जागरण संवाददाता, अंबाला शहर

भाजपा का गढ़ माने जाने वाले अंबाला जिले में आकर प्रदेशभर के सरपंचों ने भाजपा सरकार को ही चुनौती दे दी। अंबाला के प्रधान रणधीर ¨सह की अध्यक्षता में यह बैठक हुई। पंचायती राज एक्ट लागू नहीं करने के विरोध में गुस्साए सरपंचों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री और भाजपा सरकार के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए। सरपंच एसोसिएशन ने पहले सेशन जज हत्याकांड में आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं होने पर पुलिस के खिलाफ आंदोलन छेड़ने की बात कही जबकि इस हत्याकांड में दो सरपंचों के नाम भी सामने आए हैं उन्हें इस केस से बाहर निकालने के लिए पीड़ित परिवार से प्रार्थना करने की बात कही। लेकिन बाद में इस पर सहमति नहीं बन सकी। एसोसिएशन ने कहा कि आज तक यह दोनों उनके सामने भी पेश नहीं हुए। इसीलिए पुलिस इनके खिलाफ जो भी कार्रवाई करेगी उसे स्वीकार किया जाएगा। हालांकि यदि दोनों सरपंच एसो. के सामने अपनी बात रखते हैं तो पीड़ित परिवार से बातचीत की जा सकती है। लेकिन पुलिस कार्रवाई को किसी भी तरह बाधित नहीं होने दिया जाएगा।

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सरकार नहीं माने तो विपक्ष के साथ लगकर किया जाए विरोध..

रोहतक से आए अमित कादियान ने मंच से कहा कि झारखंड में यदि किसी स्कूल शिक्षक को छुट्टी भी लेनी होती है तो वह पहले सरपंच से अनुमति लेता है। उनकी एसीआर व तनख्वाह तक सरपंच की सहमति के बाद ही बनती हे। इसीलिए सरकार पर दबाव पंचायती राज लागू करवाया जाए। सरकार नहीं माने तो विपक्ष के साथ लगकर विरोध किया जाए। कुछ लोग मंत्रियों के पास जाकर हमारा सौदा करते हैं। ऐसे चमचों को बाहर किया जाए। यदि किसी को सरपंच या पदाधिकारी को मंत्री से मिलना भी है तो वह पहले संगठन में ध्यान में बात डाले और इसके बाद मिले। किलोई गांव से आए राकेश ने कहा कि संगठन को मजबूत बनाने के लिए जो भी काम हिस्से आता है उसे जी जान से करें। क्योंकि सरकार हमसे बनती है हम सरकार से नहीं। फरीदाबाद से आए महिपाल आर्य ने कहा कि पढ़ी लिखी पंचायतें होने के बावजूद यदि हम पंचायती राज लागू नहीं करवा पाए तो हम पर धिक्कार है। उन्होंने कहा कि आखिर का मैच ही रिजल्ट तय करता है। यदि हम अब तीन महीने भी जी जान से काम करते हैं तो सरकार को हमारे सामने घुटने टेकने पड़ेंगे। महेंद्रगढ़ से आए विष्णु दाबड़ ने कहा कि यदि पिछली कमेटी की तरह उनके साथ धोखा करना है तो ऐसी कमेटी को बनाना का कोई फायदा नहीं।

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शिक्षक सेशन जज हत्याकांड में अभी तक पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है। जबकि आश्वासन दिया था कि 10 दिनों के भीतर अन्य आरोपितों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। दो आरोपित सरपंचों को हमने निकालने की बात नहीं कही। हमने इस मामले के लिए पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। यदि आरोपित सरपंच अपनी बात रखते हैं तो उनकी बात सुनी जाएगी लेकिन पुलिस की कार्रवाई को हम प्रभावित नहीं करेंगे। ई-पंचायत प्रणाली का हम विरोध करेंगे। जहां से भी शुरुआत होगी उसी जिले में धरना दिया जाएगा।

रणधीर ¨सह, अंबाला।

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सीएम ¨वडो पर शिकायत देने वाले से लिया जाए शपथ पत्र.

किसी भी सरपंच पर सीएम ¨वडो लगा दो अगले ही दिन सरकार उसे सस्पेंड कर देती है। कोई जांच तक नहीं होती। जबकि सरपंच चुने जाने के समय सभी सरपंचों से नाजायज कब्जे न करने व विभिन्न प्रकार के मामलों में शपथ पत्र लिए जाते हैं। यदि इसी तरह शिकायतकर्ता से भी सीएम ¨वडो पर शपथ पत्र लिए जाएं तो 80 फीसद समस्याएं खुद ही दूर हो जाएं।

ओमप्रकाश, खेड़ी साकरा जिला कैथल।

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न तो हमें लैपटाप दिया न ही वाईफाई या नेट की सुविधा। पंचायत के पास कंप्यूटर आपरेटर भी नहीं है। ऐसे में ई-पंचायत को किसी भी तरीके से सरकार लागू करना चाहेगी तो उसका विरोध किया जाएगा। सरकार हमें तीन हजार रुपये दे रही है। इससे ज्यादा तो स्वीपर और चौकीदार ही लेता है। हमें तो सरकार ने तीन हजार का नौकर बना दिया है।

सुदेश, खरखौदा जिला सोनीपत।

Posted By: Jagran