- जिले की छह प्राइवेट आइटीआइ में अभी दो में एक भी नहीं हो पाया दाखिला

- सभी राजकीय आइटीआइ में 3017 में से महज 55 सीटें ही खाली, पहली बार शहर की वूमन आइटीआइ में फुल हुई सभी सीटें

जागरण संवाददाता, अंबाला शहर

मिशन आइटीआइ में दाखिले की कड़ी में पांच काउंसि¨लग के बाद भी जिले की दो प्राइवेट आइटीआइ में एक भी सीट नहीं भर सकी। शेष तीन प्राइवेट आइटीआइ की स्थिति भी कुछ अच्छी नहीं हैं। आर्मी आइटीआइ को छोड़कर शेष पांच प्राइवेट आइटीआइ में कुल 1018 में से अभी भी 702 सीटें खाली हैं। इन्हीं खाली सीटों पर दाखिले के लिए सरकार ने एक मौका और विद्यार्थियों को दे दिया है। छठी काउंसि¨लग का शेड्यूल भी अब आइटीआइ ने जारी कर दिया है। 5 सितंबर से 24 सितंबर तक विद्यार्थी इन खाली सीटों पर आवेदन कर सकेंगे। ऐसे में छठी काउंसि¨लग अब इन प्राइवेट आइटीआइ के लिए संजीवनी साबित हो सकती हैं।

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सरकारी आइटीआइ में दाखिलों की स्थिति सुधरी महज 57 सीटें खाली

जिले की सभी राजकीय आइटीआइ में इस बार गत वर्ष के मुकाबले अच्छी संख्या में दाखिले हुए हैं। सबसे ज्यादा उतार-चढ़ाव शहर की वूनम आइटीआइ में आया है। यहां पर 594 सीटों में से महज 3 सीटें ही वह भी केवल एक ट्रेडर में बची हैं। आज तक इतनी संख्या में इस आइटीआइ में कभी भी सीटें नहीं भर पाई। बता दें कि इसी आइटीआइ में महिला ड्राइ¨वग निशुल्क स्कूल भी चलाया जा रहा है। साथ ही यह आइटीआइ पूर्णत: एनसीवीटी हो चुकी है। इसीलिए इस साल अभी तक के इतिहास में इस आइटीआइ में सबसे ज्यादा दाखिले हुए हैं। वहीं जिले की सबसे बड़ी शहर स्थिति राजकीय ब्वायज आइटीआइ में 1119 में से महज 7, नारायणगढ़ वूमन आइटीआइ में 63 में से 13, बराड़ा आइटीआइ में 529 में से 12, भारनपुर गवर्नमेंट आइटीआइ में 419 में से 23 व मूलचंद गवर्नमेंट आइटीआइ अंबाला छावनी में 293 में से महज दो सीटें ही खाली हैं।

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यह है प्राइवेट आइटीआइ में खाली सीटों की स्थिति

1. हरियाणा प्राइवेट आइटीआइ धीन, में 84 में से 35

2. लाल अमी चंद प्राइवेट आइटीआइ उगाला, बराड़ा में 324 में से 158

3. एसआरआइटीआइ बलाना अंबाला शहर 273 में से शून्य

4. एसआरए प्राइवेट आइटीआइ रेलवे रोड अंबाला शहर 105 में से शून्य

5. सार्थिक प्राइवेट आइटीआइ नसीरपुर अंबाला शहर में 232 में से 131 सीटें खाली हैं।

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फोटो: 46

राजकीय वूमन आइटीआइ में ड्राइ¨वग स्कूल के अलावा यह आइटीआइ पूर्णत: 100 फीसद एनसीवीटी हो चुकी है। प्रदेश में इतनी सीटों वाली कोई भी महिला आइटीआइ पूर्णत: एनसीवीटी नहीं है। इसी का असर इस बार दाखिलों की संख्या पर भी पड़ा है।

भूपेंद्र पाल, ¨प्रसिपल।

Posted By: Jagran