जागरण संवाददाता, अंबाला

पुलिस महानिदेशक प्रदेश की जनता को कोई भी केस दर्ज करवाने के लिए थाने-चौकियों में चक्कर कटवाने से राहत दिलवाने के लिए एफआइआर ऑनलाइन किए जाने का दम भरते हैं। लेकिन अंबाला में राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) न तो महानिदेशक के आदेशों को मानती है और न ही सुप्रीम कोर्ट के ऑनलाइन एफआइआर करने के आदेशों को तवज्जो दे रही है।

प्रदेश के अन्य जिलों में बने सभी जीआरपी थानों में दर्ज हुए मामलों को तुरंत पुलिस के हर समय वेबपोर्टल पर ऑनलाइन कर किया जा रहा है लेकिन अंबाला में इसका अनुपालन नहीं हो रहा है। करीब डेढ़ माह से अंबाला जीआरपी थाने में दर्ज एक भी मुकदमे को वेब पोर्टल पर आनलाइन अपडेट ही नहीं किया गया है। जबकि रेलवे एसपी का कार्यालय भी अंबाला में ही बना हुआ है और इसके बावजूद थाने के कर्मियों को किसी का डर नहीं है।

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के थानों में महिलाओं से जुड़े मामलों की कोई भी दर्ज होने वाली एफआइआर को ऑनलाइन करने के आदेश जारी किए थे। इसके लिए बाकायदा गृह मंत्रालय के आदेशों पर तकरीबन सभी राज्यों ने वर्ष 2015 में अलग-अलग समय पर क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रै¨कग नेटवर्क सिस्टम (सीसीटीएनएस) के तहत एफआइआर ऑनलाइन करना शुरू कर दिया था। वर्ष 2017 में ही हरियाणा में मुख्यमंत्री ने हरसमय वेब पोर्टल पर प्रदेश के सभी थानों को ऑनलाइन कर दिया था। वर्ष 2015 से थानों में दर्ज सभी एफआइआर को ऑनलाइन कर दिया था। क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रै¨कग नेटवर्क सिस्टम (सीसीटीएनएस) के तहत थाने-चौकियों को जोड़कर सबसे अधिक राहत पुलिस कर्मचारियों को पहुंचाने का ही मकसद था। थानों-चौकियों में तैनात मुंशियों को कागजी कार्रवाई से छुटकारा मिलता तो केस की सभी सूचनाएं थाना प्रभारी से लेकर संबंधित पुलिस अधिकारियों को ऑनलाइन मिलती। लेकिन, जनता की सहूलियत के लिए शुरू किए गए ऑनलाइन एफआइआर के दावे के प्रति जीआरपी लापरवाह है।

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डेढ़ महीने से कोई एफआइआर नहीं की ऑनलाइन

दैनिक जागरण ने जब प्रदेश के अन्य जिलों में बने जीआरपी थानों का अगस्त माह का डाटा चेक किया तो दर्ज हो चुकी 100 प्रतिशत एफआइआर ऑनलाइन मिली। लेकिन अंबाला जीआरपी थाने में 26 जुलाई के बाद एक भी एफआइआर को हर समय पोर्टल पर ऑनलाइन ही नहीं किया गया है। जबकि छावनी रेलवे स्टेशन प्रदेश में अधिक अतिसंवेदनशील स्टेशन माना जाता है। यहां ट्रेनों में सबसे अधिक चोरी की वारदातें होती है और यह मामले अंबाला जीआरपी थाने में दर्ज होते हैं। ऐसे में चोरी की वारदातों को रोकने में नाकाम जीआरपी खुद की फजीहत को बचाने के लिए अब एफआइआर ही ऑनलाइन नहीं करती है। इस बारे में जीआरपी थाने के पुलिस जवान ने कहा कि वह केवल मामला दर्ज करते हैं, ऑनलाइन एफआइआर एसपी कार्यालय से होती है। ऐसे में अब सारा इलजाम एसपी कार्यालय के कर्मियों पर डाला जा रहा है।

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ऑलाइन अगस्त में दर्ज थानों का रिकॉर्ड

नाम मामले नाम मामले

अंबाला 00 करनाल 01

बहादुरगढ़ 03 कुरुक्षेत्र 04

चंडीगढ़ 04 पानीपत 06

गुड़गांव 04 रेवाड़ी 17

हिसार 19 रोहतक 00

जगाधरी 00 सिरसा 06

जींद 04 सोनीपत 22

कालका 06 फरीदाबाद 11

Posted By: Jagran