दरबार में मोर्चा खोल दिया है। पार्षदों ने डीसी को शिकायत देकर पूरे मामले की हाई लेवल विजिलेंस जांच कराने की मांग की है।

उनका आरोप है कि बिना वैध बिल्डिंग प्लान और नगर परिषद की अनुमति के बड़े व्यावसायिक स्तर के लोहे के ट्रस और ऊंचे पिलर खड़े कर दिए गए, लेकिन स्थानीय अधिकारियों ने समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की। इससे पहले पार्षद स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल और विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को भी मिलकर लिखित शिकायत दे चुके हैं।

शुक्रवार को पार्षदों की मेहनत रंग लाई और निर्माण गिराना आरंभ किया गया। पार्षदों ने शिकायत में न केवल कथित अनधिकृत निर्माण पर सवाल उठाए हैं, बल्कि नगर परिषद के अधिकारियों की भूमिका, आदेशों के पालन में देरी और निर्माणकर्ताओं को कथित संरक्षण की भी जांच कराने की मांग की है। शिकायत के साथ मौके की तस्वीरें और अधिकारियों की ओर से जारी आदेशों को भी प्रमाण के तौर पर लगाया गया है।

‘अधिकारी-बिल्डर गठजोड़’ की आशंका जताई

पार्षदों ने आरोप लगाया कि सिया वाटिका की प्रॉपर्टी नंबर 126-बी में भारी लोहे के ट्रस और ऊंचे वर्टिकल पिलर खड़े किए गए हैं। इतना बड़ा ढांचा तैयार होने के बावजूद अधिकारियों की ओर से शुरुआत में इसे रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। पार्षदों ने इसे अधिकारियों की गंभीर लापरवाही बताते हुए अधिकारी-बिल्डर गठजोड़ की आशंका जताई है।

WhatsApp Image 2026-09-11 at 5.15.48 PM

उन्होंने डीसी से मांग की है कि निर्माण की अनुमति, मौके पर हुई कार्रवाई और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पूरी जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कथित अनधिकृत निर्माण किसकी अनुमति या लापरवाही से आगे बढ़ता रहा।

आदेश आया, रिमाइंडर आया, फिर भी नहीं खुली सील

सिया वाटिका की सीलिंग और डी-सीलिंग से जुड़े घटनाक्रम को भी पार्षदों ने प्रमुखता से उठाया है। उनके अनुसार, अनधिकृत निर्माण को लेकर नगर परिषद ने कार्रवाई करते हुए संपत्ति को सील किया था। इसके बाद अपील पर 3 जुलाई 2026 को जिला म्यूनिसिपल कमिश्नर ने सात दिन के भीतर डी-सीलिंग के निर्देश दिए।

WhatsApp Image 2026-09-11 at 5.15.48 PM (1)

पार्षदों का आरोप है कि निर्धारित अवधि बीतने के बावजूद आदेश का पालन नहीं हुआ। इसके बाद 16 जुलाई को मेमो जारी कर 17 जुलाई तक अनुपालन रिपोर्ट मांगी गई, लेकिन इसके बाद भी कार्रवाई नहीं हुई।

डीएमसी को ईओ को छोड़ एमई को सीधे आदेश देना पड़ा

मामले में 27 जुलाई का डीएमसी कार्यालय आदेश भी पार्षदों की शिकायत का अहम आधार है। शिकायत के मुताबिक, बार-बार आदेश के बावजूद कार्रवाई न होने के बाद डीएमसी ने नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी के बजाय नगर इंजीनियर हरिश शर्मा को सीधे मौके पर जाकर डी-सीलिंग कराने के निर्देश दिए।

WhatsApp Image 2026-09-11 at 5.15.49 PM

उन्हें कार्रवाई की वीडियोग्राफी कराने और फोटो सहित अनुपालन रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे। जरूरत पड़ने पर लॉकस्मिथ की मदद लेकर ताला खोलने के निर्देश भी दिए गए। पार्षदों ने इसी घटनाक्रम को अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल बताते हुए डीसी से जांच की मांग की है।

डीसी से पार्षदों की तीन प्रमुख मांगें

  • पार्षदों ने डीसी से मांग की है कि सिया वाटिका में बने भारी लोहे के ढांचों की हाई लेवल विजिलेंस जांच कराई जाए।
  • आदेशों के पालन में कथित देरी और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
  • मौके पर बने कथित अनधिकृत विस्तार और भारी लोहे के ढांचों को समयबद्ध तरीके से हटाया/ध्वस्त किया जाए। पार्षदों ने शिकायत में इसे केवल एक संपत्ति का विवाद न बताते हुए नगर परिषद की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़ा मामला बताया है।