जागरण संवाददाता, अंबाला

जरूरतमंदों की मदद करना हो तो कुछ भी मुश्किल आड़े नहीं आती। कुछ ऐसा ही हेल्प टीम के सदस्यों के साथ भी हुआ है। कॉलेज में पढ़ते हुए युवाओं ने अपना ग्रुप बनाया और शुरू कर दिया जरूरतमंदों की मदद करने का काम। आज सवा साल के करीब हो चुके हैं और माह में एक-दो बार तो लंगर लगाते ही हैं, साथ ही जरूरतमंदों को कंबल, बच्चों को स्टेशनरी भी वितरित करते हैं। मौजूदा समय में 30 युवा हैं, जो अपने स्तर पर किसी न किसी तरह से जरूरतमंदों की सेवा में जुटे हैं। इन युवाओं में हन्नी पासी, चिराग पासी, पीयूष पंडित, सुधांशू, मोंटी, गौरव, विजय सहित अन्य युवा शामिल हैं। ऐसे शुरू किया सफर

हेल्प टीम के हन्नी पासी व चिराग पासी ने बताया कि दिसंबर 2018 में ग्रुप शुरू किया था और उस समय कुछ ही लोग थे। सबसे पहले 50 रुपये के योगदान के साथ लोगों को खाना खिलाना शुरू किया गया। इसके बाद धीरे-धीरे युवाओं ने जुड़ना शुरू कर दिया। कुछ माह बाद ही सदस्यों की संख्या 30 तक पहुंच गई, जिनमें दो युवतियां भी शामिल हैं। यह सभी वाट्सएप ग्रुप हेल्प टीम के साथ जुड़े हैं। माह में दो बार लंगर लगाया जाता है और इसकी सूचना ग्रुप में ही डाल दी जाती है। सूचना मिलते ही लोग अपना आर्थिक योगदान देते हैं।

ग्रुप के सदस्य के पिता यह लंगर बनाते हैं और उसे गाड़ी में लोड कर रेलवे स्टेशन ले जाते हैं। आसपास फुटपाथ पर सो रहे लोगों को सूचना दी जाती है और फिर कुछ देर बाद लंगर शुरू कर दिया जाता है। खास है कि डस्टबिन भी साथ ही होता है। पॉकेट मनी से होता है योगदान

इस ग्रुप से जुड़े अधिकतर सदस्य अभी रोजगार की तलाश में हैं। घर से जो भी जेबखर्ची मिलती है, वे उससे ही अपना योगदान देते हैं। कुछ सदस्य पांच सौ रुपये तक का योगदान देते हैं। धीरे-धीरे यह सहयोग राशि भी बढ़ रही है। उम्मीद है कि सदस्यों की संख्या भी बढ़ जाएगी। बढ़ रहा है ग्रुप का दायरा

सदस्यों का कहना है कि सिर्फ लंगर लगाने तक ही सेवा सीमित नहीं है। सर्दियों में सदस्य हजारों रुपये की राशि इकट्ठा कर फुटपाथ पर सो रहे लोगों को गर्म कपड़े भी वितरित करते हैं। इसके अलावा शिक्षा ग्रहण करने वाले जरूरतमंद विद्यार्थियों को भी स्टेशनरी आदि वितरित की जाती है।

Posted By: Jagran

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