- थानों में अतिरिक्त जगह न होने के कारण रख-रखाव बनी आफत

- उत्पीड़न के केसों में रिकवरी दाज नहीं ले जा रहे कुछ परिवार, 20 माह में दर्ज हुए दहेज मांग के 143 केस

राजीव ऋषि, अंबाला शहर

मायके से मिले दहेज के जिस सामान को दुल्हन जान से भी प्यारा समझती थी। उसके रख-रखाव में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ती थी। अब वही सामान पुलिस थानों में धूल फांक रहा है। पड़ा-पड़ा खराब हो रहा है। पति का घर छूटने के बाद दुल्हन व उसके परिवार को इस सामान से भी दिल भर गया है। यही वजह है कि कुछ लोग सामान को लेने नहीं आ रहे। थानों में अतिरिक्त जगह न होने के इस सामान की रखवाली पुलिस के लिए आफत बनी है। दहेज उत्पीड़न के इन केसों में ससुराल से यह सामान रिकवर किया गया है। कुछ थानों में पुलिस इस सामान का प्रयोग कर अपनी दिनचर्या को

बेहतर भी बना रहे हैं। बीते 20 माह में अंबाला के विभिन्न थानों में दहेज उत्पीड़न के 143 केस दर्ज हुए हैं। शादी के समय साथ जीने-मरने की कसमों के शायद अब मायने नहीं रहे। मन में दरारें आने के कारण दांपत्य जीवन टूट रहे हैं। रिश्ते तार-तार हो रहे हैं। घर की चारदीवारी लांघ बाहर निकले इस विवाद का संताप मजबूरन पुलिस को भी झेलना पड़ता है। ससुराल से बरामद दहेज के सामान की संभाल पुलिस की सिरदर्दी बन जाती है। कानूनी प्रक्रिया के तहत मजबूरी में संभाल करनी पड़ती है।

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केस में रिकवरी का प्रावधान

- उत्पीड़न के अधिकतर केसों में दुल्हन आरोप लगाती है कि उसका दहेज का सामान वापस नहीं दिया जा रहा। सामान की एक लिस्ट भी लगाती है। इसी कारण पुलिस केस में अमानत में खयानत की धारा 406 लगाती है। गिरफ्तारी के बाद कोर्ट में इसी सामान की रिकवरी के लिए आरोपित का रिमांड लिया जाता है। दुल्हन व उसके परिवार के साथ ससुराल से बरामदगी की जाती है। दोनों पक्षों के लिस्ट पर साइन कराए जाते हैं। जमानत पर बहस के दौरान रिकवरी की प्रतिशत को भी आधार बनाया जाता है।

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यूं की जाती है सुपरदारी

- नियमानुसार तो दहेज के बरामद सामान की सुपरदारी कोर्ट के आदेश पर ही होती है लेकिन यदि दुल्हन तुरंत ले जाना चाहे तो पंचायती स्तर पर लिखित सहमति में यह सामान सौंप दिया जाता है। यदि कोई न आए तो बार-बार नोटिस भेजकर आग्रह किया जाता है। किसी के न आने पर सामान की देखभाल पुलिस की मजबूरी बन जाती है।

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ये हैं सामान न ले जाने के कारण

- तफ्तीश में सामने आया है कि केवल तीन फीसदी परिवार दहेज का सामान लेने नहीं आ रहे। कारण बना है कि शादी के लंबे समय तक ससुराल में प्रयोग किए जाने के कारण सामान प्रयोग के बाद टूट-फूट चुका है। उसमें से पूरा रिकवर नहीं होता। खुली जगह होने के कारण गांव के लोग तो सामान ले जाते हैं लेकिन शहरी इलाके में छोटे घर होने के कारण परेशानी है। सामान को रखने के लिए जगह न होने के कारण कुछ परिवार दहेज का सामान लेने नहीं आते।

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दहेज उत्पीड़न के केसों का रिकार्ड

- वर्ष 2017 के 56 केसों के मुकाबले इस साल तब तक 58 केस दर्ज हुए हैं। इस साल अब तक 22 केस केवल महिला थाने में दर्ज हुए हैं जबकि जिले के अन्य पुलिस थानों में। पहले ये केस केवल महिला थाने में दर्ज होते थे लेकिन कई बार पीड़िता ने अंबाला में आने की बजाय अपने क्षेत्र के थानों में केस दर्ज करवाने की अपील की। इसलिए अब दहेज उत्पीड़न के केस सभी थानों में दर्ज हो रहे हैं।

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सामान की संभाल में होती है परेशानी : सुनीता, इंस्पेक्टर, महिला थाना

- महिला थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सुनीता मानती है कि दहेज के सामान की संभाल में परेशानी होती है। पीड़िता परिवारों को तुरंत सामान भी सौंप दिया जाता है लेकिन कई कोर्ट से सुपरदारी करवाते हैं। थाने में अतिरिक्त जगह न होने के कारण सामान को थोड़ा-थोड़ा सभी कमरों में रखकर संभाला जाता है। पूरा रिकार्ड मेंटेन किया जाता है। संबंधित परिवारों को नोटिस दिए जाते हैं लेकिन केवल दो फीसद परिवार सामान लेने नहीं आ रहे।

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Posted By: Jagran