जागरण संवाददाता, अंबाला: पानीपत-जालंधर सिक्सलेन प्रोजेक्ट में पशुओं को रोकने के लिए फेंसिग की योजना फेल होती दिख रही है। नेशनल हाइवे अथारिटी आफ इंडिया (एनएचएआइ) ने जिन स्थानों पर फेंसिग लगाई, उनको लोगों ने काटकर रास्ता बना दिया है, जबकि इसको दोबारा दुरुस्त तक नहीं किया है। यही लापरवाही हाइवे पर चलने वाले वाहनों के लिए सबसे बड़ा खतरा बनी हुई है, जबकि एनएचएआइ इस ओर से आंखें मूंदे हुए है। अंबाला-दिल्ली हाइवे पर कई ऐसे प्वाइंट हैं, जहां पर फेंसिग को जानबूझकर तोड़ा गया, जबकि इसकी शिकायत करने के बावजूद ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में लावारिस जानवर कभी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। यह फेंसिग पेट्रोल पंप, ढाबा संचालकों द्वारा काटी गई हैं, ताकि ग्राहकों की पहुंच आसानी से उन तक हो सके। अपने थोड़े फायदे के लिए लोगों की जान को खतरे में डाला जा रहा है। यह मामला एनएचएआइ के संज्ञान में आने के बावजूद पूरी तरह से लापरवाही बरती जा रही है। करीब दस लोकेशन पर इस तरह की फेंसिग काटकर रास्ता बनाने की शिकायत भी पुलिस को दी गई, लेकिन कारोबारियों के प्रभाव के चलते फेंसिग को पूरा नहीं किया गया है। 291 किलोमीटर के प्रोजेक्ट पर लग रही फेंसिग

पानीपत-जालंधर सिक्सलेन के इस प्रोजेक्ट पर करीब 291 किलोमीटर एरिया में यह फेंसिग लगानी है। यह प्रोजेक्ट सोमा कंपनी द्वारा पूरा किया जाना है। हाइवे पर दौड़ने वाले वाहनों की स्पीड इतनी अधिक है कि हल्की सी ब्रेक ही बड़े हादसे का कारण बन सकती है। सबसे ज्यादा खतरा हाइवे के किनारे घूमने वाले लावारिस पशु हैं, जो कभी भी सड़क पर आ सकते हैं। ऐसी स्थिति से बचने के लिए ही फेंसिग लगाई जा रही है। लेकिन हैरानी है कि जहां पर फेंसिग लगाई गई, उसे कई जगहों से काटकर ढाबा या पेट्रोल पंप तक पहुंचने का रास्ता बना दिया। फेंसिग काटकर बनाए गए इस रास्ते से पशु हाइवे तक पहुंच सकते हैं। एग्रीमेंट की मानें, तो कंपनी फेंसिग लगा देती है और यदि किसी हादसे में फेंसिग टूट जाती है, ऐसी स्थिति में कंपनी फेंसिग दोबारा लगाएगी। लेकिन यदि फेंसिग काटकर कोई रास्ता बना लेता है, तो कंपनी की जिम्मेदारी नहीं है। शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं

जिन लोकेशन पर यह फेंसिग काटकर रास्ता बना दिया गया, उसकी शिकायत पुलिस में भी दी गई है। लेकिन आलम यह है कि इस पर कार्रवाई तक नहीं हुई और दोबारा इसे चैक भी नहीं किया गया। कंपनी ने शिकायत तो कर दी, लेकिन मामला इससे आगे नहीं बढ़ पाया है। दूसरी ओर एनएचएआइ भी कहता है कि मामला दर्ज कराया जाएगा, जबकि अभी तक कुछ ठोस कदम तक नहीं उठाया गया।

Posted By: Jagran

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