-सेशन कोर्ट का फैसला, अगस्त 2015 की घटना के 2 दोषी पहले से जेल में

-मौत के घाट उतारने के बाद गाड़ दिया था खेतों में जागरण संवाददाता, अंबाला शहर

ज्वेलर रजनीश वर्मा हत्याकांड के तीसरे दोषी पंजाब के लालड़ू वासी बहादुर ¨सह को भी अदालत ने उम्रकैद और 60 हजार रुपये जुर्माना लगाया। सेशन जज विक्रम अग्रवाल की कोर्ट द्वारा सुनाए गए इस फैसले में जुर्माना न भरने पर तीन साल अतिरिक्त सजा का प्रावधान है।

अगस्त 2015 की घटना में सजायाफ्तार जस¨वदर ¨सह व सचिन पहले से जेल में बंद हैं। फरार हो जाने के बाद पुलिस ने बहादुर ¨सह को भगौड़ा घोषित कर दिया था। वह 2016 में पकड़ा गया था। पैसों के लालच के लिए दोषियों ने डील के बहाने लालड़ू बुलाया। कोल्ड¨ड्रक में नशा पिलाकर बेहोश कर दिया। उसके बाद मौत के घाट उतारकर शव को खेतों में गाड़ दिया था। बलदेवनगर थाने में दर्ज गुमशुदगी के केस को खुलासा होने के बाद हत्या की धारा में तब्दील कर दिया गया था। सीआइए व साइबर सैल की मदद से यह केस सुलझाया गया था। इस मामले में करीब डेढ़ दर्जन गवाह पेश हुए। इनमें पुलिस, परिवार, प्रत्यक्षदर्शी, डाक्टर व अन्य लोग शामिल हैं। जानकारी के अनुसार तीन दिन पूर्व दोषी करार दिए गए बहादुर ¨सह को आज सजा पर फैसले के लिए जेल से लाकर कोर्ट के बक्शीखाने में रखा गया था। देर शाम सुनाए गए फैसले से पूर्व दोनों पक्षों ने सजा अवधि पर अपना-अपना पक्ष रखा। अभियोजन ने अधिक से अधिक तो बचाव पक्ष ने कम से कम सजा की अपील की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सार्वजनिक किया गया।

फैसले के मुताबिक हत्या के बहादुर को उम्रकैद के साथ 50,000 और लूट की धारा 394 के तहत 10 साल कैद और 10,000 जुर्माना लगाया गया। हत्या में जुर्माना न भरने पर दो तथा लूट में 1 साल की अतिरिक्त सजा का प्रावधान रखा गया।

केस के मुताबिक रजनीश वर्मा परिवार को यह कहकर गया था कि कालका की एक पार्टी से डी¨लग है। स्कूटी पर जाने के बाद जब वह वापस नहीं लौटा तक परेशान परिजनों ने अपने स्तर पर तलाश के साथ-साथ पुलिस को शिकायत देकर गुमशुदगी का केस दर्ज करवा दिया। मामले को संगीन समझकर सीआइए व साइबर टीमों ने जब जांच की तो पता चला कि लालड़ू जाने के बाद रजनीश का फोन बंद हो गया था। वहां के सुनारों पर नजर रखी गई। आखिरी काल के बाद जब जस¨वदर ¨सह व सहयोगी सचिन से पूछताछ की तो दोनों ने सच उगल दिया था। बहादुर ¨सह फरार होने में सफल हो गया था जोकि 2016 में पकड़ा गया। 2017 में जस¨वदर व सचिन को सजायाफ्ता करार दे दिया गया था।

Posted By: Jagran