उमेश भार्गव, अंबाला शहर

पांच साल साल कूड़े को कबाड़ बनने से रोकने और शहर को कचरा मुक्त करने के लिए लगने वाला वेस्ट टू एनर्जी प्लांट जिले में आज तक धरातल पर नहीं उतर पाया। वर्ष 2017 में इसकी घोषणा की गई थी। घोषणा के बाद जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ। वर्ष 2020 में 280 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले वेस्ट टू एनर्जी प्लांट की योजना कागजों में आई। इसे भी 2020 सितंबर माह में शुरू किया जाना था लेकिन आज तक इस पर कोई काम नहीं हुआ। लिहाजा इसका खामियाजा जिलेवासियों को स्वच्छता सर्वेक्षण-2022 में उठाना पड़ेगा। वेस्ट टू एनर्जी प्लांट नहीं लगने से जिला गारबेज मुक्त घोषित नहीं किया जा सकता। इतना ही नहीं प्रोसेसिग एंड डिस्पोजल के 1200 अंकों में से भी कुछ अंक कटने तय हैं। हालांकि अधिकारी अंबाला को स्वच्छता में टाप-20 शहरों में शामिल करने का दावा कर रहे हैं लेकिन प्लांट नहीं लगने के कारण यह सपना पूरा करना इतना आसान नहीं होगा। यदि वेस्ट टू एनर्जी प्लांट सिरे चढ़ जाता तो इससे न केवल अंबाला और यमुनानगर में सफाई व्यवस्था दुरुस्त होती, बल्कि यहां से उठाए जाने वाले कचरे से बिजली का उत्पादन होने से कूड़ा कबाड़ न रहकर बिजली उत्पादन का जरिए बन जाता। 7500 अंकों की है परीक्षा

वर्ष 2021 में स्वच्छता सर्वेक्षण परीक्षा छह हजार अंकों की थी इसमें से 3352 अंक अंबाला नगर निगम ने अर्जित कर अब तक का बेहतरीन प्रदर्शन किया था। लेकिन इस बार 7500 अंकों की परीक्षा होनी है। इसमें कुल 4500 बिदुओं पर जांच होनी है। इसमें तीन हजार अंक सर्विस लेवल प्रोग्रेस के हैं। इसमें डोर टू डोर कूड़ा क्लेक्शन, कूड़े की छंटनी और निस्तारण शामिल है। इसी तरह 2250 अंक शहर की नागरिकों की आवाज के हैं। शहर के लोग सफाई को लेकर क्या कहते हैं। 2250 अंक सर्टिफिकेशन के तय किए गए हैं। इसमें ओडीएफ वाटर व गारबेज फ्री वार्ड शामिल हैं यानी सभी 20 वार्ड बड़े डस्टबिन मुक्त और कूड़े का सही प्रबंधन। जोकि जिले में अभी तक नहीं हो सका। गारबेज फ्री के ही 1250 अंक हैं। गत वर्ष भी यहीं पर शून्य अंक मिले थे। इस बार भी यही स्थिति तय है। इसी तरह कुल 7500 अंकों में से प्रोसेसिग और डिस्पोजल के 1200 अंक हैं। हालांकि इसमें कुछ अंक मिल जाएंगे क्योंकि नगर निगम के द्वारा पटवी में कूड़े की छंटनी और निस्तारण प्राइवेट कंपनी से करवाया जा रहा है। लेकिन अपना प्लांट नहीं होने के कारण पूरे अंक यहां भी नहीं मिलेंगे। अब 31 मार्च तक चलेगा सर्वेक्षण

स्वच्छ सर्वेक्षण-2022 का सर्वे अब 31 मार्च तक चलेगा। पहले शहर की सफाई व्यवस्था की परीक्षा लेने टीम को एक से 28 फरवरी के बीच आना था लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण सर्वे कार्य समय पर पूर्ण नहीं हो सकता था। लिहाजा केंद्र सरकार को सर्वे की अवधि बढ़ानी पड़ी है। लेकिन अब टीम अपना दौरा 1 मार्च से 31 मार्च के बीच कभी भी कर सकती है। दो दिन पहले नए आदेश जारी होने के बाद नगर निगम का अमला एक बार फिर से अलर्ट मोड़ पर आ गया है। स्वच्छता सर्वेक्षण-2022 की तारीख अब बढ़ा दी गई है। पहले 1 से 28 फरवरी तक टीम ने निरीक्षण करने आना था लेकिन अब टीम 1 मार्च से 31 मार्च के बीच कभी भी आ सकती है। स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए हम पूरी तरह से तैयार हैं।

अमन ढांडा, डीएमसी।

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