अंबाला [दीपक बहल]। रेल मंत्रालय ने रेलकर्मियों के बच्चों को 21 वर्ष तक ही निशुल्क मेडिकल सुविधा की शर्त को हटा दिया है। बेरोजगारी का ठप्पा होने पर आश्रितों को मेडिकल सुविधा मिलती रहेगी। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि रोजगार या फिर बेरोजगारी की सीमा कहां तक है। किसी ने अस्थायी नौकरी कर रखी है उसे भी रेलवे रोजगार की श्रेणी में मान रहा है, जबकि उसकी नौकरी स्थायी नहीं है। अस्थायी या स्थायी की स्थिति स्पष्ट न होने कारण आश्रितों की परेशानी बढ़ गई है।

सूत्रों के अनुसार रेल कर्मचारियों के बच्चों को पहले 21 वर्ष की आयु तक फ्री मेडिकल सुविधा मिलती थी, रेलवे बोर्ड ने उम्र की सीमा हटा दी है। इससे लाखों कर्मचारियों को राहत पहुंची है। रेलवे ने बेरोजगारी की नई शर्त लगा दी। यदि, बेटी की शादी हो चुकी है तो उसे भी मेडिकल सुविधा का लाभ नहीं मिलेगा। देशभर के रेलवे अस्पताल या फिर रेलवे के पैनल पर जो भी बड़े बड़े प्राइवेट अस्पताल हैं, वहां भी फ्री में इलाज होता है।

पर्सनल विभाग करेगा डोर-टू डोर जांच

रेलकर्मी के आश्रितों को मेडिकल सुविधा के लिए फिर से रेलवे में आवेदन करना पड़ेगा। इसके बाद पर्सनल विभाग की टीम संबंधित कर्मी के आवास पर जाकर छानबीन करेगी। छानबीन में बेरोजगार या रोजगार का पता किया जाएगा और रिपोर्ट आला अफसरों को सौंप दी जाएगी।

पिता-पुत्र एक साथ सीख सकेंगे कंप्यूटर

उधर, रेलकर्मियों को अब निशुल्क कंप्यूटर की ट्रेनिंग भी दी जाएगी। इसके लिए रेलकर्मी के साथ-साथ उसके बच्चे भी आवेदन कर सकते हैं। बेरोजगार बेटे या बेटी को उसके करियर के लिए भी ज्ञान दिया जाएगा। इनके लिए सेमिनार होंगे, जिसमें बताया जाएगा कि वे किस फील्ड में जा सकते हैं और क्या-क्या लाभ मिलेगा। कंप्यूटर ट्रेनिंग के लिए प्राइवेट कंपनी या संचालकों से बातचीत कर ली गई है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt